केरल के कोझिकोड जिले के एक छोटे से गांव उरालुंगल से शुरू हुई एक मजदूर सहकारी समिति आज भारत की सबसे पुरानी और सबसे सफल श्रमिक सहकारी संस्था मानी जाती है। यह है उरालुंगल लेबर कॉन्ट्रैक्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी (ULCCS), जिसने सौ साल से ज्यादा का सफर तय किया है।
बेरोजगार मजदूरों की पहल
13 फरवरी 1925 को आध्यात्मिक गुरु वागभटानंद की प्रेरणा से उरालुंगल गांव के बेरोजगार मजदूरों ने मिलकर एक “पारस्परिक सहायता समूह” बनाया था। शुरुआत में यह छोटे-छोटे ठेके ही लेती थी, लेकिन ईमानदारी और गुणवत्ता को मुनाफे से ऊपर रखने की नीति ने धीरे-धीरे इसे बड़ी परियोजनाओं तक पहुंचाया। 1999 में मिले छह करोड़ रुपये के एक बड़े प्रोजेक्ट ने संस्था के लिए टर्निंग पॉइंट का काम किया।
आज तक के प्रमुख काम
अब तक यह सहकारी समिति 4,000 से अधिक परियोजनाएं पूरी कर चुकी है, जिनकी कुल कीमत 1,000 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी जाती है। कोझिकोड सरोवरम प्रोजेक्ट, कप्पड़ बीच का जीर्णोद्धार, अरायिदथुपलम और एडासेरी कडावु पुल, आलप्पुझा स्थित सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज, तथा कासरगोड जिले में एनएच-66 के छह-लेन निर्माण जैसे बड़े काम इस सूची में शामिल हैं। सोसाइटी लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग, सिंचाई और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े ठेकों में सक्रिय है।
सामाजिक सरोकार
ULCCS सिर्फ निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है — यह न्यूरोडाइवर्जेंट (दिव्यांग/विशेष जरूरतों वाले) समुदाय के लिए एक प्रशिक्षण संस्थान भी चलाती है। लगभग 1,415 सदस्यों वाली इस सहकारी संस्था में मुनाफे का इस्तेमाल व्यक्तिगत लाभ के बजाय संस्था की क्षमता बढ़ाने और सामुदायिक कल्याण में किया जाता है।
सीख क्या है
ULCCS की कहानी साबित करती है कि बिना बड़ी शुरुआती पूंजी या तकनीकी विशेषज्ञता के भी, अनुशासन और ईमानदार कामकाज के दम पर एक सहकारी समिति दशकों में बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट संभालने की क्षमता हासिल कर सकती है। श्रमिक सहकारी मॉडल में रुचि रखने वाली संस्थाओं के लिए यह एक जीवंत उदाहरण है।
स्रोत एवं संदर्भ
- Wikipedia — Uralungal Labour Contract Co-operative Society
- Co-operative News (thenews.coop) — “A century of ULCCS”
- The News Minute — “From caste struggles to cyberpark: 100 years of Uralungal workers’ cooperative”
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