
PACS की नई HR Policy: कारोबार के हिसाब से तय होगा स्टाफ, भर्ती से वेतन तक बदल सकती है व्यवस्था
गांव स्तर की सहकारी समिति में काम करने वाले व्यक्ति से अक्सर एक साथ कई तरह के काम की अपेक्षा की जाती है। कहीं सचिव को ऋण और वसूली के साथ खातों का काम भी देखना पड़ता है, तो कहीं खाद-बीज बिक्री, सरकारी योजनाओं, खरीद कार्य और कंप्यूटर से जुड़े काम भी सीमित कर्मचारियों के भरोसे चलते हैं। PACS के तेजी से हो रहे कंप्यूटरीकरण और उनके कामकाज का दायरा बढ़ने के बीच अब कर्मचारियों की संख्या, भर्ती, वेतन, प्रशिक्षण और जवाबदेही को लेकर एक अधिक व्यवस्थित ढांचा तैयार करने की कोशिश की गई है।
भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय ने 4 अगस्त 2026 को Primary Agricultural Credit Societies (PACS) के लिए Human Resource Policy से संबंधित दस्तावेज जारी किया। यह ढांचा PACS के साथ Large Area Multi-Purpose Societies (LAMPS) और Farmers Service Societies (FSS) के मानव संसाधन प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में है। मंत्रालय की वेबसाइट पर यह दस्तावेज आधिकारिक रूप से उपलब्ध कराया गया है।
इस मॉडल व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हर PACS के लिए एक जैसी कर्मचारी संख्या रखने की सोच नहीं है। स्टाफ की जरूरत को समिति के कारोबार के आकार से जोड़ने का प्रस्ताव है। इसके लिए पिछले तीन वर्षों के औसत credit और non-credit business को आधार बनाकर समितियों को अलग-अलग श्रेणियों में रखने की व्यवस्था बताई गई है। यानी जिस समिति का कारोबार बड़ा है, वहां अधिक और अलग-अलग प्रकार के कर्मचारियों की जरूरत को स्वीकार किया गया है।
₹10 करोड़ से ज्यादा कारोबार वाली PACS में न्यूनतम सात कर्मचारी
मॉडल HR ढांचे के अनुसार ₹10 करोड़ से अधिक कारोबार वाली A+ श्रेणी की PACS के लिए न्यूनतम सात कर्मचारियों का प्रावधान बताया गया है। इसमें Secretary, Manager, Accountant/Assistant Executive, दो Specialists तथा दो Clerks/Data Entry Operators जैसी भूमिकाएं शामिल हैं।
₹5 करोड़ से ₹10 करोड़ तक के कारोबार वाली समिति के लिए छह कर्मचारी, ₹3 करोड़ से ₹5 करोड़ तक पांच, ₹1 करोड़ से ₹3 करोड़ तक चार और ₹50 लाख से ₹1 करोड़ तक के कारोबार वाली समिति के लिए तीन कर्मचारियों की न्यूनतम व्यवस्था प्रस्तावित है। छोटी PACS में भी न्यूनतम दो कर्मचारियों की व्यवस्था रखी गई है। बहुत छोटी समितियों के मामले में निर्धारित शर्तों के साथ shared Secretary जैसी व्यवस्था का विकल्प भी मॉडल में मौजूद है।
इसका सीधा अर्थ यह नहीं है कि देश की प्रत्येक PACS में अगले दिन से इतने कर्मचारी नियुक्त हो जाएंगे। इसे Model HR framework के रूप में समझना अधिक उचित होगा। राज्यों की अपनी सहकारी व्यवस्था, नियम और परिस्थितियां हैं और इस ढांचे में भी State-specific flexibility का प्रावधान बताया गया है। इसलिए किसी राज्य में कर्मचारियों पर वास्तविक प्रभाव तभी स्पष्ट होगा जब संबंधित राज्य स्तर पर इसे अपनाने और लागू करने की प्रक्रिया सामने आएगी।
केवल स्टाफ बढ़ाना उद्देश्य नहीं, खर्च उठाने की क्षमता भी देखी जाएगी
इस नीति का एक व्यावहारिक पक्ष भी है। यदि कोई PACS निर्धारित न्यूनतम संख्या से अधिक कर्मचारी रखना चाहती है, तो केवल यह कहना पर्याप्त नहीं होगा कि काम ज्यादा है। अतिरिक्त manpower को कारोबार की वृद्धि से जोड़ने का प्रस्ताव है।
ऐसी नियुक्ति के लिए यह दिखाने वाला financial roadmap भी जरूरी हो सकता है कि PACS अपने बढ़े हुए salary और administrative expenditure को आने वाले समय में अपने राजस्व से वहन कर सकेगी। रिपोर्ट किए गए मॉडल के अनुसार तीन वर्षों के भीतर अतिरिक्त खर्च वहन करने की वित्तीय क्षमता दिखाने पर जोर है। निर्धारित सीमा से अधिक recruitment के लिए District-Level PACS Committee की भूमिका भी प्रस्तावित है।
यह बिंदु खास है, क्योंकि सहकारी समिति आखिरकार एक आर्थिक संस्था भी है। किसी समिति में अधिक कर्मचारी रखना तभी टिकाऊ होगा जब उसका कारोबार और आय उस खर्च को संभाल सके। इसलिए नई व्यवस्था में staff strength और financial sustainability को एक-दूसरे से अलग नहीं माना गया है।
भर्ती में लिखित परीक्षा और योग्यता पर जोर
