
NDDB क्या है? भारत की ‘श्वेत क्रांति’ के पीछे की सहकारी संस्था को जानिए
2 जनवरी 2026 को एक खबर आई कि राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड यानी NDDB के अध्यक्ष मीनेश शाह का कार्यकाल आगे बढ़ा दिया गया है। यह खबर डेयरी और सहकारिता जगत में तो चर्चा का विषय बनी, लेकिन आम पाठक के मन में शायद यह सवाल उठा होगा — NDDB है क्या, और यह करता क्या है? जवाब समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा, उस दौर में जब भारत दूध के मामले में आत्मनिर्भर नहीं था।
राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की स्थापना 1965 में हुई थी, और इसके पीछे नाम है डॉ. वर्गीज कुरियन का — वही शख्स जिन्हें भारत में “श्वेत क्रांति” (White Revolution) का जनक कहा जाता है। गुजरात के आणंद में शुरू हुए अमूल सहकारी मॉडल की सफलता को देखकर सरकार ने तय किया कि इसी तर्ज पर पूरे देश में दूध उत्पादकों की सहकारी समितियां खड़ी की जाएं, और इस पूरे काम की अगुआई के लिए एक राष्ट्रीय स्तर की संस्था चाहिए थी। NDDB उसी सोच का नतीजा है। दिलचस्प बात यह है कि NDDB किसी सामान्य सरकारी विभाग की तरह नहीं, बल्कि एक सांविधिक निकाय (statutory body) के तौर पर काम करता है, और आज भी इसका मुख्यालय दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहर में नहीं बल्कि गुजरात के आणंद में ही है — मानो यह इसकी जड़ों से जुड़े रहने की पहचान हो।
NDDB के काम को समझने के लिए सबसे जरूरी है “ऑपरेशन फ्लड” (Operation Flood) को जानना, जो 1970 में शुरू हुआ था। इसका मकसद था गांव-गांव में दूध उत्पादकों की सहकारी समितियां बनाना, उन्हें आपस में एक संघ (यूनियन) और राज्य स्तर के फेडरेशन से जोड़ना, ताकि किसान का दूध सीधे बड़े बाजार तक पहुंचे और बीच के दलालों की भूमिका कम हो। यह अपने समय की दुनिया की सबसे बड़ी डेयरी विकास परियोजना मानी जाती है — तीन चरणों में चले इस अभियान के दौरान करीब 81,000 गांव-स्तरीय दुग्ध सहकारी समितियां खड़ी हुईं। नतीजा यह हुआ कि जो भारत कभी दूध के मामले में बाहर से मदद पर निर्भर था, वह 1998 तक दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बन गया — और आज भी उस मुकाम पर बना हुआ है।
लेकिन NDDB का काम सिर्फ इतिहास तक सीमित नहीं है। आज इसकी कई सहायक कंपनियां और इकाइयां अलग-अलग मोर्चों पर काम करती हैं। मदर डेयरी (Mother Dairy) जैसा जाना-पहचाना ब्रांड इसी परिवार का हिस्सा है, जो शहरी उपभोक्ताओं तक दूध और डेयरी उत्पाद पहुंचाता है। इसके अलावा IDMC (डेयरी मशीनरी और उपकरण बनाने वाली इकाई), इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड (पशु टीके व दवाएं बनाने वाली कंपनी), NDDB डेयरी सर्विसेज, NDDB मृदा (ग्रामीण बुनियादी ढांचे से जुड़ा काम) और NDDB CALF लिमिटेड जैसी इकाइयां भी NDDB के दायरे में आती हैं। यानी दूध दुहने से लेकर उसे पैकेट तक पहुंचाने की पूरी श्रृंखला में NDDB की किसी न किसी रूप में मौजूदगी है।
आज के दौर में NDDB का काम कई दिशाओं में बंटा हुआ है। एक तरफ यह पशुओं की नस्ल सुधार और प्रजनन (ब्रीडिंग) पर वैज्ञानिक तरीके से काम करता है, ताकि गाय-भैंस ज्यादा और बेहतर क्वालिटी का दूध दें। दूसरी तरफ पशु आहार व पोषण, पशु स्वास्थ्य और बीमारियों की रोकथाम पर भी शोध व सलाह का काम होता है। सहकारी समितियों को मजबूत बनाने के लिए ट्रेनिंग और संगठनात्मक सहयोग दिया जाता है, डेयरी इंजीनियरिंग यानी दूध ठंडा रखने, प्रोसेस करने और पैकेजिंग की तकनीक विकसित की जाती है, और छोटे दूध उत्पादकों तक वित्तीय सेवाएं व कर्ज पहुंचाने के लिए भी अलग व्यवस्था बनाई गई है।
मीनेश शाह के कार्यकाल विस्तार की खबर इसी बड़ी तस्वीर की एक कड़ी है — NDDB जैसी संस्था का नेतृत्व कौन करता है, यह इसलिए मायने रखता है क्योंकि इसके फैसलों का असर सीधे लाखों छोटे दूध उत्पादकों की रोजी-रोटी पर पड़ता है। साठ साल पहले जिस सोच से यह संस्था बनी थी — किसान को उसकी उपज का सही दाम, और उपभोक्ता को भरोसेमंद दूध — वह लक्ष्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है, बस चुनौतियां अब अलग तरह की हैं: बढ़ती मांग, बदलता मौसम, और नई तकनीकों के साथ तालमेल बिठाना।
(यह लेख राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के इतिहास व कामकाज से जुड़ी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और जनवरी 2026 में आई अध्यक्ष के कार्यकाल विस्तार की खबर पर आधारित है।)
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