पंचकूला की एक सहकारी ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी ने अपने ही एक सदस्य को RTI के तहत मांगी गई जनरल बॉडी मीटिंग की पूरी वीडियोग्राफी देने से मना कर दिया — तर्क यह था कि सोसाइटी खुद कोई “पब्लिक अथॉरिटी” नहीं है, इसलिए RTI एक्ट उस पर लागू ही नहीं होता। हरियाणा स्टेट इंफॉर्मेशन कमीशन (SIC) ने इस दलील को खारिज करते हुए एक बेहद व्यावहारिक और दूरगामी असर वाला सिद्धांत तय किया: सवाल यह नहीं कि सोसाइटी खुद पब्लिक अथॉरिटी है या नहीं — सवाल यह है कि क्या वह जानकारी रजिस्ट्रार, कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ की पहुंच में है। अगर हां, तो सोसाइटी उसे RTI के तहत देने से इनकार नहीं कर सकती।
यह फैसला हरियाणा की हज़ारों सहकारी ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों, हाउस बिल्डिंग सोसाइटियों और आम सदस्यों के लिए सीधा असर रखता है — खासकर उन मामलों में जहां प्रबंध समिति मीटिंग मिनट्स, ऑडिट रिपोर्ट या वीडियो रिकॉर्डिंग जैसी जानकारी देने से बचती है। यह लेख इस फैसले के तथ्यों, कानूनी आधार और व्यावहारिक असर को विस्तार से समझाता है।
एक नजर में
- मामला: New Haryana Officers Cooperative Group Housing Society Ltd., पंचकूला — RTI विवाद
- आवेदक: कुलदीप जैन, रिटायर्ड डिस्ट्रिक्ट एंड सेशन जज, हरियाणा मानवाधिकार आयोग के सदस्य
- मांगी गई जानकारी: 8 जुलाई 2023 की जनरल बॉडी मीटिंग की पूरी (unedited) वीडियोग्राफी और मिनट्स
- सोसाइटी का तर्क: सोसाइटी को कोई सरकारी सहायता नहीं मिलती, इसलिए वह “पब्लिक अथॉरिटी” नहीं है और RTI एक्ट लागू नहीं होता
- आयोग का फैसला: यह सवाल गौण है कि सोसाइटी पब्लिक अथॉरिटी है या नहीं — असली सवाल यह है कि क्या रजिस्ट्रार, कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ को यह जानकारी मांगने/देखने का कानूनी अधिकार है
- कानूनी आधार: RTI Act की Section 2(f) — किसी प्राइवेट बॉडी की वह जानकारी भी “सूचना” मानी जाएगी, जो किसी अन्य कानून के तहत किसी पब्लिक अथॉरिटी की पहुंच में है
- नतीजा: सोसाइटी को जानकारी देने का निर्देश; न देने पर रजिस्ट्रार, हरियाणा सहकारी समिति अधिनियम के तहत कार्रवाई कर सकता है
- सहयोगी मिसाल: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भी सरस्वती कुंज कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी के मामले में इसी तरह के आयोग के आदेश को बरकरार रखा
पूरा मामला क्या है
पंचकूला की New Haryana Officers Cooperative Group Housing Society Ltd. में 5 सितंबर 2023 को सदस्य कुलदीप जैन ने RTI आवेदन देकर 8 जुलाई 2023 की जनरल बॉडी मीटिंग की पूरी, बिना काटी-छांटी वीडियोग्राफी और मीटिंग के मिनट्स मांगे। सोसाइटी ने मिनट्स तो दे दिए, लेकिन वीडियोग्राफी देने से इनकार कर दिया — यह कहते हुए कि यह सोसाइटी की “प्रोपराइटरी” जानकारी है और सोसाइटी खुद RTI Act के तहत “पब्लिक अथॉरिटी” नहीं है क्योंकि उसे कोई सरकारी सहायता/अनुदान नहीं मिलता।
मामला हरियाणा स्टेट इंफॉर्मेशन कमीशन में पहुंचा, जहां इंफॉर्मेशन कमिश्नर डॉ. अजय कुमार सुरा ने सुनवाई की। कमीशन ने पाया कि रजिस्ट्रार, कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ ने पहले ही 7 अगस्त 2023 के एक पत्र के ज़रिए सोसाइटी को पूरी वीडियोग्राफी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था — यानी रजिस्ट्रार के पास इस जानकारी तक पहुंचने का वैधानिक (statutory) अधिकार पहले से मौजूद था।
