
NCDC संशोधन विधेयक 2026: सहकारी समितियों के लिए सीधे वित्त का रास्ता कितना बदलेगा?
सहकारी समिति के किसी पदाधिकारी से यदि पूछा जाए कि संस्था का कारोबार बढ़ाने के लिए सबसे बड़ी जरूरत क्या है, तो जवाब अक्सर पैसा, आधारभूत ढांचा और समय पर मिलने वाली वित्तीय सहायता के आसपास ही घूमता है। समिति के पास अच्छा प्रोजेक्ट हो सकता है, जमीन हो सकती है, सदस्य तैयार हो सकते हैं, लेकिन यदि पूंजी समय पर उपलब्ध न हो तो योजना कागज से आगे नहीं बढ़ पाती।
इसी पृष्ठभूमि में National Co-operative Development Corporation (Amendment) Bill, 2026 महत्वपूर्ण है। यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है। इसे 10 अगस्त 2026 को लोकसभा में पेश किया गया, 11 अगस्त को लोकसभा ने पारित किया और 12 अगस्त को राज्यसभा ने भी मंजूरी दे दी। इसका उद्देश्य 1962 के National Co-operative Development Corporation Act में बदलाव करना है।
सहकारिता क्षेत्र से जुड़े सामान्य व्यक्ति के लिए असली सवाल यह है कि इससे जमीन पर क्या बदलेगा?
पहले समझें कि NCDC करता क्या है
National Cooperative Development Corporation यानी NCDC एक वैधानिक संस्था है। इसकी स्थापना संसद के कानून के तहत हुई थी और यह सहकारी संस्थाओं के विकास से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों को वित्तीय सहायता देता है।
अब तक NCDC का काम कृषि उपज के उत्पादन, processing, marketing, storage, dairy, fisheries, handloom, poultry, consumer goods और कई दूसरी cooperative activities तक फैला हुआ रहा है। सहकारिता मंत्रालय के अनुसार NCDC उत्पादन, processing, marketing, storage, export-import और कई आय-सृजन गतिविधियों से जुड़ी cooperative projects को सहायता देता है।
लेकिन पुराने कानून में यह व्यवस्था हर प्रकार की सहकारी समिति को एक समान तरीके से सीधे finance करने जितनी व्यापक नहीं थी।
यही वह जगह है जहां 2026 का संशोधन महत्वपूर्ण हो जाता है।
सबसे बड़ा बदलाव: सीधे सहायता का दायरा बढ़ेगा
पुराने कानून के तहत NCDC राज्य सरकारों को धन उपलब्ध करा सकता था ताकि वे सहकारी समितियों को finance करें। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय स्तर की या एक से अधिक राज्यों में काम करने वाली सहकारी समितियों को सीधे loan और grant देने की व्यवस्था भी थी।
नए विधेयक में यह दायरा बढ़ाया गया है।
PRS Legislative Research के सार के अनुसार NCDC को किसी भी cooperative society या cooperative development में लगी पात्र entity को सीधे loan और grant देने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। राज्य सरकारें भी NCDC से मिलने वाले finance को cooperative development में लगी अन्य पात्र entities तक पहुंचा सकेंगी।
साधारण भाषा में कहें तो इस बदलाव का अर्थ यह है कि NCDC financing को केवल कुछ विशेष स्तर की cooperative institutions तक सीमित रखने के बजाय ज्यादा व्यापक cooperative ecosystem तक पहुंचाने की कानूनी क्षमता तैयार की जा रही है।
लेकिन यहां एक सावधानी जरूरी है।
इसका मतलब यह नहीं है कि अब हर PACS या हर छोटी cooperative society को आवेदन करते ही NCDC से सीधे loan मिल जाएगा। किसी भी financing में scheme guidelines, project viability, repayment capacity, security, eligibility और NCDC की निर्धारित शर्तें लागू होंगी।
इसलिए “सीधी financing की कानूनी गुंजाइश बढ़ना” और “हर समिति को स्वतः finance मिलना”—दो अलग बातें हैं।
