• About Us
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • Privacy Policy
Sahakar Watch
  • Home
  • Haryana
  • India
  • Institutions
    • HAFED
    • NAFED
    • NCUI
    • NCDC
    • NDDB
  • Sectors
    • CM-PACS
    • PACS
    • Procurement
    • Cooperative Banking
    • Dairy Cooperatives
    • Agriculture
  • Law & Policy
  • Analysis
  • Cooperator
    • Education and Training
    • Recruitment
    • Success Stories
    • Tenders
No Result
View All Result
  • Home
  • Haryana
  • India
  • Institutions
    • HAFED
    • NAFED
    • NCUI
    • NCDC
    • NDDB
  • Sectors
    • CM-PACS
    • PACS
    • Procurement
    • Cooperative Banking
    • Dairy Cooperatives
    • Agriculture
  • Law & Policy
  • Analysis
  • Cooperator
    • Education and Training
    • Recruitment
    • Success Stories
    • Tenders
No Result
View All Result
Sahakar Watch
No Result
View All Result

झज्जर सहकारी बैंक निलंबन: चेयरमैन समेत 8 निदेशक बर्खास्त, तीन साल पुराने विवाद की नई कड़ी

Sahakar Watch Desk by Sahakar Watch Desk
September 1, 2026
in Cooperative Banking,Cooperative Law & Policy,Haryana
Reading Time: 2 mins read
0
Jhajhar Central Cooperative Bank News
0
SHARES
1
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

झज्जर सहकारी बैंक निलंबन का बड़ा मामला सामने आया है। झज्जर जिले के सबसे बड़े सहकारी बैंकों में शुमार दी झज्जर केंद्रीय सहकारी बैंक लिमिटेड में तीन साल से चला आ रहा अंदरूनी टकराव अब एक बड़े प्रशासनिक कदम में बदल गया है। रोहतक की उप रजिस्ट्रार (सहकारी समितियां) सरिता राठी ने हरियाणा सहकारी समितियां अधिनियम 1984 की धारा 35(2) का प्रयोग करते हुए बैंक के चेयरमैन जोगेंद्र सिंह, वाइस चेयरमैन राजबीर और छह अन्य निदेशकों को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यानी बैंक के कुल 10 निदेशकों में से 8 एक साथ निलंबित कर दिए गए हैं।

सहकारिता विभाग के अनुसार निलंबन की यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई। इससे पहले 25 अगस्त 2026 को इन निदेशकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। जवाब से संतुष्ट न होने पर 31 अगस्त 2026 को औपचारिक निलंबन आदेश जारी कर दिए गए। दूसरी ओर निलंबित चेयरमैन जोगेंद्र सिंह ने आरोपों को पूरी तरह नकारा है। उन्होंने इस कार्रवाई को एकतरफा और दबाव में लिया गया फैसला बताया है।

यह भीपढ़ें

HAFED का 194Q TDS सर्कुलर: Cooperative Marketing Societies पर विवाद, कारण और वर्तमान स्थिति (2026)

Haryana में Cooperative Society Registration Status Online कैसे Check करें?

Haryana Cooperative Society Share Transfer Online: पूरी प्रक्रिया और Documents

यह झज्जर सहकारी बैंक निलंबन होने का मामला सिर्फ एक बैंक की आंतरिक राजनीति भर नहीं है। इस बैंक से हजारों किसान, PACS और खाताधारक सीधे जुड़े हैं। बोर्ड में गतिरोध का असर कर्ज वितरण, बजट पास होने और विकास कार्यों तक पर पड़ता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि आरोप क्या हैं, कानून क्या कहता है, और यह विवाद यहां तक कैसे पहुंचा।

झज्जर सहकारी बैंक निलंबन: पूरा मामला क्या है

सहकारिता विभाग का कहना है कि बैंक के निदेशकों ने वित्तीय वर्ष की दो अति आवश्यक बैठकों का बहिष्कार किया। ये बैठकें 2 मार्च 2026 और 11 जून 2026 को बुलाई गई थीं। विभाग के अनुसार इस बहिष्कार से नए वित्तीय वर्ष का बजट पास नहीं हो सका। इससे बैंक के विकास कार्य भी प्रभावित हुए। इसके अलावा निदेशकों पर सार्वजनिक रूप से प्रेस वार्ता कर बैंक की आंतरिक गोपनीयता भंग करने का आरोप है। विभाग ने नाबार्ड (NABARD) के नियमों के उल्लंघन का आरोप भी लगाया है।

