“सहकारिता से समृद्ध, विकसित और आत्मनिर्भर बनेगा भारत” — हरियाणा के खेल, युवा मामले एवं विधि राज्य मंत्री गौरव गौतम ने यह बात 2 अगस्त 2026 को पलवल के नेताजी सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम में आयोजित ज़िला स्तरीय सहकारी जागरूकता सेमिनार में बतौर मुख्य अतिथि कही। यह जानकारी हरियाणा सरकार के सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में दर्ज है।
गौरव गौतम पलवल से भाजपा विधायक हैं और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के मंत्रिमंडल में सबसे युवा मंत्रियों में गिने जाते हैं। सेमिनार का आयोजन हरियाणा सहकारिता विभाग और हरियाणा राज्य सहकारी संघ (Harcofed) ने संयुक्त रूप से किया, जिसकी पुष्टि Amar Ujala की रिपोर्ट से भी होती है।
मंत्री का दावा — “सहकारिता सिर्फ विभाग नहीं, मज़बूत नींव”
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, गौतम ने कहा कि सहकारिता महज़ एक सरकारी विभाग नहीं बल्कि भारत के आर्थिक विकास की “मज़बूत नींव” है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारिता क्षेत्र को “नई दिशा और नई ऊर्जा” मिली है — इसके उदाहरण के तौर पर उन्होंने अलग सहकारिता मंत्रालय के गठन और डिजिटल व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने का ज़िक्र किया। Amar Ujala की रिपोर्ट में गौतम का एक सीधा कथन भी दर्ज है: “सहकारिता किसानों, महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम है।”
दावों के पीछे की असल तस्वीर — डिजिटल व्यवस्था और मंत्रालय का गठन
मंत्री के दो दावे — अलग सहकारिता मंत्रालय और डिजिटल सिस्टम — स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य हैं। केंद्र में Ministry of Cooperation की स्थापना जुलाई 2021 में हुई थी, जिसके पांच साल के कामकाज पर Sahakar Watch पहले विस्तार से लिख चुका है। डिजिटल व्यवस्था की बात करें तो हरियाणा में यह ज़मीन पर कैसी दिखती है, इसका ताज़ा आंकड़ा राज्य सहकारिता विकास समिति (SCDC) की हाल की समीक्षा बैठक में सामने आया — राज्य की सभी 710 PACS का कम्प्यूटरीकरण पूरा हो चुका है और 515 PACS अब Common Service Centre के तौर पर काम कर रही हैं, जिसका पूरा ब्यौरा हमारी पिछली रिपोर्ट में मौजूद है। यानी मंत्री का “डिजिटल सिस्टम” वाला दावा दिशा में सही है, भले ही उन्होंने सेमिनार में कोई ठोस आंकड़ा खुद न दिया हो।
किसानों को खाद-बीज-कर्ज़-भंडारण-मार्केटिंग — यह ढांचा पहले से मौजूद
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार गौतम ने कहा कि सहकारी समितियां किसानों को खाद, बीज, कर्ज़, भंडारण और मार्केटिंग जैसी सुविधाएं देकर उनकी आय बढ़ाने में मदद करती हैं। यह पारंपरिक PACS ढांचे का ही वर्णन है, जिसे हरियाणा सरकार अब CM-PACS मॉडल के ज़रिए और व्यापक बना रही है — इस मॉडल के तहत समितियां खाद-बीज तक सीमित न रहकर दर्जनों तरह के कारोबार कर सकती हैं, जिसका पूरा ब्यौरा Sahakar Watch की CM-PACS गाइड में मिलेगा।
युवाओं और महिलाओं की भागीदारी की अपील
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक गौतम ने सहकारी आंदोलन में युवाओं और महिलाओं की ज़्यादा भागीदारी की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और नागरिकों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था व राष्ट्रीय प्रगति के लिए सहकारी आंदोलन को मज़बूत करने की अपील की। यह अपील किस ठोस योजना या लक्ष्य से जुड़ी है, इसका ज़िक्र प्रेस विज्ञप्ति या सेमिनार की रिपोर्टिंग में नहीं मिला। हरियाणा सहकारिता विभाग की मौजूदा 36 योजनाओं में से कौन-सी सीधे युवाओं या महिलाओं को लक्षित करती हैं, इसका विस्तृत ब्यौरा हमारी पहले की पड़ताल में उपलब्ध है।
निष्कर्ष
पलवल का यह सेमिनार किसी नई योजना, बजट आवंटन या ठोस लक्ष्य की घोषणा नहीं था — यह एक जागरूकता कार्यक्रम था जिसमें मंत्री ने सहकारिता के महत्व पर सामान्य भाषण दिया। प्रेस विज्ञप्ति और स्वतंत्र रिपोर्टिंग, दोनों में ही कोई नया आंकड़ा, योजना या समय-सीमा दर्ज नहीं है। मंत्री के “डिजिटल सिस्टम” और “अलग मंत्रालय” वाले दावे तथ्यात्मक रूप से सही हैं और हरियाणा के अपने आंकड़ों से भी इनकी पुष्टि होती है, लेकिन “युवाओं व महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने” की अपील अभी सिर्फ एक कथन है — इसे किसी ठोस कार्ययोजना या आंकड़े में बदलते हुए देखने के लिए आगे की घोषणाओं का इंतज़ार करना होगा।
स्रोत सूची (Source List)
- हरियाणा सरकार, सूचना जनसंपर्क एवं भाषा विभाग — आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति (2 अगस्त 2026)
- Amar Ujala — सहकारिता से आत्मनिर्भर भारत होगा मजबूत, पलवल में बोले मंत्री गौरव गौतम
- PRS Legislative Research — Gaurav Gautam, विधायक प्रोफाइल
- Sahakar Watch — हरियाणा में मुनाफे वाली PACS 33 से बढ़कर 51 हुईं, सभी 710 का कम्प्यूटरीकरण पूरा
- Sahakar Watch — सहकारिता मंत्रालय के 5 साल: छोटे से गांव तक पहुंची सहकारिता की नई ताकत
- Sahakar Watch — CM-PACS क्या है? हरियाणा की नई सहकारी समिति की जानकारी
- Sahakar Watch — हरियाणा सहकारिता विभाग की 36 योजनाएं











