
NAFED का FPO BizConnect: किसान उत्पादक संगठनों को खरीदारों से जोड़ने की कोशिश, बाजार तक पहुंच पर बढ़ा जोर
नई दिल्ली। किसान उत्पादक संगठन यानी FPO पिछले कुछ वर्षों में देश की कृषि व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरे हैं। किसानों को संगठित करना, सामूहिक रूप से कृषि उपज की खरीद-बिक्री करना और छोटे किसानों की बाजार में सौदेबाजी की क्षमता बढ़ाना इनके प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। लेकिन FPO बनाने के बाद सबसे बड़ी चुनौती अक्सर यही रहती है कि उसके उत्पाद के लिए भरोसेमंद और नियमित बाजार कहां से मिले। इसी सवाल पर व्यावहारिक स्तर पर काम करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ NAFED ने 21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में “FPO BizConnect: Connect. Trade. Grow.” का आयोजन किया। कार्यक्रम में FPOs, खरीदारों और अन्य संबंधित पक्षों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया।
यह कार्यक्रम केवल प्रशिक्षण या परिचर्चा तक सीमित नहीं था। इसे workshop-cum-Buyer-Seller Meet के रूप में आयोजित किया गया, ताकि किसान उत्पादक संगठन संभावित खरीदारों से सीधे बात कर सकें, उनकी बाजार संबंधी आवश्यकताओं को समझ सकें और नए व्यावसायिक संबंध तलाश सकें। NAFED के प्रबंध निदेशक दीपक अग्रवाल, IAS भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार आयोजन का मूल उद्देश्य FPOs और बाजार के बीच प्रत्यक्ष संपर्क मजबूत करना था।
FPO व्यवस्था को समझने वाले लोगों के लिए यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज चुनौती केवल संगठन बनाने की नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने की है। केंद्र सरकार की 10,000 FPO योजना के तहत 10,000 किसान उत्पादक संगठन गठित किए जा चुके हैं। 31 जुलाई 2026 तक इन FPOs का संयुक्त कारोबार लगभग ₹20,358 करोड़ बताया गया है। सरकार के अनुसार ये संगठन कृषि इनपुट उपलब्ध कराने, उपज एकत्रित करने, खरीद, मूल्य संवर्धन और विपणन जैसी गतिविधियों में काम कर रहे हैं।
ये आंकड़े बताते हैं कि देश में FPO का संस्थागत ढांचा अब काफी बड़ा हो चुका है। लेकिन सभी संगठनों का व्यावसायिक स्तर एक जैसा नहीं है। अगस्त 2026 में संसद में दी गई एक अन्य जानकारी के अनुसार 2024-25 के audited financial statements में 6,964 FPOs का कारोबार ₹50 लाख तक, 862 का ₹50 लाख से ₹1 करोड़ और 1,135 FPOs का कारोबार ₹1 करोड़ से अधिक था। यही कारण है कि FPOs को केवल पंजीकरण, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता तक सीमित रखने की बजाय उनके लिए वास्तविक buyer linkages बनाना अगला महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
NAFED के BizConnect कार्यक्रम को इसी पृष्ठभूमि में देखा जाना चाहिए। किसान या FPO उत्पादन कर सकता है, grading और packaging में सुधार कर सकता है, लेकिन यदि उसकी उपज के लिए नियमित ग्राहक नहीं है तो कारोबार आगे बढ़ाना कठिन हो जाता है। दूसरी तरफ बड़े खरीदारों के लिए भी अलग-अलग छोटे उत्पादकों के बजाय संगठित FPO से निश्चित मात्रा और गुणवत्ता में उत्पाद लेना अधिक व्यावहारिक हो सकता है। Buyer-Seller Meet जैसी व्यवस्था दोनों पक्षों के बीच इसी दूरी को कम कर सकती है।
कार्यक्रम की एक उल्लेखनीय घटना NAFED और ABEPL के बीच Memorandum of Understanding को अगले तीन वर्षों के लिए नवीनीकृत किया जाना भी रही। NAFED के अनुसार इस साझेदारी का उद्देश्य NAFED द्वारा प्रोत्साहित FPOs के लिए अवसर बढ़ाने के साथ sustainable bamboo-based rural livelihoods को मजबूती देना है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि FPO मॉडल को केवल परंपरागत अनाज या मंडी विपणन तक सीमित न रखकर bamboo और अन्य value-chain आधारित ग्रामीण व्यवसायों से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।
हालांकि किसी एक buyer-seller meet को FPOs की बाजार संबंधी सभी समस्याओं का समाधान मान लेना जल्दबाजी होगी। असली परिणाम इस बात से तय होंगे कि कार्यक्रम के बाद कितने FPOs को नियमित खरीदार मिलते हैं, कितने व्यावसायिक समझौते आगे बढ़ते हैं और किसानों को बेहतर मूल्य या स्थायी बाजार का वास्तविक लाभ मिलता है। FPO के लिए बाजार संपर्क तभी उपयोगी है जब वह एक कार्यक्रम तक सीमित न रहकर लगातार commercial relationship में बदले।
सरकार की FPO योजना में भी market linkage और business facilitation को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। प्रत्येक FPO को निर्धारित अवधि तक professional handholding और business support देने की व्यवस्था है। सरकार ने FPO-industry linkages और institutional buyers को FPOs से जोड़ने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया है। ऐसे में NAFED का BizConnect इस व्यापक नीति को जमीनी व्यावसायिक संपर्क में बदलने का एक प्रयास माना जा सकता है।
सहकारी और किसान संगठनों के लिए इस आयोजन से निकलने वाला बड़ा संदेश स्पष्ट है—संगठन बनाना पहला कदम है, लेकिन उसकी स्थिरता बाजार से तय होती है। आने वाले समय में FPOs की सफलता का आकलन केवल उनकी संख्या से नहीं, बल्कि कारोबार, value addition, buyer network और किसान सदस्यों को मिलने वाले आर्थिक लाभ से करना अधिक महत्वपूर्ण होगा। यदि BizConnect जैसे मंच नियमित रूप से आयोजित होते हैं और उनकी व्यावसायिक प्रगति की भी समीक्षा होती है, तो FPO व्यवस्था को अधिक मजबूत बाजार आधारित स्वरूप मिलने की संभावना है।