निलंबित किए गए 8 निदेशकों के नाम इस प्रकार हैं: चेयरमैन जोगेंद्र सिंह, वाइस चेयरमैन राजबीर, राकेश जाखड़, अजीत सिंह, जयबीर, ओम प्रकाश, विनोद कुमार और संतोष। बैंक के बाकी दो निदेशकों को इस कार्रवाई में शामिल नहीं किया गया है। पूर्व चेयरपर्सन नीलम अहलावत और निदेशक राजबीर खाचरौली को कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं हुआ था। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार ये दोनों इस निलंबन कार्रवाई के दायरे से पूरी तरह बाहर हैं।

निलंबित चेयरमैन का पक्ष

निष्पक्षता के लिए दूसरे पक्ष की बात भी जानना जरूरी है। निलंबित चेयरमैन जोगेंद्र सिंह ने विभाग के सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई एकतरफा है और किसी दबाव में की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अभी तक विभाग का नोटिस मिला ही नहीं है। बैठकों के बहिष्कार के आरोप पर उनका जवाब है कि 2 मार्च 2026 की बैठक में पूरा बोर्ड मौजूद था। यानी दोनों पक्षों के बयानों में सीधा विरोधाभास है, जिसका फैसला अब जांच प्रक्रिया या अदालत में ही होगा।

तीन साल से जारी विवाद: पूरी पृष्ठभूमि

दी झज्जर केंद्रीय सहकारी बैंक में यह पहला विवाद नहीं है। स्वतंत्र मीडिया रिपोर्टों के अनुसार बोर्ड में खींचतान का सिलसिला दिसंबर 2021 से चला आ रहा है, जब नीलम अहलावत बैंक की चेयरपर्सन चुनी गई थीं। दिसंबर 2024 में उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। लेकिन जिन चार निदेशकों ने यह प्रस्ताव रखा था, उन्हें ही बैठक से पहले निलंबन का नोटिस थमा दिया गया। मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट के अंतरिम आदेश पर 5 फरवरी 2025 को दोबारा बैठक हुई। इस बार अविश्वास प्रस्ताव 6-3 वोट से पास हो गया और नीलम अहलावत को चेयरपर्सन पद से हटा दिया गया।

विवाद यहीं नहीं थमा। भारतीय सहकारिता क्षेत्र की एक स्वतंत्र समाचार वेबसाइट इंडियन कोऑपरेटिव की रिपोर्ट के अनुसार, इसी बैंक के वाइस चेयरमैन को 19 मई 2026 को भी उप रजिस्ट्रार रोहतक ने धारा 35(2) के तहत जांच लंबित रहने तक निलंबित किया था। उस रिपोर्ट में उनका नाम “राजवीर” लिखा गया है, जो मौजूदा मामले में निलंबित वाइस चेयरमैन राजबीर से मिलता-जुलता प्रतीत होता है, यद्यपि दोनों की पूर्ण रूप से एक ही व्यक्ति होने की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक स्रोतों से नहीं हो पाई है। बहरहाल इतना साफ है कि रोहतक सहकारिता विभाग इस बैंक के बोर्ड पर कार्रवाई कर रहा है।

यहां एक बात साफ कर देना जरूरी है। फरवरी 2025 में नीलम अहलावत को हटाए जाने के बाद बैंक की चेयरमैनी किसके पास आई, इसकी पुष्टि करने वाला कोई स्वतंत्र सार्वजनिक स्रोत उपलब्ध नहीं है। इतना तय है कि 31 अगस्त 2026 के निलंबन आदेश के समय जोगेंद्र सिंह चेयरमैन के पद पर थे।