समयरेखा
| तारीख | घटना |
|---|---|
| 8 जुलाई 2023 | सोसाइटी की जनरल बॉडी मीटिंग हुई |
| 5 सितंबर 2023 | कुलदीप जैन ने RTI आवेदन देकर वीडियोग्राफी और मिनट्स मांगे |
| 7 अगस्त 2023 | रजिस्ट्रार, कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ ने सोसाइटी को वीडियोग्राफी देने का पत्र लिखा |
| सोसाइटी का जवाब | मिनट्स दिए, वीडियोग्राफी देने से इनकार — खुद को “पब्लिक अथॉरिटी” न मानते हुए |
| 9 जनवरी 2025 | हरियाणा SIC का पहला आदेश |
| 8 अक्टूबर 2025 | हरियाणा SIC का अंतिम/पूरक आदेश — सोसाइटी को जानकारी देने का निर्देश |
कानूनी आधार: RTI Act की Section 2(f) क्या कहती है
पूरे फैसले की बुनियाद RTI Act, 2005 की Section 2(f) है, जो “सूचना” (information) को परिभाषित करती है। इसका वह हिस्सा जो इस मामले में सबसे अहम है:
“information relating to any private body which can be accessed by a public authority under any other law for the time being in force”
यानी — अगर किसी प्राइवेट संस्था (जैसे एक सहकारी सोसाइटी) से जुड़ी कोई जानकारी किसी और कानून के तहत किसी सरकारी/पब्लिक अथॉरिटी (जैसे रजिस्ट्रार, कोऑपरेटिव सोसाइटीज़) की पहुंच में है, तो वह जानकारी भी RTI Act के दायरे में आ जाती है — भले ही वह प्राइवेट संस्था खुद “पब्लिक अथॉरिटी” (Section 2(h)) न हो।
कमीशन के आदेश का सार इस तरह है:
“Once the respondent public authority (Registrar, Co-operative Societies) has the legal authority to access the information from the society, the same cannot be denied to the appellant merely on the ground that the society is not a public authority.”
सीधे शब्दों में: सोसाइटी खुद RTI के दायरे में है या नहीं, यह सवाल गौण हो जाता है, अगर रजिस्ट्रार के पास उस जानकारी को मांगने/देखने का वैधानिक अधिकार है।
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का समर्थन: सरस्वती कुंज केस
यह अकेला मामला नहीं है। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने भी सरस्वती कुंज कोऑपरेटिव हाउस बिल्डिंग सोसाइटी, गुरुग्राम बनाम हरियाणा स्टेट इंफॉर्मेशन कमीशन के मामले में जस्टिस कुलदीप तिवारी की बेंच ने एक ऐसे ही आयोग के आदेश (28 फरवरी और 3 मई 2024) को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने RTI Act की Section 8 के प्रोविज़न पर भरोसा जताया, जो कहता है:
“the information which cannot be denied to the Parliament or a State Legislature shall not be denied to any person”
यानी जो जानकारी संसद या विधानसभा को नहीं रोकी जा सकती, वह किसी आम नागरिक को भी नहीं रोकी जा सकती। कोर्ट ने माना कि रजिस्ट्रार, कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ जैसी पर्यवेक्षी संस्था के पास सोसाइटी पर वैधानिक निगरानी का अधिकार होने से ही यह जानकारी RTI के दायरे में आ जाती है। स्पष्टीकरण ज़रूरी है: सरस्वती कुंज केस में एक रिपोर्ट में Haryana Registration and Regulation of Societies Act, 2012 की धारा 83 का भी ज़िक्र मिलता है, लेकिन मूल कोर्ट रिकॉर्ड तक सीधी पहुंच न होने के कारण इस विशिष्ट धारा-संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी — इसलिए इसे यहां सावधानी के साथ, अपुष्ट (unverified) के तौर पर दर्ज किया जा रहा है। इस केस में सोसाइटी सहकारी ढांचे (Cooperative House Building Society, Inspector of Co-operative Societies की निगरानी में) की है, इसलिए मूल तर्क वही रजिस्ट्रार-पहुंच वाला सिद्धांत है जो New Haryana Officers GHS मामले में लागू हुआ।