राज्य के भीतर काम करने वाली समितियों के लिए भी नया रास्ता
संशोधन का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू share capital investment से जुड़ा है।
पुरानी व्यवस्था में NCDC राष्ट्रीय स्तर या एक से अधिक राज्यों में काम करने वाली cooperative societies की share capital में भागीदारी कर सकता था।
संशोधन विधेयक इस दायरे को बढ़ाकर एक राज्य के भीतर काम करने वाली cooperative society या cooperative development में लगी पात्र entity तक ले जाता है। हालांकि ऐसी share capital participation के लिए केंद्र सरकार की अनुमति आवश्यक होगी।
यह प्रावधान आगे चलकर खास तौर पर उन cooperative projects के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जिन्हें केवल loan के बजाय equity-type support की जरूरत होती है।
NCDC का काम केवल कृषि तक सीमित नहीं रहेगा
विधेयक की एक और खास बात यह है कि “co-operative development” की अवधारणा को ज्यादा व्यापक रूप दिया गया है।
पुराने कानून में NCDC की गतिविधियों का बड़ा हिस्सा agricultural produce, foodstuffs, minor forest produce और कुछ notified commodities तथा services के इर्द-गिर्द था।
नए विधेयक में cooperative development को सहायता देने की भाषा अधिक व्यापक है। इसके अलावा “foodstuffs” की परिभाषा में processed food और अन्य edible products को भी शामिल किया गया है तथा केंद्र सरकार को अन्य food items अधिसूचित करने की शक्ति दी गई है।
इसका महत्व इसलिए है क्योंकि आज cooperative sector केवल गेहूं, धान, दूध या खाद-बीज तक सीमित नहीं है।
सहकारी संस्थाएं food processing, value addition, branding, retail, cold chain, digital services, logistics और ग्रामीण उद्योगों जैसे क्षेत्रों में भी आगे बढ़ रही हैं।
Industrial cooperatives पर “ग्रामीण क्षेत्र” की बाध्यता भी हटेगी
पुराने कानून में industrial goods से संबंधित कुछ सहायता ऐसी cooperative और allied industries से जुड़ी थी जो rural areas में स्थित हों।
संशोधन विधेयक इस rural-location requirement को हटाता है। इसका अर्थ है कि cooperative industrial activity को केवल ग्रामीण स्थान से जोड़कर देखने की सीमा कम होगी।
आज बहुत से cooperative enterprises कस्बों, peri-urban क्षेत्रों या शहरों के आसपास भी काम करते हैं। इसलिए यह बदलाव cooperative industrialisation के बदलते स्वरूप के ज्यादा अनुकूल माना जा सकता है।
Credit information का आदान-प्रदान भी संभव होगा
वित्त उपलब्ध कराने वाली संस्था के लिए यह जानना जरूरी होता है कि उधार लेने वाली संस्था की वित्तीय स्थिति कैसी है, उसका पिछला repayment behaviour क्या है और उसकी creditworthiness कितनी है।
संशोधन विधेयक NCDC को अपने कार्यों के प्रभावी संचालन के लिए credit information और दूसरी आवश्यक जानकारी collect तथा furnish करने की शक्ति देता है।
ऐसी जानकारी केंद्र सरकार, Reserve Bank of India, banking companies और केंद्र द्वारा अधिसूचित अन्य financial institutions के साथ साझा की जा सकती है।
यह प्रावधान भविष्य में cooperative financing को अधिक formal credit assessment framework से जोड़ने में मदद कर सकता है।
इसका दूसरा अर्थ यह भी है कि cooperative societies के लिए सही accounting, audited records, loan repayment discipline और financial reporting पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण होते जाएंगे।
छोटी cooperative society को इससे वास्तव में क्या फायदा हो सकता है?
