भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने 2 सितंबर 2026 को एक छोटा लेकिन तकनीकी रूप से अहम संशोधन जारी किया है, जो सीधे Urban Co-operative Banks (UCBs) के निवेश दायरे से जुड़ा है। RBI (Urban Co-operative Banks – Classification, Valuation and Operation of Investment Portfolio) Second Amendment Directions, 2026 के ज़रिए UCBs को अब Indian Digital Payment Intelligence Corporation यानी IDPIC की सदस्यता हासिल करने के मकसद से उसके equity shares खरीदने की अनुमति मिल गई है।
यह संशोधन 28 नवंबर 2025 को जारी हुई मूल RBI (Urban Co-operative Banks – Classification, Valuation and Operation of Investment Portfolio) Directions, 2025 के अध्याय VIII में बदलाव करता है, जो non-SLR निवेश से जुड़े नियम तय करता है। इस रिपोर्ट में हम समझते हैं कि यह बदलाव असल में है क्या, IDPIC किस लिए बना है, यह किन सहकारी संस्थाओं पर लागू होता है और UCBs को आगे क्या करना चाहिए।
IDPIC क्या है और यह क्यों बनाया गया
Indian Digital Payment Intelligence Corporation (IDPIC) असल में एक नई संस्था है, जिसे डिजिटल पेमेंट फ्रॉड को रियल-टाइम में पकड़ने और रोकने के मकसद से बनाया गया है। यह Companies Act, 2013 के तहत रजिस्टर्ड एक not-for-profit Section 8 कंपनी है।
इसकी शुरुआत अक्टूबर 2025 में State Bank of India (SBI) और Bank of Baroda (BoB) की अगुवाई में हुई, जिसमें बाकी सभी 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSBs) का भी समर्थन शामिल है। SBI और BoB ने शुरुआती सीड फंडिंग के तौर पर 10-10 करोड़ रुपये डाले, जबकि IDPIC की अधिकृत पूंजी (authorised capital) 500 करोड़ रुपये और चुकता पूंजी (paid-up capital) 200 करोड़ रुपये तय की गई है।
IDPIC का काम बैंकों, NPCI, कार्ड नेटवर्क, पेमेंट एग्रीगेटर्स और फिनटेक प्लेटफॉर्म से फ्रॉड से जुड़े सिग्नल इकट्ठा करना, Enhanced Early Warning Systems के ज़रिए ट्रांजैक्शन की लगातार निगरानी करना, हर लेनदेन के लिए तुरंत रिस्क स्कोर देना (एक साझा API के ज़रिए), और mule accounts यानी फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले खातों के नेटवर्क को ट्रैक करना है। इसके मॉडल करीब 13 महीने के anonymised लेनदेन डेटा पर ट्रेन किए गए हैं। यानी यह एक तरह का साझा, बैंकिंग सेक्टर-व्यापी फ्रॉड-इंटेलिजेंस ढांचा है, जिससे हर बैंक अलग-अलग अपना सिस्टम बनाने के बजाय एक साझा नेटवर्क का हिस्सा बन सकता है।
RBI के संशोधन में ठीक-ठीक क्या बदला
RBI की मूल Directions, 2025 के पैरा 101(5) और पैरा 107(1) में non-SLR निवेश के तहत किन संस्थाओं के equity shares UCBs खरीद सकती हैं, इसकी सूची दी गई थी। इस Second Amendment के बाद अब यह सूची इस तरह पढ़ी जाएगी:
पैरा 101(5): “Equity shares of Umbrella Organization (UO) of UCB sector and Indian Digital Payment Intelligence Corporation (IDPIC) for acquiring membership”
पैरा 107(1): “Equity shares of Market Infrastructure Companies (MICs), Umbrella Organization (UO) of UCB Sector, IDPIC, and CCBs / StCBs, if it becomes necessary to do so for acquiring membership of these entities”
सीधे शब्दों में कहें तो, RBI ने IDPIC को उन गिनी-चुनी संस्थाओं की सूची में शामिल कर दिया है, जिनकी सदस्यता के लिए UCBs को उनके equity shares खरीदने की छूट पहले से मिली हुई थी — जैसे UCB Sector का Umbrella Organisation, Market Infrastructure Companies, और CCBs/StCBs (District Central Cooperative Banks/State Cooperative Banks)। यह अधिसूचना RBI/2026-27/249, संदर्भ संख्या DOR.MRG.REC.No.217/00-00-011/2026-27 के तहत जारी हुई और जारी होने की तारीख यानी 2 सितंबर 2026 से ही प्रभावी है — इसके लिए कोई अलग transitional deadline नहीं दी गई है।
इसका मतलब क्या है — और क्या नहीं
यह समझना ज़रूरी है कि यह संशोधन सिर्फ एक अनुमति (permission) है, अनिवार्यता (mandate) नहीं। RBI ने केवल यह साफ किया है कि अगर किसी UCB को IDPIC की सदस्यता चाहिए और उसके लिए equity shares खरीदना ज़रूरी शर्त है, तो वह निवेश करने के लिए स्वतंत्र है — बशर्ते वह अपनी Board-approved Investment Policy के दायरे में रहकर ऐसा करे।
यानी यह संशोधन खुद अपने-आप किसी UCB को IDPIC की सदस्यता नहीं दिला देता, न ही यह किसी बैंक को IDPIC से जुड़ने के लिए बाध्य करता है। यह सिर्फ उस रास्ते की एक कानूनी अड़चन हटाता है, जो RBI के निवेश-संबंधी नियमों के तहत पहले मौजूद थी।
यह किन पर लागू होता है — और किन पर नहीं
