National Cooperation Policy 2025: क्या इससे सहकारी समितियों के कानून बदल गए हैं? आसान भाषा में समझिए असली असर

किसी नई सरकारी नीति की घोषणा होते ही अक्सर यह धारणा बन जाती है कि अब उससे जुड़ा नया नियम पूरे देश में लागू हो गया है। सहकारिता के क्षेत्र में भी National Cooperation Policy 2025 को लेकर कई बार ऐसा ही भ्रम देखने को मिलता है।

कहीं इसे PACS के कामकाज में सीधे बदलाव से जोड़ा जाता है, कहीं नई गतिविधियों की अनुमति मान लिया जाता है और कहीं यह समझ लिया जाता है कि अब पूरे देश की सहकारी समितियों पर एक जैसी व्यवस्था लागू हो जाएगी।

असल स्थिति इससे थोड़ी अलग है।

National Cooperation Policy 2025 निश्चित रूप से अगले दशक के लिए भारत के cooperative sector का महत्वपूर्ण policy document है, लेकिन यह अपने आप किसी राज्य के Cooperative Societies Act, Rules या किसी समिति के registered bye-laws को बदल नहीं देती।

यही फर्क समझना किसी PACS के सचिव, प्रबंधक, निदेशक, cooperative employee या सामान्य सदस्य के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है।

पहले समझें—National Cooperation Policy 2025 है क्या?

केंद्र सरकार ने 24 जुलाई 2025 को National Cooperation Policy 2025 जारी की थी। नीति को अगले दस वर्षों में cooperative sector के व्यवस्थित विकास का roadmap बनाया गया है।

इसमें 6 strategic pillars, 16 objectives और 83 recommendations रखी गई हैं। सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य cooperative sector का आर्थिक योगदान बढ़ाना और लगभग 50 करोड़ लोगों को cooperative ecosystem के दायरे में लाना है।

नीति के छह प्रमुख आधार हैं—

  1. cooperative movement की बुनियाद मजबूत करना,
  2. cooperatives को आर्थिक रूप से vibrant और self-sustaining बनाना,
  3. उन्हें professional और future-ready institutions में बदलना,
  4. महिलाओं, युवाओं, छोटे किसानों और कमजोर वर्गों की भागीदारी बढ़ाना,
  5. cooperatives को नए और emerging sectors में ले जाना,
  6. नई पीढ़ी को cooperative movement से जोड़ना।

कागज पर देखें तो यह दायरा बहुत व्यापक है। इसमें कानून, governance, technology, finance, training, employment और नए business sectors तक लगभग पूरा cooperative ecosystem शामिल हो जाता है।

लेकिन Policy और Law एक चीज नहीं हैं

यहीं सबसे महत्वपूर्ण बात आती है।

भारत में बहुत-सी सहकारी समितियां राज्य के cooperative law के तहत registered होती हैं। उदाहरण के लिए हरियाणा में state-level cooperative societies का संचालन Haryana Cooperative Societies Act, उसके Rules और संबंधित समिति के registered bye-laws के ढांचे में होता है।

National Cooperation Policy 2025 स्वयं इस state law को हटाकर उसकी जगह कोई नया uniform cooperative law लागू नहीं करती।

दरअसल नीति में स्वयं राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अपने Cooperative Societies Acts और Rules में उपयुक्त सुधार करने तथा अपनी State Cooperation Policy तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। केंद्र सरकार ने भी राज्यों/UTs से National Cooperation Policy के अनुरूप state-level cooperation policy बनाने को कहा है।

यानी National Policy दिशा बताती है; उस दिशा को कई मामलों में जमीन पर उतारने के लिए राज्य स्तर पर कानून, नियम, आदेश, scheme guidelines या administrative decisions की जरूरत पड़ सकती है।

इसे एक साधारण उदाहरण से समझें

मान लीजिए National Cooperation Policy कहती है कि PACS को नए business sectors में जाना चाहिए।

इसका यह अर्थ नहीं कि कोई PACS अगले दिन अपनी मर्जी से कोई भी नया business शुरू कर दे।

पहले देखना होगा—

उस राज्य का Cooperative Act क्या अनुमति देता है?

समिति के registered bye-laws में वह activity शामिल है या नहीं?