PACS में भर्ती की प्रक्रिया को भी अधिक व्यवस्थित और merit-based बनाने की बात की गई है। मॉडल नीति में written examination और interview आधारित चयन का प्रावधान बताया गया है। सहकारिता क्षेत्र से संबंधित मान्यता प्राप्त professional qualification रखने वाले उम्मीदवारों को अतिरिक्त weightage देने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। भर्ती स्वतंत्र एजेंसी अथवा राज्य स्तर की recruitment body के माध्यम से कराने का विकल्प भी मौजूद है।
अगर इस व्यवस्था को सही ढंग से लागू किया जाता है तो इसका महत्व केवल नौकरी देने तक सीमित नहीं रहेगा। कंप्यूटरीकृत PACS में accounting, data entry, loan operations, compliance, member services और दूसरे व्यावसायिक कामों के लिए अलग-अलग कौशल की जरूरत बढ़ रही है। इसलिए भविष्य की PACS में केवल पद भरना नहीं बल्कि सही काम के लिए सही skill वाला कर्मचारी उपलब्ध होना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।
वेतन के लिए भी एक ही फार्मूला नहीं
भारत के अलग-अलग राज्यों और PACS की वित्तीय स्थिति में काफी अंतर है। इसी कारण मॉडल HR framework में remuneration के लिए एक ही व्यवस्था थोपने के बजाय तीन प्रकार के विकल्प बताए गए हैं—structured pay scales, fixed consolidated remuneration और performance-linked variable pay। राज्य अपनी परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त मॉडल अपना सकते हैं।
इसके साथ performance appraisal, career progression, incentives, employee welfare, retirement benefits और training जैसी व्यवस्थाओं को भी HR framework का हिस्सा बनाया गया है। कर्मचारियों के service records को e-PACS platform के जरिए digital रूप में रखने की दिशा भी इसमें शामिल है।
यह हिस्सा विशेष महत्व रखता है। PACS का कंप्यूटरीकरण केवल खातों और लेन-देन को डिजिटल करने तक सीमित रहा तो उसका पूरा लाभ नहीं मिलेगा। संस्थान के कर्मचारियों की service history, training, performance और जिम्मेदारियां भी व्यवस्थित होंगी तभी technology और human resource दोनों साथ चल पाएंगे।
कमजोर लेकिन चलने योग्य PACS के लिए सहायता की सोच भी
मॉडल framework में ऐसी PACS को भी ध्यान में रखा गया है जो फिलहाल आर्थिक रूप से कमजोर हैं, लेकिन सही business plan के साथ आगे चल सकती हैं। इसके लिए District-Level PACS Assistance Fund जैसा mechanism प्रस्तावित है। इसके माध्यम से पात्र समितियों को HR और operational costs के लिए interest-free अथवा soft loan जैसी सहायता Business Development Plan और तय performance milestones से जोड़कर दी जा सकती है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसी सहायता को स्थायी निर्भरता के रूप में नहीं देखा गया है। प्रस्तावित व्यवस्था में सहायता को समय के साथ घटाने और समिति को अपने कारोबार से आत्मनिर्भर बनाने पर जोर है।
PACS के लिए यह बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है?
PACS के सामने आज दो समानांतर बदलाव चल रहे हैं। एक तरफ उनका computerisation हो रहा है और दूसरी तरफ उन्हें पारंपरिक कृषि ऋण के अतिरिक्त नई व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़ने की कोशिश हो रही है। ऐसे में केवल software बदल देना पर्याप्त नहीं होगा। संस्था चलाने वाले लोगों की संख्या, योग्यता, प्रशिक्षण और जवाबदेही भी उसी अनुपात में बदलनी होगी।
Model HR Policy इसी खाली जगह को भरने का प्रयास करती दिखाई देती है। इसकी सबसे अच्छी बात यह है कि कर्मचारी संख्या को मनमाने तरीके से बढ़ाने या घटाने के बजाय कारोबार, काम और वित्तीय क्षमता से जोड़ने की कोशिश की गई है।
हालांकि असली परीक्षा इसके लागू होने के बाद ही होगी। अलग-अलग राज्यों में PACS कर्मचारियों की मौजूदा service conditions, वेतन व्यवस्था और recruitment system अलग हो सकते हैं। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित राज्य इस मॉडल को किस रूप में अपनाते हैं और पुराने कर्मचारियों की सेवा शर्तों के साथ इसका तालमेल किस प्रकार बनाया जाता है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि PACS के डिजिटलीकरण के बाद सरकार का ध्यान अब उसके मानव संसाधन ढांचे को professional और accountable बनाने की तरफ भी बढ़ रहा है। गांव की सहकारी समिति को यदि वास्तव में multi-service economic institution बनना है तो मजबूत software के साथ प्रशिक्षित और पर्याप्त कर्मचारी भी उतने ही जरूरी होंगे।
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