
Bharat Taxi का cooperative model क्या है? ड्राइवर सिर्फ ‘पार्टनर’ नहीं, सदस्य-मालिक भी बन सकते हैं
मोबाइल से टैक्सी बुक करना अब शहरों में रोजमर्रा की बात है। ग्राहक ऐप खोलता है, किराया देखता है, गाड़ी बुलाता है और यात्रा पूरी होने के बाद भुगतान कर देता है। बाहर से देखने पर लगभग सभी ride-hailing apps का काम एक जैसा दिखाई देता है।
लेकिन असली अंतर पर्दे के पीछे के business model में होता है—कंपनी किसकी है, ड्राइवर से कितना शुल्क लिया जाता है, किराया कैसे तय होता है और प्लेटफॉर्म बढ़ने से पैदा होने वाली आर्थिक कीमत का लाभ आखिर किसे मिलता है।
इसी सवाल पर Bharat Taxi ने एक अलग प्रयोग शुरू किया है। यह किसी निजी कंपनी द्वारा चलाया जा रहा सामान्य taxi aggregator नहीं, बल्कि Sahakar Taxi Cooperative Limited (STCL) द्वारा संचालित cooperative-led digital mobility platform है। STCL एक Multi-State Cooperative Society है और इसका ढांचा इस विचार पर बनाया गया है कि गाड़ी चलाने वाले ‘Sarathi’ केवल सेवा देने वाले व्यक्ति न रहें, बल्कि cooperative के सदस्य और हिस्सेदार भी बन सकें।
Bharat Taxi कितना बड़ा हो चुका है?
12 अगस्त 2026 को राज्यसभा में दिए गए आधिकारिक जवाब के अनुसार, 4 अगस्त 2026 तक Bharat Taxi पर 8.48 लाख Sarathi यानी drivers और 44.27 लाख customers registered थे। उस समय platform लगभग 11,106 rides प्रतिदिन facilitate कर रहा था और Sarathis की cumulative earnings ₹83.70 करोड़ बताई गई थीं। सेवा Delhi-NCR, Gujarat, Maharashtra और Rajasthan में आधिकारिक रूप से शुरू हो चुकी थी, जबकि दूसरे राज्यों और शहरों में विस्तार operational preparedness और आवश्यक approvals के अनुसार चरणबद्ध तरीके से किया जाना है।
ये आंकड़े ध्यान खींचते हैं, लेकिन इन्हें समझते समय एक फर्क रखना जरूरी है। Registered driver और रोज सक्रिय driver एक ही चीज नहीं होते। इसी प्रकार registered customer का मतलब यह नहीं कि वह हर महीने ride ले रहा है। किसी भी digital platform की वास्तविक ताकत आगे चलकर active users, rides, repeat customers और drivers की स्थायी आमदनी से ज्यादा साफ दिखाई देगी।
Cooperative model आखिर अलग क्या करता है?
आम app-based taxi model में driver और platform के बीच मुख्य संबंध service provider और technology company का होता है। Cooperative model में इसमें ownership का तत्व जोड़ा गया है।
सरकारी backgrounder के अनुसार Bharat Taxi में Sarathi share capital लेकर cooperative का member-owner बन सकता है। Shares का face value ₹100 बताया गया है और partner ownership के लिए ₹500 मूल्य के shares लेने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। Sarathi members के लिए Board of Directors में representation की व्यवस्था भी मॉडल का हिस्सा बताई गई है।
यही कारण है कि Bharat Taxi के साथ “Sarathi Hi Maalik” जैसी अवधारणा जोड़ी गई है।
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण बात समझनी चाहिए। Cooperative का सदस्य बन जाना और हर operational decision व्यक्तिगत रूप से लेना एक ही बात नहीं है। किसी भी cooperative में निर्णय उसके registered bye-laws, General Body, Board और निर्धारित governance structure के अनुसार होते हैं। इसलिए member ownership का वास्तविक महत्व तभी दिखाई देगा जब drivers की भागीदारी governance में व्यवहारिक रूप से भी मजबूत हो।
Zero Commission model क्या है?
Bharat Taxi के सबसे चर्चित पहलुओं में से एक zero-commission model है।
सरकार द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार platform drivers से प्रत्येक ride पर पारंपरिक commission काटने के बजाय subscription-based participation model अपनाता है। इसका उद्देश्य Sarathi को यात्रा का fare अपने पास रखने देना और उसकी आय को अधिक predictable बनाना है। आधिकारिक विवरण में transparent fare structure और hidden charges से बचने की बात भी कही गई है।
17 अगस्त के PIB backgrounder में यह भी कहा गया है कि Bharat Taxi surge-free pricing model पर काम करता है और app के माध्यम से अतिरिक्त convenience fee, platform fee या surge pricing नहीं लगाई जाती। Airport पर Bharat Taxi द्वारा संचालित prepaid booths के संबंध में operational expenses के लिए अलग service charge का उल्लेख किया गया है।
साधारण भाषा में इसका अर्थ यह है कि platform अपनी कमाई का ढांचा हर ride पर driver की आय से प्रतिशत काटने के बजाय दूसरे तरीके से बनाना चाहता है।
लेकिन दीर्घकाल में यह मॉडल कितना टिकाऊ है, इसका जवाब अभी संचालन के आंकड़े ही देंगे। Technology, customer support, insurance linkages, marketing, verification और platform maintenance की लागत कहीं न कहीं से पूरी करनी होगी।
क्या सरकार Bharat Taxi को पैसा दे रही है?
