Multi-State Cooperative Society के सदस्य के अधिकार क्या हैं? चुनाव, शिकायत और जानकारी मांगने की नई व्यवस्था आसान भाषा में समझिए

किसी cooperative society का सदस्य केवल share जमा करने वाला व्यक्ति नहीं होता। सिद्धांत रूप से वही संस्था का मालिक भी है, लाभार्थी भी और उसकी governance का हिस्सा भी। लेकिन व्यवहार में एक बड़ी समस्या यह रही है कि बहुत-से सदस्यों को यह स्पष्ट ही नहीं होता कि वे management से कौन-सी जानकारी मांग सकते हैं, चुनाव पर सवाल कैसे उठा सकते हैं या अपनी व्यक्तिगत शिकायत कहां ले जाएं।

Multi-State Cooperative Societies के मामले में पिछले कुछ वर्षों में इस व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं।

Multi-State Co-operative Societies (Amendment) Act, 2023 ने 2002 के मूल कानून में कई संशोधन किए। सरकार का उद्देश्य governance मजबूत करना, transparency बढ़ाना, election process को अधिक स्वतंत्र बनाना और members के लिए grievance redressal की व्यवस्था विकसित करना था। कानून को राष्ट्रपति की मंजूरी 3 अगस्त 2023 को मिली।

लेकिन सबसे पहले एक जरूरी फर्क समझ लेना चाहिए।

यह कानून हर cooperative society पर लागू नहीं होता

भारत में cooperative society दो broadly अलग legal frameworks में आ सकती है।

यदि किसी cooperative society के objectives और area of operation केवल एक राज्य तक सीमित हैं, तो सामान्यतः वह उस राज्य के Cooperative Societies Act के तहत चलती है।

लेकिन जिस cooperative society का कार्यक्षेत्र एक से अधिक राज्यों में है, वह Multi-State Co-operative Societies Act, 2002 के केंद्रीय कानून के तहत आती है। Central Registrar of Cooperative Societies यानी CRCS ऐसी societies की registration और regulatory processes देखता है।

इसलिए नीचे बताई गई नई व्यवस्थाओं को हर PACS, dairy society या state cooperative पर स्वतः लागू मान लेना सही नहीं होगा।

चुनाव अब केवल मौजूदा Board के भरोसे नहीं

Multi-State Cooperative Societies में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव elections से जुड़ा है।

पुरानी व्यवस्था में board elections कराने की जिम्मेदारी मौजूदा board के पास रहती थी। 2023 के संशोधन ने इसके लिए Co-operative Election Authority का प्रावधान किया।

इस Authority का काम board elections कराना, electoral rolls की तैयारी की निगरानी करना और election process पर नियंत्रण रखना है। इसका उद्देश्य यह है कि चुनाव कराने वाली संस्था और चुनाव लड़ने वाला existing management एक ही पक्ष न रहे।

सरकार ने बाद में 11 मार्च 2024 को Co-operative Election Authority स्थापित कर दी। यानी यह व्यवस्था केवल कानून की किताब में नहीं है; इसका institutional structure भी बनाया जा चुका है।

साधारण सदस्य के लिए इसका अर्थ क्या है?

इसका अर्थ यह है कि Multi-State Cooperative Society के board election को अब अधिक formal और independent regulatory framework में लाने की कोशिश की गई है।

हालांकि किसी specific election dispute में कौन-सा remedy उपलब्ध होगा, यह संबंधित Act, Rules, election notification और मामले के facts देखकर ही तय किया जाना चाहिए।

Board में महिलाओं और SC/ST प्रतिनिधित्व पर भी जोर

2023 के amendment में board composition से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रावधान भी शामिल किया गया।

कानूनी बदलाव के तहत Multi-State Cooperative Society के board में दो महिला सदस्यों और एक Scheduled Caste या Scheduled Tribe सदस्य के representation का प्रावधान किया गया। इसका उद्देश्य cooperative governance में broader representation सुनिश्चित करना है।

