
CM-PACS क्या है? हरियाणा की नई सहकारी समिति से गांव में कौन-कौन से काम शुरू किए जा सकते हैं, पूरी जानकारी
सिर्फ खाद-बीज और कर्ज़ तक सीमित पुरानी PACS से आगे बढ़कर हरियाणा सरकार ने एक ऐसी सहकारी समिति का मॉडल तैयार किया है जो टैक्सी चलाने से लेकर पेट्रोल पंप और जन औषधि केंद्र तक, दर्जनों तरह के कारोबार गांव स्तर पर शुरू कर सकती है। जानिए CM-PACS से जुड़ी हर जरूरी बात।
गांव में सहकारी समिति कहते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में एक ही तस्वीर बनती है — खाद-बीज बांटने वाली या किसानों को थोड़ा-बहुत कर्ज़ देने वाली PACS (Primary Agriculture Credit Society)। हरियाणा सरकार ने इस सोच को बदलने के लिए 25 दिसंबर 2023 को पंचकूला में हुए ‘राज्य स्तरीय सुशासन दिवस’ कार्यक्रम में एक नए तरह की सहकारी समिति का मॉडल लॉन्च किया — Comprehensive Multi-Purpose Activities Cooperative Society, यानी CM-PACS। रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, हरियाणा (सहकारिता भवन, सेक्टर-2, पंचकूला) की ओर से जारी मेमो नंबर PA/RCS/225-275 (दिनांक 25.12.2023) के जरिए इसके Model Bye-laws सभी जिलों में लागू करने के निर्देश दिए गए।
सीधी भाषा में समझें तो CM-PACS एक ऐसी सहकारी समिति है जो सिर्फ खेती के इनपुट या कर्ज़ तक सीमित नहीं रहती, बल्कि गांव के स्तर पर एक “सहकारी उद्यम” (Cooperative Enterprise) की तरह काम करती है — यानी गांव के लोग मिलकर अपनी खुद की कंपनी जैसी संस्था बनाते हैं, जो एक साथ कई तरह के कारोबार और सेवाएं चला सकती है। इसका मूल सिद्धांत बाइलॉज में साफ लिखा है — “All for one, One for all” यानी “सबके लिए एक, एक के लिए सब”।
पुरानी PACS से यह अलग कैसे है
पारंपरिक PACS ज्यादातर एक ही काम — कृषि साख (agriculture credit) — के इर्द-गिर्द बनी होती हैं। CM-PACS की सोच इससे आगे की है। बाइलॉज के मुताबिक इसका मकसद है गांव या पंचायतों के एक क्लस्टर में backward और forward, दोनों तरह की linkages खड़ी करना — यानी खेती से पहले लगने वाली चीज़ें (बीज, खाद, सिंचाई, मशीनें) और खेती के बाद की ज़रूरतें (छंटाई, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग, स्टोरेज) दोनों को एक ही संस्था के तहत लाना। और इससे भी आगे बढ़कर, इसे टैक्सी सेवा से लेकर पेट्रोल पंप तक, दर्जनों तरह के गैर-कृषि कारोबार करने की भी खुली छूट दी गई है।
तो असल में इसके ज़रिए कौन-कौन से काम किए जा सकते हैं
यही वो सवाल है जो हर गांव के लिए सबसे ज़्यादा मायने रखता है। Model Bye-laws के चैप्टर-II में इसे विस्तार से बताया गया है, और सूची वाकई काफी लंबी और विविधता भरी है।
खेती से जुड़े काम (Backward व Forward Linkages): समिति डेमो प्लॉट लगाने, सिंचाई सुविधा, खाद, उन्नत बीज, बीज उत्पादन, कस्टम हायरिंग सेंटर (यानी किराए पर कृषि मशीनें देना), कीटनाशक और अन्य कृषि इनपुट मुहैया कराने का काम कर सकती है। इसके बाद उपज को इकट्ठा करना, ग्रेडिंग-सफाई, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मार्केटिंग, स्टोरेज, प्रोसेसिंग और परिवहन (रेफ्रिजरेटेड वैन तक) की पूरी वैल्यू चेन भी संभाल सकती है — और यह सिर्फ अनाज-सब्ज़ी तक सीमित नहीं। बाइलॉज में साफ नाम लिए गए हैं: फल-सब्ज़ी, फूलों की खेती, मिट्टी के बर्तन (पॉटरी), डेयरी, मछली पालन, झींगा पालन, मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन (बी-कीपिंग), रेशम उत्पादन (सेरीकल्चर), बागवानी, भेड़-बकरी, खरगोश और सुअर पालन जैसे कामों तक।