तारीखघटना
24 दिसंबर 2021नीलम अहलावत बैंक की चेयरपर्सन चुनी गईं
20 दिसंबर 2024अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले 4 निदेशक निलंबित, प्रस्ताव पास नहीं हो सका
5 फरवरी 2025हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश पर दोबारा बैठक, अविश्वास प्रस्ताव 6-3 से पास, अहलावत हटीं
19 मई 2026वाइस चेयरमैन धारा 35(2) के तहत जांच लंबित रहने तक निलंबित (स्वतंत्र रिपोर्ट)
25 अगस्त 2026चेयरमैन व 7 अन्य निदेशकों को कारण बताओ नोटिस जारी
31 अगस्त 2026चेयरमैन समेत 8 निदेशकों के औपचारिक निलंबन आदेश जारी

धारा 35(2) क्या कहती है और उप रजिस्ट्रार को यह अधिकार कहां से मिलता है

हरियाणा सहकारी समितियां अधिनियम 1984 की धारा 35 रजिस्ट्रार को किसी सहकारी समिति या बैंक की प्रबंध समिति के सदस्य को हटाने का अधिकार देती है। यह अधिकार तब इस्तेमाल होता है जब कोई सदस्य बार-बार लापरवाही बरते, कर्तव्यों में चूक करे, या समिति के हित के खिलाफ काम करे। धारा 35(2) इससे एक कदम आगे जाती है। इसके तहत रजिस्ट्रार यह मान सकते हैं कि जांच पूरी होने तक संबंधित सदस्य को पद पर बने रहने देना समिति के हित में नहीं है। ऐसी स्थिति में वे जांच के दौरान ही सदस्य को निलंबित कर सकते हैं। कानून में यह भी प्रावधान है कि अगर सदस्य आखिरकार हटाया नहीं जाता, तो निलंबन की अवधि उसके सामान्य कार्यकाल में गिनी जाएगी, और यह निलंबन अधिकतम छह महीने से ज्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता।

यानी 31 अगस्त 2026 का आदेश खुद में अंतिम फैसला नहीं है। यह जांच पूरी होने तक के लिए एक अस्थायी कदम है। असली फैसला आगे की जांच रिपोर्ट और उसके आधार पर धारा 35(1) के तहत होने वाली कार्रवाई से तय होगा।

नाबार्ड के नियमों के उल्लंघन का आरोप: मतलब क्या है

विभाग ने निदेशकों पर नाबार्ड के नियमों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया है। नाबार्ड यानी नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट, बैंकिंग विनियमन अधिनियम 1949 के तहत राज्य सहकारी बैंकों और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों की निगरानी करता है। नाबार्ड समय-समय पर इन बैंकों का निरीक्षण करता है और पूंजी पर्याप्तता, संपत्ति की गुणवत्ता, प्रबंधन और अनुपालन जैसे मानकों पर परखता है। अगर कोई बैंक लगातार इन मानकों का पालन नहीं करता, तो नाबार्ड की सिफारिश पर आगे सख्त कदम भी उठाए जा सकते हैं। ऐसे में बोर्ड की बैठकें न होना और बजट समय पर पास न होना, सिर्फ आंतरिक प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि नियामकीय अनुपालन का सवाल भी बन जाता है।

यह आंकड़े और तथ्य कहां से आए

पारदर्शिता के लिए यह बताना जरूरी है कि इस झज्जर सहकारी बैंक निलंबन रिपोर्ट के तथ्य कहां से लिए गए हैं। निलंबन की मूल खबर, तारीखें (25 और 31 अगस्त 2026), निदेशकों के नाम, आरोपों का विवरण और चेयरमैन का बयान — ये सभी दैनिक जागरण के झज्जर संस्करण में छपी खबर पर आधारित हैं। उप रजिस्ट्रार सरिता राठी के नाम और पद की पुष्टि करने वाला कोई अलग सार्वजनिक दस्तावेज या सरकारी नोटिफिकेशन ऑनलाइन उपलब्ध नहीं मिला, इसलिए यह जानकारी भी प्रिंट रिपोर्ट पर ही आधारित मानी जाए।