यहां एक तथ्य विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
12 अगस्त को राज्यसभा में दिए गए उत्तर में कहा गया कि Bharat Taxi platform के expansion के लिए सरकार द्वारा financial support उपलब्ध नहीं कराया गया है। Platform STCL द्वारा चलाया जा रहा है और society अपने registered bye-laws तथा Multi-State Cooperative Societies Act, 2002 के ढांचे में काम करती है।
इसलिए इसे सीधे सरकारी taxi company कहना सही नहीं होगा।
हां, इसे cooperative ecosystem का मजबूत institutional support प्राप्त है। PIB backgrounder के अनुसार इसकी स्थापना में NCDC, IFFCO, NABARD, KRIBHCO, Amul की Gujarat Cooperative Milk Marketing Federation, NAFED, NDDB और National Cooperative Export Limited जैसी आठ राष्ट्रीय स्तर की cooperative institutions शामिल थीं।
ड्राइवर के लिए केवल कम commission ही मुद्दा नहीं
Taxi driver की समस्या सिर्फ यह नहीं होती कि app कितना commission ले रहा है। उसकी आय में अनिश्चितता, दुर्घटना का जोखिम, स्वास्थ्य सुरक्षा, लगातार काम मिलने की जरूरत और platform policies में अपनी आवाज जैसे सवाल भी महत्वपूर्ण हैं।
Bharat Taxi के घोषित model में Sarathis को e-Shram registration से जोड़ने, insurance और welfare linkages उपलब्ध कराने की दिशा रखी गई है। PIB backgrounder में IFFCO Tokio के माध्यम से ₹5 लाख personal accident insurance को nominal rates पर उपलब्ध कराने तथा health insurance support जैसी व्यवस्थाओं का भी उल्लेख है।
इन योजनाओं की वास्तविक उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि कितने drivers इन benefits के लिए पात्र बनते हैं, कितने enrol होते हैं और claim के समय व्यवस्था कितनी सहज रहती है।
यानी social security की घोषणा अच्छी शुरुआत है, लेकिन इसका असली मूल्य ground-level delivery से तय होगा।
ग्राहक को क्या मिलेगा?
Cooperative ownership की चर्चा driver के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन कोई passenger केवल इसलिए app इस्तेमाल नहीं करेगा क्योंकि कंपनी cooperative है।
उसे चाहिए—गाड़ी समय पर मिले, किराया उचित हो, driver verified हो, यात्रा सुरक्षित हो और शिकायत होने पर समाधान मिले।
Bharat Taxi के लिए सरकार ने KYC verification, background checks, ride tracking, SOS support और grievance redressal व्यवस्था का उल्लेख किया है। Platform में bike taxi, auto, economy cab, premium sedan, SUV, rentals, outstation और scheduled rides जैसे विकल्प भी बताए गए हैं।
महिला यात्रियों के लिए Sarathi Didi feature और महिलाओं को mobility sector में जोड़ने के लिए Bike Didi पहल का भी उल्लेख सरकारी backgrounder में किया गया है।
इन सुविधाओं के बावजूद Bharat Taxi के सामने वही कठिन परीक्षा है जो किसी भी mobility app के सामने होती है—availability और reliability।
यदि किसी शहर में बहुत सारे registered drivers हों लेकिन ग्राहक के आसपास गाड़ी उपलब्ध न हो, या pickup में बहुत समय लगे, तो cooperative philosophy अकेले customer को platform पर बनाए नहीं रख सकती।
आठ लाख drivers जुड़ना अपने-आप में सफलता का अंतिम पैमाना नहीं
Bharat Taxi को लेकर सबसे दिलचस्प सवाल अब उसके registration numbers से आगे का है।
क्या Sarathi निजी aggregators की तुलना में बेहतर net income कमा पा रहे हैं?
क्या subscription model platform का खर्च निकाल सकता है?
क्या drivers वास्तव में cooperative governance में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं?
क्या passengers को competitive fare के साथ पर्याप्त cab availability मिल रही है?
और क्या platform बड़े शहरों के बाहर भी पर्याप्त demand और supply विकसित कर पाएगा?
इन सवालों के उत्तर आने वाले समय में अधिक महत्वपूर्ण होंगे।
Cooperative sector के लिए Bharat Taxi क्यों खास है?
भारत में cooperative का नाम आते ही आम तौर पर दूध, कृषि ऋण, खाद, चीनी मिल, PACS या marketing societies की तस्वीर सामने आती है।
Bharat Taxi इस धारणा को थोड़ा बदलता है।
यह दिखाता है कि cooperative model को digital platform business में भी प्रयोग किया जा सकता है। अगर drivers app के केवल service providers न रहकर platform के member-owners बनते हैं, तो यह gig economy में ownership का एक अलग रास्ता प्रस्तुत करता है।
इसका मतलब यह नहीं कि cooperative label लगते ही business सफल हो जाएगा। Technology की quality, professional management, customer acquisition, pricing, driver discipline, capital और governance—सभी की जरूरत वैसी ही रहेगी जैसी किसी दूसरी technology company में होती है।
अंतर इतना है कि यहां business बढ़ने के साथ यह संभावना बनाई गई है कि सेवा देने वाला व्यक्ति भी संस्था के ownership structure में शामिल रहे।
शायद Bharat Taxi का सबसे बड़ा प्रयोग टैक्सी चलाना नहीं, बल्कि यह सवाल है—क्या भारत की platform economy में काम करने वाले लोग उस digital platform के मालिक भी हो सकते हैं जिस पर उनकी रोजी-रोटी निर्भर है?
इस सवाल का अंतिम जवाब अभी आना बाकी है। लेकिन cooperative sector के लिए यह प्रयोग निश्चित रूप से देखने लायक है।
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