CM-PACS सिर्फ खाद-बीज बेचने वाली समिति नहीं है — इसके Model Bye-Laws में हमने पहले बताया था कि यह डेयरी, फेयर प्राइस शॉप, LPG डीलरशिप, टैक्सी सेवा और कंस्ट्रक्शन तक कई तरह का कारोबार कर सकती है। लेकिन जब बात मुनाफे पर टैक्स की आती है, तो आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80P हर तरह की कमाई को एक जैसा नहीं मानती। कुछ गतिविधियों पर पूरी छूट मिलती है, कुछ पर सीमित, और कुछ पर बिल्कुल नहीं। यह फर्क समझना हर CM-PACS के लिए ज़रूरी है।
धारा 80P क्या है
धारा 80P आयकर अधिनियम का वह प्रावधान है जो सहकारी सोसाइटियों को उनकी कुछ खास तरह की कमाई पर टैक्स छूट देता है — यानी उतनी रकम को कुल आय में से घटाकर टैक्स की गणना होती है। लेकिन यह छूट किसी सोसाइटी की पूरी कमाई पर अपने आप लागू नहीं होती — यह इस बात पर निर्भर करती है कि कमाई किस गतिविधि से हुई है।
किन गतिविधियों पर 100% छूट मिलती है
धारा 80P(2)(a) के मुताबिक, अगर सोसाइटी की कमाई इन गतिविधियों से हुई है, तो उस पूरे मुनाफे पर टैक्स छूट मिलती है: सदस्यों को बैंकिंग या साख (credit) सुविधा देना, कॉटेज इंडस्ट्री चलाना, सदस्यों की उपज (produce) की मार्केटिंग करना, सदस्यों के लिए कृषि उपकरण-बीज-पशुधन जैसी चीज़ें खरीदकर सप्लाई करना, बिना बिजली की मदद के सदस्यों की उपज प्रोसेस करना, सदस्यों के श्रम (labour) का सामूहिक इस्तेमाल, और मछली पालन जैसी गतिविधियां। CM-PACS के दायरे में देखें तो खाद-बीज सप्लाई, कस्टम हायरिंग सेंटर, उपज की ग्रेडिंग-पैकेजिंग-मार्केटिंग, डेयरी कलेक्शन और प्रोसेसिंग जैसी गतिविधियां इसी सूची के करीब आती हैं — यानी इन पर पूरी टैक्स छूट का दावा किया जा सकता है, बशर्ते वे सदस्यों से जुड़ी हों।
बाकी कारोबार पर छूट सीमित क्यों है
दिक्कत तब आती है जब कमाई ऊपर बताई गई सूची में शामिल नहीं होती — जैसे फेयर प्राइस शॉप, LPG या पेट्रोल डीलरशिप, टैक्सी सेवा, कंस्ट्रक्शन वर्क्स या सामान्य रिटेल। धारा 80P(2)(c) के मुताबिक ऐसी गतिविधियों से हुए मुनाफे पर छूट की एक सीमा तय है — उपभोक्ता सहकारी समिति (consumer cooperative society) के लिए यह सीमा ₹1 लाख तक है, जबकि बाकी मामलों में सिर्फ ₹50,000 तक के मुनाफे पर छूट मिलती है। इससे ऊपर की कमाई सामान्य दर से टैक्स योग्य होती है। यानी अगर किसी CM-PACS की LPG डीलरशिप या टैक्सी सेवा से ₹50,000 से ज़्यादा मुनाफा होता है, तो बाकी हिस्सा टैक्स के दायरे में आ जाएगा।
निवेश और गोदाम की आय पर पूरी छूट
दो और तरह की कमाई पर 80P पूरी छूट देती है। धारा 80P(2)(d) के तहत, अगर सोसाइटी ने अपना पैसा किसी दूसरी सहकारी सोसाइटी में निवेश किया है और उससे ब्याज या डिविडेंड कमाया है, तो वह पूरी रकम टैक्स-मुक्त है। इसी तरह धारा 80P(2)(e) के तहत, गोदाम या वेयरहाउस किराए पर देकर — चाहे वह उपज के भंडारण, प्रोसेसिंग या मार्केटिंग के लिए हो — जो भी कमाई होती है, वह भी पूरी तरह छूट के दायरे में आती है।
बैंकिंग वाला अपवाद — धारा 80P(4)
2006 के फाइनेंस एक्ट ने 1 अप्रैल 2007 से एक अहम अपवाद जोड़ा — धारा 80P(4)। इसके मुताबिक यह पूरी धारा 80P किसी “को-ऑपरेटिव बैंक” पर लागू नहीं होती, सिवाय प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसाइटी (PACS) या प्राइमरी को-ऑपरेटिव एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट बैंक के। यह अपवाद खासतौर पर उन सहकारी संस्थाओं के लिए है जो बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के तहत असल में बैंकिंग कारोबार करती हैं — जमा लेना, चेक क्लियर करना वगैरह। CM-PACS के Model Bye-Laws में लिस्ट की गई गतिविधियों में बैंकिंग कारोबार शामिल नहीं है, इसलिए आमतौर पर यह अपवाद CM-PACS पर लागू नहीं होना चाहिए — लेकिन अगर किसी खास CM-PACS ने वाकई डिपॉज़िट या बैंकिंग जैसी सेवाएं शुरू की हैं, तो उसकी स्थिति अलग से जांचनी होगी। यहां एक बात याद रखना ज़रूरी है — यह अपवाद PACS यानी Primary Agriculture Credit Society से जुड़ा है, जो CM-PACS से पूरी तरह अलग और असंबंधित संस्था है।
व्यावहारिक मतलब — हिसाब अलग-अलग रखना ज़रूरी
चूंकि CM-PACS एक साथ कई तरह का कारोबार कर सकती है, इसलिए टैक्स की सही गणना के लिए हर गतिविधि की कमाई अलग-अलग दर्ज करनी ज़रूरी है — कृषि से जुड़ी गतिविधियों की कमाई, सामान्य कारोबार (जैसे LPG, टैक्सी) की कमाई, और निवेश या गोदाम से हुई कमाई को मिलाकर नहीं बल्कि अलग-अलग खातों में दिखाना होगा, तभी सही छूट का दावा हो पाएगा। यह जानकारी सामान्य समझ के लिए है — असल टैक्स फाइलिंग से पहले किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स सलाहकार से अपने खास मामले पर सलाह लेना ज़रूरी है, क्योंकि हर सोसाइटी की गतिविधियां और हिसाब-किताब अलग हो सकते हैं।
स्रोत सूची (Source List)
आयकर अधिनियम, 1961 — धारा 80P(2)(a), 80P(2)(c), 80P(2)(d), 80P(2)(e), 80P(4)
फाइनेंस एक्ट, 2006 — धारा 80P(4) का जोड़ा जाना (प्रभावी 1 अप्रैल 2007)
Sahakar Watch — सिर्फ खाद-बीज की समिति नहीं: हरियाणा की CM-PACS कितने तरह के कारोबार कर सकती है?
Sahakar Watch — CM-PACS असल में सरकारी योजना है या कानूनी सोसाइटी? धारा 4 का टेस्ट समझिए