यह फैसला हरियाणा की अन्य सहकारी संस्थाओं के लिए क्यों मायने रखता है
यह सिद्धांत सिर्फ हाउसिंग सोसाइटियों तक सीमित नहीं है। Haryana Co-operative Societies Act, 1984 के तहत रजिस्ट्रार को हर तरह की सहकारी संस्था — PACS, दुग्ध समिति, मार्केटिंग सोसाइटी, हाउसिंग सोसाइटी — पर पर्याप्त निगरानी और रिकॉर्ड-मांगने का अधिकार है (जैसे ऑडिट से जुड़े प्रावधान)। इसका मतलब है कि यही तर्क, सैद्धांतिक रूप से, किसी भी सहकारी संस्था की उस जानकारी पर लागू हो सकता है जो रजिस्ट्रार की पहुंच में है — चाहे वह सोसाइटी खुद RTI Act के तहत “पब्लिक अथॉरिटी” हो या न हो।
यह इस बात से भी जुड़ता है कि सहकारी समितियों को Article 12 के तहत “State” माना जाए या नहीं, इस पर अलग से एक विस्तृत लेख पहले से मौजूद है — वहां बताया गया था कि सोसाइटी को “State” न मानने से Article 226 की रिट-याचिका का रास्ता सीमित हो सकता है। यहां दिलचस्प बात यह है कि RTI के मामले में कोर्ट/आयोग ने एक अलग, ज़्यादा व्यावहारिक रास्ता अपनाया — सोसाइटी को खुद पब्लिक अथॉरिटी साबित करने की ज़रूरत नहीं, बस यह दिखाना काफी है कि जानकारी रजिस्ट्रार की पहुंच में है। यानी सदस्यों के लिए RTI का रास्ता, Article 226 रिट से अक्सर आसान और सीधा साबित हो सकता है।
यह भी ध्यान देने लायक है कि सहकारी क्षेत्र में कर्मचारी/नियुक्ति विवादों पर हाल ही में आया Gaurav Mehla v. State of Haryana सुप्रीम कोर्ट फैसला और यह RTI फैसला — दोनों मिलकर एक बड़ा रुझान दिखाते हैं: अदालतें और आयोग सहकारी समितियों की आंतरिक प्रक्रियाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता को लगातार मज़बूत कर रहे हैं, चाहे वह भर्ती हो या रिकॉर्ड्स तक पहुंच।
किसके लिए इसका क्या मतलब है
सोसाइटी के सदस्य
अगर आपकी हाउसिंग/कोऑपरेटिव सोसाइटी मीटिंग मिनट्स, ऑडिट रिपोर्ट, वीडियोग्राफी या ऐसी ही कोई जानकारी देने से सिर्फ यह कहकर मना करती है कि “हम पब्लिक अथॉरिटी नहीं हैं”, तो आप यह जांच सकते हैं कि क्या रजिस्ट्रार, कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ के पास वह जानकारी मांगने/देखने का अधिकार है। अगर हां, तो RTI आवेदन सीधे रजिस्ट्रार के दफ्तर को भी भेजा जा सकता है।
सोसाइटी की प्रबंध समिति
सिर्फ यह मान लेना कि “हमें कोई सरकारी सहायता नहीं मिलती, इसलिए RTI लागू नहीं होता” — अब कानूनी तौर पर पर्याप्त बचाव नहीं है। बेहतर है कि सोसाइटी अपने रिकॉर्ड-रखरखाव और सूचना-साझाकरण की प्रक्रिया को RTI Act की इस व्याख्या के अनुसार व्यवस्थित करे।
रजिस्ट्रार/सहायक रजिस्ट्रार कार्यालय
इस फैसले से रजिस्ट्रार कार्यालयों पर भी एक जवाबदेही आती है — अगर वे किसी सोसाइटी से जानकारी मांगने का अधिकार रखते हैं, तो सदस्यों के RTI आवेदनों पर भी उसी आधार पर जवाब देना होगा।
अभी क्या करना चाहिए
- अगर आपकी सोसाइटी जानकारी देने से इनकार करे, तो पहले यह जांचें कि क्या रजिस्ट्रार, कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ के पास वह जानकारी मांगने का वैधानिक अधिकार है (जैसे ऑडिट, निरीक्षण से जुड़े प्रावधान)।