Registrar या अन्य competent authority की approval की जरूरत तो नहीं?

किसी अलग विभाग का licence आवश्यक तो नहीं?

और उस business के लिए कोई specific government scheme या guideline लागू है या नहीं?

इसलिए Policy अवसर की दिशा दिखाती है, लेकिन actual legal authority हमेशा संबंधित कानून और नियमों में देखनी चाहिए।

फिर इस Policy का महत्व इतना ज्यादा क्यों है?

यह सवाल उचित है। अगर policy अपने आप कानून नहीं बदलती तो फिर इसका महत्व क्या है?

महत्व इसलिए है क्योंकि आने वाले वर्षों में होने वाले legislative और administrative reforms की दिशा इसी document से प्रभावित होगी।

Policy में राज्यों को cooperative laws और rules में reforms के लिए encourage किया गया है ताकि autonomy, good governance, transparency और ease of doing business बढ़ सके। इसमें democratic member control, समय पर और निष्पक्ष elections तथा transparent recruitment जैसी बातों पर भी जोर है। Registrar offices के processes को अधिक digital और paperless करने की दिशा भी policy framework का हिस्सा है।

इसलिए cooperative sector से जुड़े व्यक्ति को Policy को “आज से लागू नया कानून” नहीं बल्कि “कल होने वाले कानून और व्यवस्था के बदलावों का roadmap” समझना ज्यादा सही होगा।

2026 में implementation कहां तक पहुंचा?

Policy केवल घोषणा बनकर नहीं रुकी है।

सरकार ने इसके implementation और monitoring के लिए institutional mechanism भी बनाया है। National Cooperation Policy में एक National Steering Committee on Cooperation Policy और एक Policy Implementation and Monitoring Committee की व्यवस्था दी गई है।

जुलाई 2026 में सरकार ने संसद को बताया कि दोनों समितियां गठित की जा चुकी हैं। Policy Implementation and Monitoring Committee की पहली बैठक 9 जून 2026 को हुई। उस समय मंत्रालय ने National Cooperation Policy के उद्देश्यों की दिशा में 152 initiatives पर काम किए जाने की जानकारी दी। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को अपनी state-level cooperation policies बनाने की सलाह भी दी गई है।

इसका अर्थ यह है कि अब असली ध्यान घोषणा से आगे बढ़कर implementation पर आ रहा है।

एक सावधानी: हर सरकारी cooperative initiative को NCP 2025 का परिणाम न मानें

यहां तथ्यात्मक सावधानी जरूरी है।

आज PACS computerisation, नए multipurpose PACS, grain storage, White Revolution 2.0, cooperative exports, organic products और दूसरी कई योजनाओं को National Cooperation Policy के साथ जोड़ा जाता है।

इनमें से कई initiatives Policy जारी होने से पहले शुरू हो चुकी थीं। सरकार के अपने विवरण में भी कहा गया है कि NCP के उद्देश्यों की दिशा में चल रही कई पहलें policy launch होने से पहले की हैं।

उदाहरण के लिए functional PACS के computerisation का Central Sector Project 2022 में शुरू हुआ था। जुलाई 2026 तक इस project का scope बढ़ाकर 79,630 PACS और financial outlay लगभग ₹2,925.39 करोड़ किया जा चुका था।

इसी तरह नए multipurpose PACS, dairy और fisheries cooperatives की स्थापना का plan फरवरी 2023 में मंजूर हुआ था।

इसलिए यह कहना अधिक तथ्यात्मक होगा कि NCP 2025 ने इन अलग-अलग initiatives को एक व्यापक policy framework में जोड़ दिया है—न कि ये सभी योजनाएं Policy के बाद ही शुरू हुईं।

Policy के लिए अलग बजट नहीं—यह बात भी समझने योग्य है

National Cooperation Policy 2025 को लेकर एक और महत्वपूर्ण तथ्य है।

सरकार ने जुलाई 2026 में स्पष्ट किया कि Policy document के भीतर कोई specific budgetary allocation निर्धारित नहीं किया गया है।

इसका अर्थ यह नहीं कि cooperative sector पर पैसा खर्च नहीं होगा।

बल्कि अलग-अलग recommendations को विभिन्न ministries, schemes, institutions और existing/future programmes के माध्यम से लागू किया जा सकता है।

उदाहरण के तौर पर PACS computerisation का अपना budget है, dairy development schemes का अपना financial framework है और किसी infrastructure project के लिए NCDC, NABARD या दूसरी schemes का अलग mechanism हो सकता है।

इसलिए National Cooperation Policy को स्वयं कोई funding scheme समझना ठीक नहीं होगा।

Haryana की cooperative society को अभी क्या करना चाहिए?

