हरियाणा में PACS (Primary Agricultural Credit Societies) जैसी बुनियादी और महत्वपूर्ण संस्था की कुल संख्या के बारे में एक सीधा-सा सवाल है — राज्य में असल में कितनी PACS हैं? जवाब उतना सीधा नहीं है जितना लगता है। पिछले चार वर्षों (2022–2026) में हरियाणा सरकार के अलग-अलग विभागों, अधिकारियों और दस्तावेज़ों ने इस एक ही सवाल के जवाब में कम से कम छह अलग-अलग आंकड़े दिए हैं — 622, 710, 730, 742, 746 और 804। यह लेख इन सभी आंकड़ों को उनके मूल स्रोत तक ट्रेस करता है और यह समझने की कोशिश करता है कि यह फासला किसी गड़बड़ी की वजह से है, या अलग-अलग वर्गीकरण और अलग-अलग योजनाओं के उप-समूहों की वजह से — बिना किसी पर आरोप लगाए, सिर्फ उपलब्ध सार्वजनिक दस्तावेज़ों के आधार पर।
शुरुआत में ही स्पष्ट कर दें — इस लेख का मकसद यह साबित करना नहीं है कि सरकार जानबूझकर गलत आंकड़े दे रही है। बल्कि सवाल यह है कि क्या इतने बुनियादी आंकड़े में इतनी विविधता किसी वर्गीकरण अंतर से समझ आती है, या यह पारदर्शिता की एक वास्तविक कमी की ओर इशारा करती है।
छह आंकड़े, एक राज्य — पूरी समयरेखा
नीचे दी गई तालिका में वे सभी आंकड़े हैं जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध, सत्यापन-योग्य स्रोतों में मिले — तारीख, स्रोत और संदर्भ के साथ।
| तारीख | आंकड़ा | किसने/कहां कहा | संदर्भ |
|---|---|---|---|
| अज्ञात (वर्तमान वेबसाइट) | 622 PACS (+150 PCCS +1 FSS = कुल 773) | हार्को बैंक की आधिकारिक वेबसाइट, “About Us” | हार्को के तीन-स्तरीय ढांचे में सबसे निचले स्तर की क्रेडिट संस्थाएं |
| 29 जून 2022 | 730 PACS | तत्कालीन मुख्य सचिव संजीव कौशल (The Tribune) | नवंबर 2022 तक सभी PACS के पूर्ण डिजिटलीकरण का लक्ष्य; उस समय 307 PACS कंप्यूटरीकृत थीं |
| 21 अगस्त 2023 | 746 PACS | सहकारिता मंत्री डॉ. बनवारी लाल (The Tribune) | सभी PACS का कंप्यूटरीकरण और Companies Act के तहत पंजीकरण किया जा रहा है |
| 22 दिसंबर 2024 | 710 PACS कंप्यूटरीकृत; 742 PACS प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र के रूप में कार्यरत; 433 PACS CSC पंजीकृत | तत्कालीन मुख्य सचिव विवेक जोशी, SCDC बैठक (The Tribune) | एक ही बैठक में तीन अलग-अलग योजनाओं के लिए तीन अलग आंकड़े |
| 20 मार्च 2026 (बजट भाषण) | 804 PACS (33 मुनाफे में) | मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, बजट भाषण 2026-27 | सरकार का अपना सबसे ताज़ा, सबसे आधिकारिक कुल आंकड़ा |
| 3 सितंबर 2026 | 710 PACS (वही उप-समूह), सभी कंप्यूटरीकृत; 51 मुनाफे में | मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, SCDC बैठक (सरकारी प्रेस विज्ञप्ति) | बजट भाषण के सिर्फ छह महीने बाद भी वही पुराना “710” इस्तेमाल हुआ, 804 नहीं |
वर्गीकरण की पहेली — 622 बनाम 773
सबसे साफ व्याख्या हार्को बैंक के अपने आंकड़े में ही मिल जाती है। बैंक की वेबसाइट के मुताबिक उसके तीन-स्तरीय ढांचे के सबसे निचले पायदान पर “773 PACS/PCCS/FSS” हैं, जिन्हें आगे तीन हिस्सों में बांटा गया है — 622 शुद्ध PACS, 150 PCCS (Primary Cooperative Credit Societies) और सिर्फ 1 FSS (Farmers Service Society)। यानी अगर कोई दस्तावेज़ “622” कहता है तो वह सिर्फ शुद्ध रूप से वर्गीकृत PACS की गिनती कर रहा है, और अगर कोई “773” कहता है तो वह PACS, PCCS और FSS — तीनों तरह की ग्रासरूट साख संस्थाओं को मिलाकर गिन रहा है। यह अकेले ही बताता है कि “PACS की संख्या” पूछे जाने पर जवाब इस पर निर्भर करता है कि पूछने वाला किस परिभाषा का इस्तेमाल कर रहा है।