यह दिशा-निर्देश सीधे तौर पर भारत के Urban Co-operative Banks पर लागू होता है। सामान्य Primary Agricultural Credit Societies (PACS), Marketing Societies, या किसी भी non-banking cooperative society पर यह सीधे तौर पर लागू नहीं होता — क्योंकि यह पूरी तरह RBI के बैंकिंग-निवेश ढांचे (investment portfolio directions) से जुड़ा प्रावधान है, न कि सहकारी समितियों के सामान्य कामकाज से जुड़ा नियम।
इसका सीधा असर हरियाणा या किसी अन्य राज्य की PACS, HARCO Bank, DCCB या Marketing Societies पर नहीं पड़ता, जब तक कि वे खुद Urban Co-operative Bank के रूप में रजिस्टर्ड न हों। हालांकि, अगर आगे चलकर इन बैंकों को digital-fraud monitoring जैसी IDPIC की सेवाएं मिलनी शुरू होती हैं, तो उसका दूरगामी असर आम ग्राहकों और सहकारी बैंकिंग नेटवर्क से जुड़े दूसरे संस्थानों तक भी पहुंच सकता है — भले ही वह सीधा नियामकीय दायरा न हो।
UCBs को अब क्या करना चाहिए
जो UCBs IDPIC की सदस्यता लेने पर विचार कर रही हैं, उनके लिए व्यावहारिक तौर पर कुछ कदम ज़रूरी हैं। सबसे पहले, अपनी Board-approved Investment Policy और permitted non-SLR investments की सूची को अपडेट करना होगा, ताकि उसमें IDPIC की equity को स्पष्ट रूप से शामिल किया जा सके। इसके बाद सदस्यता लेने से पहले बोर्ड-स्तर की मंज़ूरी, निवेश की valuation, सही accounting classification (non-SLR निवेश के तहत), और exposure-register में इसकी documentation पूरी करनी होगी — ताकि भविष्य में किसी ऑडिट या निरीक्षण में यह निवेश RBI के नियमों के अनुरूप साबित हो सके।
जिन सहकारी संस्थाओं पर यह दिशा-निर्देश सीधे लागू नहीं होता — जैसे सामान्य PACS या Marketing Societies — उन्हें अपने निवेश ढांचे में कोई बदलाव करने की ज़रूरत नहीं है। लेकिन अगर आगे चलकर उन्हें अपने बैंकिंग पार्टनर (जैसे DCCB या HARCO Bank) के ज़रिए किसी तरह की digital-fraud monitoring सुविधा मिलती है, तो उसका operational इस्तेमाल समझना अलग विषय होगा, न कि निवेश से जुड़ा फैसला।
बड़ी तस्वीर: सहकारी बैंकिंग और डिजिटल फ्रॉड
यह संशोधन एक बड़े रुझान का हिस्सा है, जहां सहकारी बैंकिंग सेक्टर को धीरे-धीरे बड़े बैंकों जैसे तकनीकी और सुरक्षा ढांचे से जोड़ा जा रहा है। हमने इससे पहले भी देखा है कि किस तरह NUCFDC का ‘Bank in a Box’ मॉडल छोटे Urban Cooperative Banks को बड़ी बैंकों जैसी टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा सुविधाएं देने की कोशिश कर रहा है, और NCUI द्वारा शुरू किया गया साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण सहकारी बैंकों में बढ़ते घोटालों को रोकने की दिशा में एक कदम था। IDPIC को लेकर यह ताज़ा संशोधन उसी कड़ी में एक और अहम पड़ाव है — भले ही अभी इसका दायरा सिर्फ Urban Co-operative Banks तक सीमित हो।
एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
| RBI Notification | RBI/2026-27/249, DOR.MRG.REC.No.217/00-00-011/2026-27 |
| जारी होने की तारीख | 2 सितंबर 2026 |
| प्रभावी तिथि | 2 सितंबर 2026 (तुरंत, कोई transitional deadline नहीं) |
| संशोधित मूल Directions | UCB Investment Portfolio Directions, 2025 (28 नवंबर 2025) |
| संशोधित पैराग्राफ | पैरा 101(5) और पैरा 107(1) |
| मुख्य बदलाव | IDPIC को membership-हेतु permitted non-SLR equity investment की सूची में जोड़ा गया |
| किन पर लागू | केवल Urban Co-operative Banks (UCBs) |
| किन पर लागू नहीं | PACS, Marketing Societies, अन्य non-banking cooperative societies |
आगे क्या
फिलहाल यह सिर्फ एक अनुमति है, अनिवार्यता नहीं। असली तस्वीर तब साफ होगी जब कोई UCB वाकई IDPIC की सदस्यता के लिए आवेदन करेगी और उसकी equity खरीदेगी। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कितने UCBs इस रास्ते को अपनाते हैं, और क्या RBI आगे चलकर सहकारी बैंकिंग के दूसरे स्तरों — जैसे DCCB या StCB — के लिए भी digital fraud intelligence से जुड़े ऐसे ही कदम उठाता है।
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स्रोत एवं संदर्भ
प्राथमिक स्रोत (Primary):
- RBI, RBI (Urban Co-operative Banks – Classification, Valuation and Operation of Investment Portfolio) Second Amendment Directions, 2026 — RBI/2026-27/249, dated 2 September 2026
द्वितीयक स्रोत (Secondary):
- IDPIC आधिकारिक वेबसाइट, idpic.in
- Indian Cooperative, RBI widens investment framework for UCBs
- AffairsCloud, SBI and BoB to Establish IDPIC for Real-Time Fraud Detection