- RTI आवेदन सीधे सोसाइटी के बजाय, या उसके साथ-साथ, संबंधित रजिस्ट्रार/सहायक रजिस्ट्रार कार्यालय को भी भेजा जा सकता है।
- यह लेख कानूनी सलाह नहीं है — किसी विशिष्ट RTI विवाद के लिए मूल आदेश और किसी योग्य वकील की सलाह ज़रूर लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. क्या हरियाणा में सभी सहकारी हाउसिंग सोसाइटी RTI के दायरे में आती हैं? सीधे तौर पर नहीं — ज़्यादातर सोसाइटियां खुद “पब्लिक अथॉरिटी” नहीं हैं। लेकिन अगर कोई जानकारी रजिस्ट्रार, कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ की पहुंच में है, तो वह जानकारी RTI Act की Section 2(f) के तहत मांगी जा सकती है।
2. सोसाइटी अगर जानकारी न दे तो सदस्य क्या करे? सदस्य हरियाणा स्टेट इंफॉर्मेशन कमीशन में अपील कर सकता है, या रजिस्ट्रार के दफ्तर को सीधे RTI आवेदन दे सकता है, अगर जानकारी उनकी पहुंच में है।
3. क्या सोसाइटी पर कोई कार्रवाई हो सकती है? हां — कमीशन के अनुसार, अगर सोसाइटी निर्देश के बावजूद जानकारी नहीं देती, तो रजिस्ट्रार हरियाणा सहकारी समिति अधिनियम के तहत कार्रवाई कर सकता है।
4. क्या यह फैसला सिर्फ हाउसिंग सोसाइटी पर लागू होता है? मूल मामला हाउसिंग सोसाइटी का है, लेकिन इसका सिद्धांत — रजिस्ट्रार-पहुंच वाला टेस्ट — किसी भी सहकारी संस्था पर लागू हो सकता है, जहां रजिस्ट्रार को कानूनी तौर पर रिकॉर्ड मांगने का अधिकार हो।
5. क्या सारी जानकारी बिना शर्त देनी होगी? नहीं। RTI Act की Section 8 के तहत कुछ अपवाद (जैसे निजता से जुड़ी जानकारी) अब भी लागू होते हैं — यह फैसला सिर्फ “सोसाइटी पब्लिक अथॉरिटी नहीं है” वाले तर्क को खारिज करता है, हर तरह की जानकारी को अनिवार्य नहीं बनाता।
6. रजिस्ट्रार को यह अधिकार कहां से मिलता है? हरियाणा में सहकारी समितियों पर रजिस्ट्रार, कोऑपरेटिव सोसाइटीज़ का वैधानिक निगरानी अधिकार Haryana Co-operative Societies Act, 1984 से आता है।
निष्कर्ष
हरियाणा SIC और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट, दोनों ने मिलकर एक स्पष्ट सिद्धांत तय किया है: सहकारी सोसाइटी सिर्फ यह कहकर पारदर्शिता से बच नहीं सकती कि वह खुद “पब्लिक अथॉरिटी” नहीं है — अगर संबंधित रजिस्ट्रार के पास उस जानकारी तक पहुंचने का वैधानिक अधिकार है, तो वह जानकारी RTI के दायरे में आ जाती है। हरियाणा की हज़ारों सहकारी संस्थाओं के सदस्यों के लिए यह एक व्यावहारिक और इस्तेमाल में आसान रास्ता खोलता है।
यह लेख उपलब्ध समाचार रिपोर्ट्स, आधिकारिक कानून के मूल पाठ और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित सामान्य जानकारी/विश्लेषण है। किसी विशेष RTI आवेदन या कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित मूल आदेश/नियम और योग्य पेशेवर सलाह देखी जानी चाहिए।
स्रोत एवं संदर्भ
- The Tribune — Group housing societies must share records under RTI if Registrar can access them: Haryana SIC
- The Tribune — Can cooperative housing societies refuse RTI queries? Haryana SIC answers
- Right to Information Act, 2005 — आधिकारिक पूर्ण पाठ, CIC.gov.in
- Torbit Realty — Punjab & Haryana High Court rules private cooperative society information accessible under RTI
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