“710” पूरी संख्या नहीं, एक योजना का उप-समूह है
दिसंबर 2024 की SCDC बैठक इस पहेली की सबसे दिलचस्प कड़ी है। उसी एक बैठक में मुख्य सचिव विवेक जोशी ने तीन अलग आंकड़े गिनाए — 710 PACS कंप्यूटरीकृत हो चुकी थीं, 742 PACS प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र (PM-KSK) के रूप में काम कर रही थीं, और 433 PACS Common Service Centre के तौर पर पंजीकृत थीं (जिनमें से सिर्फ 202 वास्तव में चालू थीं)। अगर 710 और 742 दोनों “PACS की कुल संख्या” होते, तो ये एक जैसे होने चाहिए थे — लेकिन ये अलग हैं, क्योंकि हर आंकड़ा दरअसल किसी एक विशेष योजना में शामिल PACS की गिनती है, न कि राज्य की कुल PACS की। “710” खासतौर पर कंप्यूटरीकरण योजना के “पहले चरण” के लिए चिन्हित PACS का आंकड़ा प्रतीत होता है — यह बात Sahakar Watch सितंबर 2026 की समीक्षा में भी दर्ज कर चुका है, जहां यही 710 का आंकड़ा दो साल बाद भी दोहराया गया।
804 — सबसे नया और सबसे आधिकारिक आंकड़ा, फिर भी बेजोड़
अगर किसी एक आंकड़े को “सबसे आधिकारिक” कहा जाए, तो वह 804 होना चाहिए — क्योंकि यह खुद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मार्च 2026 के बजट भाषण से आता है, जहां उन्होंने कहा: “आज हमारी 804 PACS में से सिर्फ 33 ही मुनाफे में हैं,” और 2026-27 में कम से कम 300 घाटे वाली PACS को मुनाफे में लाने का लक्ष्य रखा। Sahakar Watch इस आंकड़े का विस्तृत विश्लेषण पहले भी कर चुका है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इसी बजट भाषण के सिर्फ छह महीने बाद, 3 सितंबर 2026 की SCDC बैठक में मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने कंप्यूटरीकरण के आंकड़े गिनाते समय 804 नहीं, बल्कि वही पुराना “710” इस्तेमाल किया। अगर सरकार की अपनी दो शाखाएं — वित्त विभाग का बजट दस्तावेज़ और मुख्य सचिव कार्यालय की समीक्षा बैठक — एक-दूसरे के छह महीने के भीतर दो अलग आंकड़ों पर टिकी रहती हैं, तो यह बताता है कि यह भ्रम सिर्फ पुराने दस्तावेज़ों तक सीमित नहीं, बल्कि सरकार के मौजूदा कामकाज में भी मौजूद है।
बड़ी तस्वीर — 32,000 सहकारी समितियों में PACS का हिस्सा
इस भ्रम को सही परिप्रेक्ष्य में रखने के लिए एक बड़ा आंकड़ा भी देखना ज़रूरी है। हरियाणा सहकारिता विभाग की अपनी वेबसाइट के मुताबिक राज्य में “32,000 से ज्यादा” हर तरह की सहकारी समितियां हैं, जिनसे 56 लाख से ज्यादा सदस्य जुड़े हैं। वहीं केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह के 15 जुलाई 2026 के लोकसभा में लिखित जवाब के मुताबिक, राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस के अनुसार हरियाणा में 15,447 “कार्यरत” (functional) सहकारी समितियां हैं, जिनमें से 13,228 का ऑडिट हो चुका है। यानी PACS, हरियाणा की सहकारी समितियों की दुनिया का एक बहुत छोटा हिस्सा है — 700-800 के आसपास, जबकि कुल पंजीकृत समितियां 32,000 से ज्यादा और कार्यरत समितियां साढ़े पंद्रह हज़ार से ज्यादा हैं। अगर सबसे छोटी और सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाली श्रेणी (PACS) की गिनती में ही इतना भ्रम है, तो बाकी हज़ारों समितियों के आंकड़ों की सटीकता पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
क्या यह गड़बड़ी है या सिर्फ अलग-अलग वर्गीकरण?