दुकान-कारोबार वाली सेवाएं: समिति इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, अनाज खरीद (procurement), फेयर प्राइस शॉप, रेस्टोरेंट या जूस-खाने की दुकान चला सकती है। इतना ही नहीं, LPG, पेट्रोल, डीज़ल और ग्रीन एनर्जी की डीलरशिप-एजेंसी-डिस्ट्रीब्यूटरशिप लेने का प्रावधान भी सीधे बाइलॉज में है। इंश्योरेंस बेचना, अटल सेवा केंद्र चलाना, खेती-पशुपालन-घरेलू सामान और टिकाऊ वस्तुओं (durables) की बिक्री, कृषि मशीनरी उपलब्ध कराना और सदस्यों को स्किल ट्रेनिंग देना — यह सब भी इसके दायरे में आता है।
सरकारी योजनाओं और डिजिटल सेवाओं का माध्यम: CM-PACS सरकारी योजनाओं को लाभार्थियों तक पहुंचाने की एजेंसी बन सकती है, और अपने इलाके में ऑनलाइन/डिजिटल सेवाओं के लिए कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) की तरह भी काम कर सकती है। इसे जन औषधि केंद्र और हरियाणा एग्रो हरहित स्टोर के तौर पर चलाने की भी सीधी अनुमति है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लागू करने और सदस्यों को माइक्रो-इंश्योरेंस/इंश्योरेंस देने वाली एजेंसी की भूमिका भी यह निभा सकती है। बिजली, पानी, टेलीफोन और DTH के बिल कलेक्ट करके संबंधित विभाग में जमा कराने जैसा रोज़मर्रा का काम भी बाइलॉज में शामिल है।
गैर-कृषि (इंडस्ट्रियल) कारोबार: यहीं पर CM-PACS सबसे ज़्यादा चौंकाने वाला मॉडल बन जाता है। बाइलॉज इसे दर्जी का काम (टेलरिंग), हस्तशिल्प, हथकरघा-पावरलूम, ऑटो और टैक्सी सेवा, स्कूली बच्चों के लिए ट्रांसपोर्ट, पार्किंग सेवा, ईंट-भट्टा (brick-kiln), पंचायत के निर्माण कार्यों में ठेकेदारी, मैनपावर सप्लाई, सिक्योरिटी सेवा, प्लेसमेंट सेवा, फूड प्रोसेसिंग यूनिट, कैटरिंग-टिफिन सेवा और इवेंट मैनेजमेंट तक — इन सभी कारोबारों की खुली इजाज़त देता है। यानी एक ही सहकारी समिति के बैनर तले गांव के लोग टैक्सी यूनियन भी चला सकते हैं और टिफिन सेवा भी, ईंट-भट्टा भी और सिक्योरिटी एजेंसी भी।
समिति ज़मीन, भवन, गोदाम और प्रोसेसिंग यूनिट जैसी संपत्तियां खरीदने या किराए पर लेने के लिए भी अधिकृत है, और ज़रूरत पड़ने पर स्थानीय निकायों, सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों या दूसरी संस्थाओं के साथ मिलकर भी काम कर सकती है। इसके अलावा, अगर आगे चलकर कोई नया काम सामने आए जो इन उद्देश्यों से जुड़ा हो, तो सामान्य सभा (General Body) की मंज़ूरी और रजिस्ट्रार की अनुमति से उसे भी जोड़ा जा सकता है — यानी सूची पूरी तरह बंद नहीं है।
सदस्य कौन बन सकता है
CM-PACS का सदस्य बनने के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। व्यक्ति की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए और भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 के तहत अनुबंध करने योग्य होना चाहिए। वह समिति के कार्यक्षेत्र (area of operation) का निवासी हो, कम से कम 10+2 की शैक्षणिक योग्यता रखता हो, उसके पास 5 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन न हो, और वह पहले से किसी दूसरी CM-PACS का सदस्य न हो। राज्य सरकार और कोई बोर्ड/निगम/संस्था/एजेंसी भी इसकी सदस्य बन सकती है।
जो लोग सदस्य नहीं बनना चाहते पर समिति से कारोबारी रिश्ता (जैसे सेवा लेना) रखना चाहते हैं, वे ₹500 की एकबारगी, गैर-वापसी योग्य फीस देकर एसोसिएट मेंबर बन सकते हैं — हालांकि उन्हें बैठकों में वोट देने या चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं मिलता।
