दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सहकारी संस्था भारत में ही है — इफको (IFFCO)। किसानों की सहकारी समितियों के गठजोड़ से बनी यह संस्था आज देश के सबसे बड़े उर्वरक निर्माता के तौर पर पांच करोड़ से ज्यादा किसानों तक पहुंच रखती है।
स्थापना की पृष्ठभूमि
3 नवंबर 1967 को इफको की स्थापना एक बहु-राज्यीय सहकारी समिति के रूप में हुई थी। इसका मूल विचार यह था कि देशभर की सैकड़ों-हजारों प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां मिलकर अपना खुद का उर्वरक कारखाना खड़ा करें, ताकि किसानों को वाजिब दाम पर खाद मिल सके और मुनाफा भी किसानों तक ही वापस लौटे। उद्यबहनसिंहजी नटवरसिंहजी जेठवा को इस पहल का प्रमुख श्रेय दिया जाता है।
आज का आकार
वर्तमान में इफको से लगभग 35,000 सदस्य सहकारी समितियां जुड़ी हैं, जो पांच करोड़ से अधिक किसानों तक इसकी पहुंच बनाती हैं। कलोल और कांडला (गुजरात), फूलपुर और आंवला (उत्तर प्रदेश), तथा पारादीप (ओडिशा) में इसके प्रमुख संयंत्र स्थित हैं, जहां यूरिया, डीएपी, एनपीके सहित कई तरह के उर्वरक बनाए जाते हैं। ओमान, जॉर्डन और सेनेगल में संयुक्त उद्यमों के जरिए इसकी मौजूदगी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी है।
वित्तीय स्थिति और वैश्विक पहचान
वित्त वर्ष 2025 में इफको का राजस्व लगभग 42,662 करोड़ रुपये रहा। यूरिया बाजार में इसकी हिस्सेदारी करीब 19 प्रतिशत और कॉम्प्लेक्स उर्वरकों में 31 प्रतिशत है, जिससे यह भारत की सबसे बड़ी उर्वरक निर्माता कंपनी बन जाती है। वर्ल्ड कोऑपरेटिव मॉनिटर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार टर्नओवर के आधार पर यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी सहकारी संस्था है।
यह मॉडल क्यों अहम है
इफको दिखाती है कि छोटी-छोटी प्राथमिक सहकारी समितियां आपस में जुड़कर कितना बड़ा औद्योगिक ढांचा खड़ा कर सकती हैं। सहकारी-दर-सहकारी (cooperative of cooperatives) का यह मॉडल आज भी देशभर की खाद, बीज और कृषि आदान सहकारी समितियों के लिए एक बेंचमार्क माना जाता है।
स्रोत एवं संदर्भ
- Wikipedia — Indian Farmers Fertiliser Cooperative (IFFCO)
- IFFCO.in — Story of IFFCO एवं Milestones पेज
- NCBA CLUSA — “50 Years of IFFCO Demonstrates Power of Co-op Business Model”
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