हरियाणा की किसी PACS, marketing society, dairy cooperative या दूसरी state-registered cooperative के लिए सबसे व्यावहारिक तरीका यह है कि किसी नई activity या decision से पहले चार स्तरों पर दस्तावेज देखे जाएं—

पहला: Haryana Cooperative Societies Act और Rules
दूसरा: अपनी society के registered bye-laws
तीसरा: Registrar/State Government/HAFED या संबंधित competent authority के applicable orders
चौथा: संबंधित Central scheme या National Cooperation Policy की recommendation

इस क्रम का फायदा यह है कि policy और legal authority के बीच confusion नहीं होगा।

उदाहरण के लिए यदि National Policy cooperative societies को tourism, taxi services, green energy या अन्य emerging sectors में जाने के लिए प्रोत्साहित करती है, तो इससे यह संकेत जरूर मिलता है कि cooperative model के लिए नए क्षेत्र खोले जा रहे हैं। Policy launch के समय सरकार ने tourism, taxi services, insurance और green energy जैसे क्षेत्रों का भी उल्लेख किया था।

लेकिन किसी specific Haryana society के लिए ऐसी activity lawful है या नहीं, यह उस society के Act, Rules, bye-laws और आवश्यक approvals को देखकर ही तय होगा।

अगले दस वर्षों की असली परीक्षा

National Cooperation Policy का सबसे महत्वाकांक्षी हिस्सा उसकी संख्या नहीं बल्कि cooperative institutions की गुणवत्ता बदलने की सोच है।

यदि PACS का computerisation हो जाए लेकिन accounts ठीक न हों, तो technology का उद्देश्य पूरा नहीं होगा।

यदि cooperative में चुनाव होते रहें लेकिन members की वास्तविक भागीदारी न हो तो democratic governance केवल formal requirement बनकर रह जाएगी।

यदि नई business activities शुरू हों लेकिन उनका feasibility study और professional management न हो तो diversification संस्था पर बोझ भी बन सकता है।

और यदि cooperative को ज्यादा autonomy मिले लेकिन साथ में accountability न बढ़े तो reform अधूरा रहेगा।

यही कारण है कि NCP 2025 में professionalism, transparency, technology, financial sustainability और member-centric governance को साथ लेकर चलने की बात की गई है।

निष्कर्ष: Policy को न कम समझें, न कानून मान लें

National Cooperation Policy 2025 को लेकर दो अतियों से बचने की जरूरत है।

पहली—यह मान लेना कि यह केवल एक सरकारी vision document है, इसलिए इसका कोई महत्व नहीं।

दूसरी—यह समझ लेना कि policy जारी होते ही प्रत्येक cooperative society के लिए उसकी सभी recommendations कानूनी रूप से लागू हो गई हैं।

दोनों बातें सही नहीं हैं।

Policy अगले दस वर्षों में cooperative reforms की राष्ट्रीय दिशा तय करती है। लेकिन राज्य-registered societies के दैनिक संचालन, powers, approvals और legal obligations में वास्तविक बदलाव तभी माना जाना चाहिए जब संबंधित Act, Rules, bye-laws, notification, scheme guideline या competent authority का आदेश उस बदलाव को लागू करे।

सहकारिता क्षेत्र के लिए शायद यही सबसे जरूरी समझ है—

नीति बताती है कि व्यवस्था किस दिशा में जाना चाहती है; कानून बताता है कि आज आप वास्तव में क्या कर सकते हैं।

और आने वाले वर्षों में Sahakar Watch जैसी platforms के लिए सबसे महत्वपूर्ण काम यही होगा कि इन दोनों के बीच का फर्क साफ-साफ सामने रखा जाए।

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