उपलब्ध सार्वजनिक दस्तावेज़ों के आधार पर, यह कहना मुश्किल है कि यह जानबूझकर की गई कोई गड़बड़ी है। ज़्यादा संभावित व्याख्या तीन बातों का मिश्रण लगती है — पहला, वर्गीकरण का अंतर (सिर्फ PACS बनाम PACS+PCCS+FSS मिलाकर, जैसा हार्को बैंक के आंकड़ों से साफ है); दूसरा, अलग-अलग योजनाओं के उप-समूह जिन्हें कई बार सामान्य बोलचाल में “PACS की कुल संख्या” जैसा पेश कर दिया जाता है (जैसे कंप्यूटरीकरण का “710”, या PM-KSK बनने वाली “742”); और तीसरा, समय के साथ नई PACS का पंजीकरण या मौजूदा समितियों का विलय/बंद होना, जिससे संख्या स्वाभाविक रूप से बदलती रहती है। लेकिन इन तीनों संभावित व्याख्याओं के बावजूद, एक बुनियादी सवाल जस का तस रहता है — क्या रजिस्ट्रार सहकारी समितियां, हरियाणा या सहकारिता विभाग की तरफ से कोई एक, तारीख-सहित, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध और नियमित रूप से अपडेट होने वाली मास्टर लिस्ट मौजूद है, जिससे बाकी सभी विभाग अपने आंकड़े लेते हों? इस लेख की रिसर्च के दौरान ऐसी कोई एक सूची सार्वजनिक तौर पर नहीं मिल सकी — और यही असल पारदर्शिता से जुड़ा सवाल है, गड़बड़ी का आरोप नहीं।
निष्कर्ष
हरियाणा में PACS की संख्या को लेकर मिलने वाले छह अलग-अलग आंकड़े — 622, 710, 730, 742, 746 और 804 — किसी एक जगह की जानबूझकर की गई गलती नहीं लगते, बल्कि अलग-अलग समय, अलग-अलग वर्गीकरण और अलग-अलग योजनाओं के उप-समूहों का नतीजा ज़्यादा लगते हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि यह मसला मामूली है। जिन किसानों, PACS सचिवों-कर्मचारियों और शोधकर्ताओं को यह जानना है कि राज्य की कुल कितनी PACS मुनाफे में हैं, कितनी घाटे में, या किसी योजना का दायरा वास्तव में कितना बड़ा है — उनके लिए यह ज़रूरी है कि “कुल PACS” का एक ही, स्पष्ट और तारीख-सहित आंकड़ा उपलब्ध हो। जब तक ऐसी कोई एक आधिकारिक, नियमित रूप से अपडेट होने वाली सूची सामने नहीं आती, तब तक हर नया सरकारी बयान अपने साथ एक नया आंकड़ा लाता रहेगा — और आम पाठक के लिए यह तय करना मुश्किल बना रहेगा कि इनमें से कौन सा नंबर असल में सही है। Sahakar Watch इस सवाल पर आगे भी नज़र रखेगा, खासकर अगर रजिस्ट्रार सहकारी समितियां, हरियाणा की तरफ से कोई नई, समेकित सूची सार्वजनिक होती है।
स्रोत सूची (Source List)
- HARCO Bank — About Us (773 PACS/PCCS/FSS = 622 PACS + 150 PCCS + 1 FSS)
- The Tribune — All coop societies to be digitised by Nov (29 जून 2022, मुख्य सचिव संजीव कौशल, 730 PACS)
- The Tribune — All 746 PACS to be registered as companies, says Minister (21 अगस्त 2023)
- The Tribune — 710 farm credit societies digitised (22 दिसंबर 2024, मुख्य सचिव विवेक जोशी, SCDC बैठक)
- Government of Haryana — Budget Speech 2026-27, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी (804 PACS, मूल दस्तावेज़)
- PRS India — Haryana Budget Analysis 2026-27
- हरियाणा सरकार — आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति (3 सितंबर 2026, SCDC बैठक, 710 PACS)
- Indian Cooperative — 1.41 Lakh Co-ops Non-Functional, 49,177 Under Liquidation: Shah in LS (हरियाणा: 15,447 कार्यरत समितियां)
- Department of Cooperation, Haryana — About Us (32,000+ सहकारी समितियां)
- Sahakar Watch — हरियाणा में CM-PACS और नई सुविधाओं की घोषणाएं, 804 में सिर्फ 33 PACS मुनाफे में
- Sahakar Watch — हरियाणा में मुनाफे वाली PACS 33 से बढ़कर 51 हुईं, सभी 710 का कम्प्यूटरीकरण पूरा
- Sahakar Watch — हरियाणा में PACS को मजबूत करने पर जोर
- Sahakar Watch — हरियाणा सहकारिता विभाग की 36 योजनाएं