वहीं बैंक की तीन साल पुरानी पृष्ठभूमि — 2021 में अहलावत का चुनाव, दिसंबर 2024 का अविश्वास प्रस्ताव, फरवरी 2025 में हाईकोर्ट के आदेश पर हुई वोटिंग, और मई 2026 का पहला निलंबन — इन सभी की पुष्टि स्वतंत्र समाचार स्रोतों (अमर उजाला और इंडियन कोऑपरेटिव) से होती है, जिनके लिंक स्रोत सूची में नीचे दिए गए हैं। धारा 35 का कानूनी प्रावधान हरियाणा सरकार के सहकारिता विभाग द्वारा प्रकाशित आधिकारिक अधिनियम से लिया गया है। नाबार्ड की भूमिका संबंधी जानकारी नाबार्ड की अपनी वेबसाइट से ली गई है।

यह खबर किनके लिए और क्यों जरूरी है

दी झज्जर केंद्रीय सहकारी बैंक से जिले की दर्जनों प्राथमिक कृषि साख समितियां (PACS) जुड़ी हैं। इन्हीं PACS के जरिए किसानों को खाद-बीज के लिए कर्ज और फसल के लिए ऋण मिलता है। बोर्ड में गतिरोध और बजट पास न होने का सीधा असर इन्हीं PACS और उनसे जुड़े किसानों पर पड़ता है। इसलिए यह खबर सबसे पहले झज्जर जिले के उन किसानों और खाताधारकों के लिए जरूरी है, जिनका पैसा और कर्ज इसी बैंक से होकर गुजरता है।

दूसरे, यह खबर बैंक के कर्मचारियों के लिए भी अहम है, क्योंकि प्रशासनिक अनिश्चितता का असर भर्ती, प्रमोशन और दैनिक कामकाज पर भी पड़ता है। तीसरे, यह प्रदेश की अन्य सहकारी बैंकों के बोर्ड सदस्यों और पदाधिकारियों के लिए भी एक सबक है। यह मामला दिखाता है कि बैठकों का बहिष्कार करना या बजट को अटकाए रखना, कानूनी तौर पर कितना भारी पड़ सकता है। आखिर में, यह उन नीति-विश्लेषकों और पत्रकारों के लिए भी उपयोगी है जो यह समझना चाहते हैं कि सहकारी बैंकों में शासन (गवर्नेंस) से जुड़े विवाद किस तरह प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया से होकर गुजरते हैं।

आगे क्या हो सकता है

कानून के मुताबिक धारा 35(2) का निलंबन अस्थायी है और अधिकतम छह महीने तक ही चल सकता है। इस दौरान सहकारिता विभाग को जांच पूरी करनी होगी। जांच के बाद विभाग के पास दो विकल्प होंगे: या तो आरोप साबित न होने पर निदेशकों को बहाल कर दिया जाए, या फिर धारा 35(1) के तहत स्थायी रूप से हटाने की प्रक्रिया शुरू हो। बैंक के पिछले विवाद में जिस तरह मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा था, उसे देखते हुए यह संभावना भी बनती है कि निलंबित निदेशक इस आदेश को अदालत में चुनौती दें। इस झज्जर सहकारी बैंक निलंबन विवाद में सहकारवॉच आगे की जांच प्रक्रिया और किसी भी अदालती कार्रवाई पर नजर रखेगा।

बैंकिंग और शासन से जुड़े नियमों की बात करें तो हरियाणा में Cooperative Society सरकारी संस्था है या नहीं, इस पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का 2026 का फैसला भी अहम है। यह फैसला बताता है कि अदालतें सहकारी संस्थाओं के आंतरिक मामलों को किस नजरिए से देखती हैं। इसी तरह Cooperative Society के लिए AGM अनिवार्य होने के नियम भी दिखाते हैं कि समय पर बैठकें न होना, कानूनी तौर पर कितनी बड़ी चूक मानी जाती है।

यह विवाद यह भी दिखाता है कि हरियाणा के सहकारी बैंकिंग ढांचे में प्रशासनिक निगरानी कितनी सक्रिय हो चुकी है। यह उसी दौर में हो रहा है जब हरियाणा के सहकारी बैंकों में स्टाफ के खाली पद पहले से ही 90% तक पहुंच चुके हैं। यानी एक तरफ बैंकों में स्टाफ की कमी है, तो दूसरी तरफ बोर्ड स्तर पर भी गतिरोध बना हुआ है। दोनों ही स्थितियां बैंकों के रोजमर्रा के कामकाज और आम खाताधारकों को सीधे प्रभावित करती हैं।

