किताबों से निकलकर प्लांट तक पहुंची सहकारिता शिक्षा: NCUI ने विद्यार्थियों को Mother Dairy के कामकाज से कराया परिचित

नई दिल्ली। सहकारिता की चर्चा आम तौर पर किसानों, समितियों, बैंकों, निदेशक मंडलों और सरकारी नीतियों के बीच होती है। स्कूल के विद्यार्थियों तक यह विषय अपेक्षाकृत कम पहुंचता है। National Cooperative Union of India (NCUI) ने इसी दूरी को कम करने के लिए दिल्ली के स्कूली विद्यार्थियों को Mother Dairy के Patparganj plant का प्रत्यक्ष अनुभव कराया। 17 अगस्त 2026 को आयोजित इस study visit में Bal Bharati Public School, Pitampura के 37 विद्यार्थी और दो faculty members शामिल हुए।

यह पहल देखने में एक सामान्य educational visit जैसी लग सकती है, लेकिन सहकारी क्षेत्र की दृष्टि से इसका महत्व इससे कहीं अधिक है। सहकारिता को अगर केवल कानून, registration और annual meeting तक सीमित विषय की तरह पढ़ाया जाए तो नई पीढ़ी के लिए इसे समझना कठिन हो सकता है। इसके विपरीत जब विद्यार्थी किसी बड़े enterprise में दूध की processing, packaging, quality handling और तैयार उत्पाद की पूरी यात्रा अपनी आंखों से देखते हैं, तो “cooperative enterprise” एक सैद्धांतिक शब्द नहीं रह जाता।

NCUI की Coop Connect Division द्वारा आयोजित इस दौरे में विद्यार्थियों के साथ स्कूल की faculty members Shikha Rattan और Taruna Bahl तथा NCUI के Deputy Director Anant Dubey और Naveen Singh भी मौजूद रहे। Mother Dairy की ओर से Senior Superintendent Renu Kumar Ravindran Pillai ने विद्यार्थियों को milk processing, packaging और milk products के उत्पादन की प्रक्रिया समझाई। बाद में विद्यार्थियों ने plant में live operations और ice-cream production को भी देखा।

सहकारिता को पढ़ाना और सहकारिता को दिखाना—दो अलग बातें

भारत में cooperative movement का इतिहास बड़ा है, लेकिन आम विद्यार्थी के लिए “सहकारी समिति” का अर्थ अक्सर textbook की कुछ पंक्तियों तक सीमित रहता है। गांवों में रहने वाले बच्चों के लिए PACS या dairy society कुछ हद तक परिचित हो सकती है, लेकिन शहरों में पढ़ने वाले विद्यार्थी cooperative business model को शायद ही प्रत्यक्ष रूप से समझ पाते हों।

यही वजह है कि ऐसे study visits महत्वपूर्ण बनते हैं।

किसी विद्यार्थी को यह समझाना कि cooperative enterprise में सदस्य, संस्थागत ढांचा, procurement, processing, marketing और consumer—सब एक आर्थिक chain का हिस्सा हैं, classroom में अपेक्षाकृत कठिन है। वही बात operational plant देखकर ज्यादा सहज समझ आती है।

NCUI स्वयं cooperatives को ऐसे enterprises के रूप में परिभाषित करता है जिनमें लोग और सदस्य केंद्र में होते हैं और ownership, control तथा benefit का संबंध सीधे users से जुड़ता है।

यह व्यावसायिक शिक्षा का भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। Cooperative को केवल “सामाजिक संस्था” मानने के बजाय विद्यार्थियों को यह दिखाना जरूरी है कि यह manufacturing, finance, agriculture, dairy, retail और services जैसे क्षेत्रों में professional enterprise के रूप में भी काम कर सकता है।

Mother Dairy का चयन भी अपने आप में अर्थपूर्ण है

Study visit के लिए dairy plant का चयन व्यावहारिक है। दूध ऐसा उत्पाद है जिससे लगभग हर विद्यार्थी रोजमर्रा के जीवन में परिचित है। लेकिन packet में मिलने वाले दूध के पीछे procurement, testing, chilling, processing, packaging, logistics और retail की कितनी लंबी व्यवस्था होती है, यह सामान्य उपभोक्ता को दिखाई नहीं देती।

जब विद्यार्थी उसी supply chain को भीतर से देखते हैं तो agriculture और consumer market के बीच संबंध भी स्पष्ट होता है।