यह बदलाव cooperative principle के उस मूल विचार से जुड़ा है जिसमें संस्था केवल आर्थिक संगठन नहीं, बल्कि democratic member institution भी मानी जाती है।

लेकिन representation तभी meaningful होगा जब board members को केवल formal seat न मिले, बल्कि decision-making में वास्तविक भूमिका भी हो।

सदस्य को जानकारी मांगने का कानूनी रास्ता

एक cooperative member के लिए शायद सबसे practical बदलाव Co-operative Information Officer की व्यवस्था है।

नियमों के अनुसार Multi-State Cooperative Society के सदस्य को society के affairs और management से संबंधित निर्धारित जानकारी मांगने के लिए Co-operative Information Officer को application देने का अधिकार है।

Application लिखित रूप में या electronic माध्यम से दी जा सकती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि member से information मांगने का कारण बताना आवश्यक नहीं है।

यह व्यवस्था काफी हद तक उस transparency principle जैसी दिखाई देती है जिसे आम लोग RTI से जोड़कर समझते हैं, लेकिन दोनों को पूरी तरह एक समान समझना ठीक नहीं होगा।

यह अधिकार Multi-State Cooperative Societies Act की अपनी व्यवस्था से आता है और जानकारी का दायरा society के disclosure norms तथा संबंधित कानून/bye-laws से जुड़ा है।

यानी इसे सामान्य सरकारी RTI application जैसा मानकर हर प्रकार का document मांगना सही interpretation नहीं होगा।

जानकारी नहीं मिली तो क्या होगा?

संशोधित framework में केवल Information Officer बनाने की बात नहीं है, बल्कि appeal का रास्ता भी रखा गया है।

Co-operative Information Officer को application मिलने के बाद निर्धारित अवधि में information उपलब्ध करानी होती है या application reject करने का कारण बताना होता है। यदि member उस decision से असंतुष्ट है, तो वह Co-operative Ombudsman के सामने appeal कर सकता है। संबंधित framework में Information Officer के order के विरुद्ध appeal का स्पष्ट प्रावधान है।

यह member rights के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम है।

पहले कई cooperative institutions में member और management के बीच information imbalance बड़ी समस्या रहती थी। यदि सदस्य को accounts, management decisions या अपने अधिकार से जुड़ी जानकारी पाने का स्पष्ट mechanism मिले तो governance अधिक accountable हो सकती है।

Cooperative Ombudsman क्या करता है?

Multi-State Cooperative Societies Amendment के बाद Co-operative Ombudsman का नया institutional mechanism बनाया गया।

सरकार ने 5 मार्च 2024 को Cooperative Ombudsman नियुक्त किया और उसका jurisdiction पूरे देश के Multi-State Cooperative Societies के लिए निर्धारित किया गया।

Ombudsman members की कुछ specific categories की शिकायतें देख सकता है।

इनमें शामिल हैं:

  • member के deposits से जुड़ी शिकायत,
  • society के functioning से मिलने वाले equitable benefits से संबंधित मामला,
  • member के individual rights को प्रभावित करने वाला मुद्दा,
  • Co-operative Information Officer के order के खिलाफ appeal.

यहां भी सीमा समझना जरूरी है।

Ombudsman हर cooperative dispute का universal forum नहीं है।

यदि मामला पहले से arbitration proceedings या किसी अन्य pending या settled legal proceeding का हिस्सा है, तो Rules के अनुसार वह Ombudsman के jurisdiction से बाहर हो सकता है।

इसलिए किसी विवाद में सीधे complaint भेजने से पहले यह देखना जरूरी है कि उसका सही statutory forum कौन-सा है।

क्या वकील के जरिए शिकायत की जा सकती है?