मान लीजिए किसी जिला या ब्लॉक स्तर की cooperative society को warehouse बनाना है, food processing unit लगानी है, cold storage शुरू करना है या किसी नई income-generating activity में जाना है।
यदि उस प्रकार का project NCDC की किसी scheme के तहत पात्र है और direct funding की शर्तें पूरी करता है, तो संशोधित कानूनी व्यवस्था उसके लिए financing का रास्ता अधिक सीधा बना सकती है।
इसके संभावित लाभ तीन स्तर पर देखे जा सकते हैं—
पहला, financing के विकल्प बढ़ सकते हैं।
दूसरा, राज्य सरकार के माध्यम से finance प्राप्त करने की आवश्यकता वाले कुछ मामलों में direct route उपलब्ध हो सकता है।
तीसरा, cooperative project को केवल traditional agricultural activity के रूप में देखने के बजाय broader business development के रूप में finance किए जाने की संभावना बढ़ सकती है।
लेकिन अंतिम निर्णय प्रत्येक scheme और project की eligibility पर ही निर्भर करेगा।
क्या इससे बैंक की जरूरत खत्म हो जाएगी?
नहीं।
NCDC को commercial bank या cooperative bank का विकल्प समझना ठीक नहीं होगा।
Societies को working capital, cash credit, short-term business finance और routine banking requirements के लिए बैंकों की जरूरत बनी रहेगी।
NCDC की भूमिका मुख्य रूप से cooperative development projects और उसकी योजनाओं के तहत पात्र activities की financing से जुड़ी है।
इसलिए बेहतर स्थिति यह होगी कि cooperative society अपनी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग finance sources का इस्तेमाल करे—कहीं cooperative bank, कहीं commercial bank, कहीं government scheme और जहां project पात्र हो वहां NCDC।
असली बदलाव कानून के बाद guidelines में दिखाई देगा
संसद से विधेयक पारित होना निश्चित रूप से महत्वपूर्ण कदम है। PRS के Monsoon Session 2026 के रिकॉर्ड में भी NCDC Amendment Bill को संसद द्वारा पारित विधेयकों में शामिल किया गया है।
लेकिन किसी cooperative society के manager या board के लिए इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण अगला चरण होगा।
उन्हें देखना होगा कि NCDC:
कौन-सी societies को direct funding देगा, कौन-सी activities eligible होंगी, कितना own contribution मांगा जाएगा, security क्या होगी, interest rate और repayment period क्या रहेगा और project appraisal किस प्रकार होगा।
यही operational guidelines यह तय करेंगी कि कानून में बढ़ाया गया दायरा ground level पर कितनी आसानी से finance में बदलता है।
सहकारी क्षेत्र के लिए बड़ा संकेत
इस संशोधन का व्यापक संदेश शायद किसी एक loan scheme से बड़ा है।
सरकार cooperative institutions को केवल पारंपरिक कृषि ऋण, खाद-बीज या procurement तक सीमित रखने के बजाय उन्हें आधुनिक business institutions के रूप में विकसित करने की दिशा में बढ़ रही है।
जब PACS और अन्य cooperatives को storage, processing, digital services, dairy, marketing और दूसरी गतिविधियों से जोड़ने की बात होती है, तो उनके लिए वित्त का मजबूत ढांचा भी जरूरी हो जाता है।
NCDC Amendment Bill 2026 उसी financing architecture को अधिक व्यापक बनाने की कोशिश है।
फिर भी किसी समिति को अभी केवल यह पढ़कर project शुरू नहीं कर देना चाहिए कि “NCDC अब सीधे पैसा देगा।” बेहतर तरीका यह होगा कि संस्था पहले अपना business plan, audited financial position, projected income, repayment capacity और project cost तैयार करे और फिर संबंधित NCDC scheme की वास्तविक eligibility जांचे।
कानून रास्ता खोल सकता है। उस रास्ते पर सफलतापूर्वक चलने के लिए मजबूत project और साफ financial records अभी भी उतने ही जरूरी रहेंगे।
