असंगठित क्षेत्र की महिलाओं को संगठित कर बैंकिंग तक उनकी पहुंच बनाना — यह लक्ष्य लेकर 1972 में अहमदाबाद में एक संस्था शुरू हुई थी, जो आज 37 लाख से ज्यादा महिलाओं का नेटवर्क बन चुकी है। यह है सेवा (SEWA) — सेल्फ एम्प्लॉयड वीमेंस एसोसिएशन।
टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन से निकली पहल
12 अप्रैल 1972 को इला भट्ट के नेतृत्व में सेवा की स्थापना हुई थी, जो 1920 में बनी टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन (टीएलए) की महिला शाखा से निकली थी। रेहड़ी-पटरी पर सामान बेचने वाली, सिर पर बोझा ढोने वाली और घरेलू कामगार महिलाओं के साथ हुई मुलाकातों से इस संगठन की नींव पड़ी, जिन्हें उचित मजदूरी तक नहीं मिल पाती थी। इला भट्ट को 1977 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
ट्रेड यूनियन और सहकारिता का संगम
सेवा की खासियत यह है कि यह एक ट्रेड यूनियन और सहकारी नेटवर्क, दोनों के रूप में काम करती है। इसके सदस्य 125 से अधिक अलग-अलग पेशों से जुड़ी हैं। 1974 में स्थापित सेवा बैंक इसकी सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक है — यह अनपढ़ और गरीब महिलाओं के लिए बनाई गई एक सहकारी बैंक है, जिसे वैश्विक स्तर पर माइक्रोफाइनेंस आंदोलन की अग्रणी पहलों में गिना जाता है।
नीतिगत बदलावों में भूमिका
सेवा के प्रयासों का असर सिर्फ आर्थिक नहीं, नीतिगत स्तर पर भी दिखा। 1996 में अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) ने घर से काम करने वाली महिला कामगारों के लिए बुनियादी श्रम मानकों को मान्यता दी, जिसमें सेवा के अभियान की अहम भूमिका रही। 2014 में भारत का स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट पारित हुआ, जिसने रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के अधिकारों को कानूनी मान्यता दी।
आज का स्वरूप
आज सेवा को असंगठित क्षेत्र की महिला श्रमिकों के लिए देश के सबसे बड़े केंद्रीय ट्रेड यूनियन के तौर पर देखा जाता है, जिसकी उपस्थिति भारत के अलावा दक्षिण एशिया, दक्षिण अफ्रीका और लैटिन अमेरिका तक फैली है। सहकारी बैंकिंग, बीमा और उत्पादक समूहों के जरिए यह लाखों महिलाओं को आर्थिक स्वावलंबन का रास्ता दिखा रही है।
स्रोत एवं संदर्भ
- SEWA.org — आधिकारिक इतिहास पेज
- Rang De — “The SEWA Story: Organising Self-Employed Women”
- ILO — Chapter on Self Employed Women’s Association (SEWA), India
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