स्रोत सूची

  • मूल खबर, तारीखें, निदेशकों के नाम, आरोप और चेयरमैन का बयान: दैनिक जागरण, झज्जर संस्करण, 31 अगस्त / 1 सितंबर 2026 का प्रिंट संस्करण। यह प्रिंट रिपोर्ट है, इसलिए इसका सीधा ऑनलाइन लिंक उपलब्ध नहीं है।
  • हरियाणा सहकारी समितियां अधिनियम 1984 — आधिकारिक पूर्ण पाठ (धारा 35), भारत सरकार सहकारिता मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध।
  • दिसंबर 2024 का अविश्वास प्रस्ताव और 4 निदेशकों का निलंबन, अमर उजाला, 20 दिसंबर 2024।
  • हाईकोर्ट के आदेश पर वोटिंग, नीलम अहलावत हटीं, अमर उजाला, 5 फरवरी 2025।
  • वाइस चेयरमैन का मई 2026 का पहला निलंबन, इंडियन कोऑपरेटिव, 19 मई 2026।
  • नीलम अहलावत के 2021 में चेयरपर्सन चुने जाने की रिपोर्ट, इंडियन कोऑपरेटिव, 2 जनवरी 2022।
  • नाबार्ड की सहकारी बैंकों पर निगरानी संबंधी भूमिका, नाबार्ड की आधिकारिक वेबसाइट।
  • दी झज्जर केंद्रीय सहकारी बैंक की आधिकारिक वेबसाइट, सामान्य संदर्भ के लिए।

नोट: यह रिपोर्ट पूरी तरह निष्पक्ष रखने की कोशिश की गई है। इसमें सहकारिता विभाग के आरोप और निलंबित चेयरमैन का पक्ष, दोनों को बिना किसी पूर्वाग्रह के दर्ज किया गया है। जो तथ्य केवल प्रिंट रिपोर्ट पर आधारित हैं, उन्हें ऊपर स्रोत सूची में स्पष्ट रूप से बताया गया है।

नई पोस्ट सीधे अपने ईमेल इनबॉक्स में पाने के लिए यहाँ सदस्यता लें।

अपनी सदस्यता की पुष्टि करने के लिए अपने इनबॉक्स या स्पैम फ़ोल्डर की जाँच करें।

Tags: Cooperative GovernanceHaryanaJhajjar Central Cooperative BankRegistrar Cooperative SocietiesState Cooperative Act
Previous Post

हरियाणा के सहकारी बैंकों में खाली पद 90% तक: विधानसभा के जवाब में सामने आई पूरी तस्वीर

Next Post

हरियाणा सहकारिता विभाग की 36 योजनाएं: कौन-सी योजना किसके लिए, कैसे मिलेगी, और अब तक का रिकॉर्ड क्या कहता है

Related Posts

HAFED अनाज खरीद और TDS 194Q — प्रतीकात्मक तस्वीर
Cooperative Law & Policy

HAFED का 194Q TDS सर्कुलर: Cooperative Marketing Societies पर विवाद, कारण और वर्तमान स्थिति (2026)

September 11, 2026
Haryana Cooperative Society Registration Status Check Online
Cooperative Law & Policy

Haryana में Cooperative Society Registration Status Online कैसे Check करें?