Rules में एक दिलचस्प व्यवस्था यह भी है कि aggrieved member शिकायत या appeal स्वयं या authorised representative के माध्यम से कर सकता है, लेकिन उस specific provision में authorised representative में advocate को शामिल नहीं किया गया है।

इसका उद्देश्य शायद grievance mechanism को सामान्य member के लिए सरल और कम formal रखना है।

फिर भी यदि मामला जटिल कानूनी विवाद में बदलता है तो अलग statutory proceedings में legal representation के नियम अलग हो सकते हैं।

Recruitment में transparency भी law का हिस्सा बनी

2023 के बदलाव केवल elections और complaints तक सीमित नहीं हैं।

Updated Rules में employees की recruitment के लिए transparent, objective और adequately publicised competitive process की व्यवस्था की गई है। Educational qualification और experience criteria society के bye-laws के अनुसार होने चाहिए।

यह मुद्दा भी governance से सीधे जुड़ा है।

Cooperative society में यदि recruitment स्पष्ट प्रक्रिया से नहीं होती तो management पर favoritism के आरोप लगना आसान हो जाता है। Transparent recruitment system संस्था की credibility बढ़ा सकता है।

Member rights केवल कानून से मजबूत नहीं होते

यहां सबसे महत्वपूर्ण practical बात आती है।

कानून में Election Authority, Ombudsman और Information Officer बना देना अपने-आप cooperative governance को perfect नहीं बना देता।

Member को अपने अधिकार पता होने चाहिए।

Society को updated bye-laws उपलब्ध कराने चाहिए।

Annual returns और audit timely होने चाहिए।

Election records सही होने चाहिए।

Management decisions proper resolutions से होने चाहिए।

और members को General Body meetings में meaningful participation करनी चाहिए।

यदि सदस्य स्वयं संस्था के कामकाज से दूर रहे तो सबसे अच्छा कानून भी सीमित परिणाम देगा।

State Cooperative Society के सदस्य क्या करें?

यदि आपकी society केवल Haryana या किसी एक राज्य में registered है, तो Multi-State Cooperative Societies Act देखकर सीधे अपना right तय न करें।

पहले यह देखें कि संस्था किस कानून में registered है।

उदाहरण के लिए Haryana में किसी state cooperative society के सदस्य को मुख्यतः संबंधित Haryana Cooperative Societies Act, Rules और registered bye-laws देखने होंगे।

दूसरी तरफ यदि society Central Registrar के पास Multi-State Cooperative Society के रूप में registered है तो MSCS Act और Rules relevant होंगे। CRCS ही ऐसी societies की registration, bye-law amendments, annual filings, inspections और अन्य regulatory matters संभालता है।

यह distinction छोटी लग सकती है, लेकिन legal advice में यही सबसे पहली और सबसे जरूरी जांच होती है।

असली बदलाव क्या है?

2023 के amendments को एक लाइन में समझना हो तो कहा जा सकता है कि Multi-State Cooperative Society में management के ऊपर केवल Registrar की निगरानी बढ़ाना लक्ष्य नहीं है; member को system के भीतर अधिक स्पष्ट अधिकार और institutional remedies देना भी उद्देश्य है।

Election Authority चुनाव को existing management से अधिक स्वतंत्र बनाने की कोशिश करता है।

Information Officer member को जानकारी तक formal access देता है।

Ombudsman individual member complaints के लिए अलग grievance mechanism उपलब्ध कराता है।

Board representation diversity बढ़ाने की कोशिश करता है।

और recruitment provisions internal governance को अधिक transparent बनाने की दिशा में जाते हैं।

इन सभी व्यवस्थाओं की असली परीक्षा implementation में होगी।

लेकिन cooperative sector के लिए एक बात स्पष्ट होती जा रही है—

भविष्य की cooperative society केवल “सदस्य संस्था” कहलाने से पर्याप्त नहीं होगी। उसे member को जानकारी, भागीदारी और शिकायत के वास्तविक रास्ते भी देने होंगे।

यही cooperative governance की असली कसौटी है।

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