यहां एक और महत्वपूर्ण बात सामने आती है। Sahakar Watch ने हाल की अपनी रिपोर्ट असम में सहकारी समितियों का पंजीकरण पूरी तरह ऑनलाइन में dairy cooperatives के लिए तेज registration व्यवस्था की चर्चा की थी। उस खबर का एक पक्ष संस्था बनाने की प्रक्रिया है; Mother Dairy study visit दूसरी तरफ यह दिखाता है कि संस्था या cooperative-linked enterprise बनने के बाद professional operations कितने महत्वपूर्ण होते हैं।

यानी नई पीढ़ी को सहकारिता समझाने के लिए केवल यह बताना पर्याप्त नहीं है कि समिति कैसे register होती है। यह भी दिखाना होगा कि अच्छी cooperative institution वास्तव में चलती कैसे है

रोजगार से आगे, entrepreneurship की भी संभावना

NCUI और उसकी training wing NCCE हाल के समय में युवाओं को cooperative entrepreneurship से जोड़ने पर भी जोर दे रहे हैं। 20–21 अगस्त को आयोजित Youth Cooperative Awareness Programme में 20 राज्यों और नेपाल से 380 से अधिक युवाओं ने पंजीकरण कराया। कार्यक्रम का उद्देश्य cooperatives को entrepreneurship, employment generation और community-led development के एक विकल्प के रूप में समझाना था।

कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने agriculture, dairy, organic products, solar energy और cooperative stores सहित विभिन्न क्षेत्रों में cooperative business ideas भी प्रस्तुत किए।

इन पहलों को एक साथ देखें तो NCUI की education strategy में एक दिलचस्प दिशा दिखाई देती है—एक तरफ school students को cooperative enterprise प्रत्यक्ष दिखाया जा रहा है और दूसरी तरफ युवाओं को cooperative entrepreneurship के बारे में सोचने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

यदि यह प्रयास लगातार चलता है तो सहकारिता की छवि केवल पुरानी ग्रामीण संस्था या सरकारी नियंत्रण वाले ढांचे तक सीमित रहने के बजाय एक संभावित career और enterprise model के रूप में भी उभर सकती है।

बाजार से जुड़ाव की समझ भी जरूरी

नई cooperative संस्था के लिए management सीखना जितना जरूरी है, बाजार की समझ उतनी ही महत्वपूर्ण है। Sahakar Watch ने NAFED के FPO BizConnect पर अपनी रिपोर्ट में भी इसी बात को रेखांकित किया था कि संगठन बनने के बाद उसके लिए खरीदार और स्थायी market linkage होना आवश्यक है।

इसी तरह handloom sector पर हमारी पिछली रिपोर्ट “NCDC की पहल: हथकरघा सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने पर मंथन” में raw material, branding, traceability और marketing को cooperative viability से जोड़ा गया था।

इन सब उदाहरणों में एक साझा बात दिखाई देती है—नई पीढ़ी को cooperative sector से जोड़ना है तो उसे केवल cooperative values नहीं, बल्कि business reality भी समझानी होगी।

ऐसे कार्यक्रमों की अगली जरूरत क्या हो सकती है?

एक plant visit उपयोगी शुरुआत है, लेकिन इसके बाद और अधिक structured exposure दिया जा सकता है। मसलन विद्यार्थियों को अलग-अलग cooperative models—dairy, PACS, urban cooperative bank, consumer cooperative, FPO और handloom cooperative—के बीच अंतर समझाया जा सकता है।

स्कूल और कॉलेज स्तर पर short cooperative entrepreneurship modules, case studies और field projects भी उपयोगी हो सकते हैं।

इस तरह के कार्यक्रमों का वास्तविक असर तभी बढ़ेगा जब विद्यार्थी केवल plant देखकर वापस न लौटें, बल्कि उन्हें यह समझ आए कि cooperative में सदस्य कौन होता है, पूंजी कैसे आती है, governance कैसे चलता है, लाभ किस तरह वितरित होता है और professional management क्यों जरूरी है।

NCUI का Mother Dairy study visit इस दिशा में एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। सहकारिता को आगे बढ़ाने के लिए केवल नई समितियां बनाना पर्याप्त नहीं है; नई पीढ़ी को यह विश्वास दिलाना भी जरूरी है कि cooperative model आधुनिक, professional और व्यावसायिक रूप से प्रासंगिक हो सकता है।

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