September 11, 2026
haryana-cooperative-society-share-transfer-online-process
Cooperative Law & Policy

Haryana Cooperative Society Share Transfer Online: पूरी प्रक्रिया और Documents

September 10, 2026
हरियाणा Cooperative Marketing-cum-Processing Societies के डेटा संबंधी RCS Haryana पत्र की प्रतीकात्मक तस्वीर
Breaking News

हरियाणा की Cooperative Marketing-cum-Processing Societies से मांगा गया अहम डेटा: तीनों प्रोफॉर्मा भरने की पूरी गाइड

September 9, 2026
ARCS Powers Sahakar Watch News
Cooperative Law & Policy

RCS Haryana क्या है? Registrar, DRCS और ARCS के Powers और Online Services

September 9, 2026
Haryana Cooperative Society Registration Documents Checklist 2026 — प्रतीकात्मक तस्वीर
Cooperative Law & Policy

Haryana Cooperative Society Registration Documents Checklist: Form से Bye-laws तक

September 8, 2026
Next Post
haryana-cooperative-schemes-eligibility-application-record

हरियाणा सहकारिता विभाग की 36 योजनाएं: कौन-सी योजना किसके लिए, कैसे मिलेगी, और अब तक का रिकॉर्ड क्या कहता है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

No Result
View All Result

ज़रूर पढ़ें

HAFED अनाज खरीद और TDS 194Q — प्रतीकात्मक तस्वीर

HAFED का 194Q TDS सर्कुलर: Cooperative Marketing Societies पर विवाद, कारण और वर्तमान स्थिति (2026)

September 11, 2026
Haryana Cooperative Society AGM Notice, Agenda and Minutes — प्रतीकात्मक तस्वीर

Haryana Cooperative Society AGM Notice, Agenda & Minutes: Word/PDF Download + पूरी गाइड (2026)

September 11, 2026
Haryana Cooperative Society Registration Status Check Online

Haryana में Cooperative Society Registration Status Online कैसे Check करें?

September 11, 2026
haryana-cooperative-society-share-transfer-online-process

Haryana Cooperative Society Share Transfer Online: पूरी प्रक्रिया और Documents

September 10, 2026
हरियाणा Cooperative Marketing-cum-Processing Societies के डेटा संबंधी RCS Haryana पत्र की प्रतीकात्मक तस्वीर

हरियाणा की Cooperative Marketing-cum-Processing Societies से मांगा गया अहम डेटा: तीनों प्रोफॉर्मा भरने की पूरी गाइड

September 9, 2026

Archives

  • September 2026
  • August 2026
  • July 2026

Categories

  • Agriculture
  • Analysis & Opinion
  • Breaking News
  • CM-PACS
  • Cooperative Banking
  • Cooperative Formats
  • Cooperative Law & Policy
  • Dairy Cooperatives
  • Education and Training
  • Featured
  • HAFED
  • Haryana
  • Haryana
  • Highlights
  • India
  • Marketing Societies
  • NAFED
  • NCDC
  • NCUI
  • NDDB
  • PACS
  • Procurement
  • Recruitment
  • Success Stories
  • Tenders
  • Trending News

About Sahakar Watch

Sahakar Watch भारत के सहकारी क्षेत्र की खबरों, नीतियों, संस्थागत अपडेट, PACS, procurement और तथ्य-आधारित विश्लेषण पर केंद्रित स्वतंत्र डिजिटल प्लेटफॉर्म है।

Cooperative News • Policy • Analysis

Connect With Us

न्यूज़लेटर सब्सक्राइब करें

नई पोस्ट सीधे अपने ईमेल इनबॉक्स में पाने के लिए यहाँ सदस्यता लें।

अपनी सदस्यता की पुष्टि करने के लिए अपने इनबॉक्स या स्पैम फ़ोल्डर की जाँच करें।

Quick Links

  • Haryana
  • India
  • Law & Policy
  • Analysis

Institutions

  • HAFED
  • NAFED
  • NCUI
  • NCDC
  • NDDB
  • About Us
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • Privacy Policy

© 2026 Sahakar Watch. सर्वाधिकार सुरक्षित।

No Result
View All Result
  • Home
  • Haryana
  • India
  • Institutions
    • HAFED
    • NAFED
    • NCUI
    • NCDC
    • NDDB
  • Sectors
    • CM-PACS
    • PACS
    • Procurement
    • Cooperative Banking
    • Dairy Cooperatives
    • Agriculture
  • Law & Policy
  • Analysis
  • Cooperator
    • Education and Training
    • Recruitment
    • Success Stories
    • Tenders

© 2026 Sahakar Watch. सर्वाधिकार सुरक्षित।