सदस्यता के लिए आवेदन के साथ पहचान और ज़मीन के दस्तावेज़, KYC (जिसमें परिवार पहचान पत्र और CIBIL शामिल है) देना ज़रूरी है, और किसानों के लिए MFMB रजिस्ट्रेशन भी अनिवार्य किया गया है। कमेटी को आवेदन पर फैसला लेने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा 3 महीने का समय मिलता है। मंज़ूरी मिलने पर सदस्य को ₹1,000 प्रवेश शुल्क (non-refundable) और ₹1000 का एक शेयर जमा करना होता है, जिसके बाद उसे शेयर सर्टिफिकेट मिलता है। यह शेयर 3 साल के लिए मान्य रहता है, जिसके बाद हर साल ₹5,000 देकर सदस्यता रिन्यू करानी होती है। सदस्यता छोड़ने पर भी शर्तें हैं — कम से कम 3 साल सदस्य रहने के बाद, 3 महीने पहले लिखित सूचना देकर, और तब शेयर का ज़्यादा से ज़्यादा 90% ही वापस मिलता है (नुकसान की भरपाई के बाद)।
पैसा कहां से आता है
समिति की कमाई के मुख्य स्रोत हैं — अपने कारोबार से होने वाली आमदनी, सदस्यता व प्रवेश शुल्क, सदस्यों का शेयर पूंजी, बैंकों/वित्तीय संस्थाओं से लिया गया कर्ज़, और केंद्र व राज्य सरकार या उनकी एजेंसियों से मिलने वाले अनुदान व सब्सिडी।
कौन चलाएगा यह समिति — और पारदर्शिता की खास शर्त
समिति की सबसे बड़ी ताकत उसकी सामान्य सभा (General Body) होती है, जिसमें सभी सदस्य (एसोसिएट को छोड़कर) शामिल होते हैं और साल में कम से कम एक बार बैठक ज़रूरी है। रोज़मर्रा के फैसले एक निर्वाचित कमेटी लेती है, जिसमें कम से कम 7 और ज़्यादा से ज़्यादा 21 सदस्य हो सकते हैं (जिनमें सरकार, वित्तीय संस्था या करार वाली संस्था के प्रतिनिधि भी शामिल हो सकते हैं)। अनुसूचित जाति, महिलाओं और पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 28 के तहत सुनिश्चित करना अनिवार्य है। कमेटी का कार्यकाल 5 साल का होता है और वह अपने में से अध्यक्ष व उपाध्यक्ष चुनती है। ज़रूरत पड़ने पर अकाउंटिंग, फाइनेंस, बैंकिंग, IT, कानून या सहकारिता प्रबंधन में विशेषज्ञता रखने वाले 2 प्रोफेशनल डायरेक्टर भी को-ऑप्ट किए जा सकते हैं (हालांकि उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं होता)। दिन-प्रतिदिन का कामकाज एक मैनेजर संभालता है, जिसे कमेटी अपने सदस्यों में से चुनती है।
एक दिलचस्प और आधुनिक प्रावधान यह है कि हर सामान्य सभा और हर कमेटी बैठक को सोशल मीडिया पर लाइवस्ट्रीम करना अनिवार्य है, और उसे विभाग की वेबसाइट पर खोजने-योग्य (searchable) तरीके से आर्काइव भी करना होता है — यानी पारदर्शिता को बाइलॉज में ही बांध दिया गया है। समिति को अपनी खुद की वेबसाइट बनाना और बनाए रखना भी अनिवार्य किया गया है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, CM-PACS एक ऐसा मॉडल है जो गांव के लोगों को सिर्फ किसान की भूमिका से आगे बढ़ाकर उन्हें सामूहिक कारोबारी (cooperative entrepreneur) की भूमिका में लाने की कोशिश करता है — चाहे वह खेती से जुड़ी वैल्यू चेन हो, पेट्रोल पंप जैसी डीलरशिप हो, या टैक्सी-टिफिन जैसी सेवा। बाइलॉज में गतिविधियों का दायरा इतना व्यापक रखा गया है कि हर गांव या पंचायत-क्लस्टर अपनी ज़रूरत और मौके के हिसाब से अपना खुद का कारोबारी मॉडल चुन सके। बेशक, हर काम के लिए संबंधित विभाग से ज़रूरी लाइसेंस-अनुमति लेना समिति की ही ज़िम्मेदारी है — बाइलॉज में यह शर्त भी साफ लिखी है।
(यह लेख हरियाणा सरकार, सहकारी समितियां रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा जारी CM-PACS के आधिकारिक Model Bye-laws (मेमो नंबर PA/RCS/225-275, दिनांक 25.12.2023) पर आधारित है।)
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