पंचकूला में 5 जुलाई को एक राज्य-स्तरीय समारोह हुआ। मौका था अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस का, और मंच से हरियाणा के सहकारिता, विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष (International Year of Cooperatives 2025) का लोगो जारी किया। इसी कार्यक्रम में उन्होंने कई बड़ी घोषणाएं भी कीं — नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति जल्द आने की बात, हार्को बैंक का नया प्लेटिनम डेबिट कार्ड, गन्ना किसानों के लिए हार्वेस्टिंग मशीन पर कर्ज़, और CM-PACS को लेकर एक बड़ा लक्ष्य। हरियाणा सरकार के सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में यह पूरा ब्यौरा दर्ज है। यह खबर करीब एक साल पुरानी है, लेकिन इसमें जो वादे और आंकड़े दिए गए थे, वे आज भी प्रासंगिक हैं — क्योंकि किसी भी सरकारी घोषणा की असली परीक्षा यह होती है कि उसके बाद ज़मीन पर क्या बदला। और जब हम हरियाणा के अपने ताज़ा बजट दस्तावेज़ों को देखते हैं, तो तस्वीर उतनी चमकदार नहीं दिखती जितनी उस दिन के भाषणों में लग रही थी।
पंचकूला में क्या-क्या घोषणा हुई थी
डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में अब सहकारी समितियों के ज़रिए सिर्फ खाद-बीज और कर्ज़ ही नहीं, बल्कि जन औषधि केंद्र, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), पेट्रोल पंप जैसे करीब 25 तरह के काम किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की बजट घोषणा के तहत राज्य में 500 CM-PACS बनाने का लक्ष्य रखा गया है, और उस समय तक 141 CM-PACS बन चुकी थीं। PACS के ज़रिए छोटे गोदाम बनाने की भी बात हुई, ताकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत राशन आपूर्ति में मदद मिल सके। इसके अलावा गन्ना किसानों की कटाई के दौरान आने वाली दिक्कत दूर करने के लिए हार्को बैंक की PACS शाखाओं के ज़रिए युवाओं और किसानों को हार्वेस्टिंग मशीन खरीदने के लिए कर्ज़ देने की घोषणा हुई, ताकि वे इन मशीनों का व्यावसायिक इस्तेमाल कर आत्मनिर्भर बन सकें। डेयरी फेडरेशन के ज़रिए CM-PACS के सदस्यों को वीटा बूथ आवंटन में भी मौका देने की बात कही गई, साथ ही वीटा बूथों के आधुनिकीकरण की भी घोषणा हुई ताकि वहां वीटा और हैफेड दोनों के उत्पाद उपलब्ध हो सकें। उसी दिन हार्को बैंक का प्लेटिनम डेबिट कार्ड भी लॉन्च हुआ — ₹5 लाख तक की सीमा वाला यह कार्ड देश भर के एयरपोर्ट लाउंज में भी इस्तेमाल हो सकता है। फरीदाबाद और महेंद्रगढ़ जिलों के अधिकारियों को उनकी 100% PACS कंप्यूटरीकरण उपलब्धि के लिए सम्मानित भी किया गया, और चार पात्र लाभार्थियों को वीटा बूथ आवंटन पत्र सौंपे गए।
यह अकेला कार्यक्रम नहीं था
यह घोषणाएं किसी अलग-थलग कार्यक्रम का हिस्सा नहीं थीं, बल्कि एक बड़े राष्ट्रीय अभियान से जुड़ी थीं। संयुक्त राष्ट्र ने 2025 को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया था, और केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मुंबई में इसका औपचारिक शुभारंभ किया था। इसके पीछे केंद्र सरकार की एक बड़ी योजना भी है — फरवरी 2023 में शुरू हुई पांच साल की योजना के तहत देश भर की हर पंचायत में मल्टीपरपज PACS, डेयरी और मत्स्य सहकारी समितियां बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसका कुल आंकड़ा 2 लाख नई समितियों का है। सहकारिता मंत्रालय की जानकारी के मुताबिक 4 जून 2026 तक देश भर में 37,454 नई समितियां पंजीकृत हो चुकी थीं और 21,292 डेयरी व मत्स्य समितियों को मजबूत किया जा चुका था। यहां एक साधारण गणित लायक बात है। योजना फरवरी 2023 में शुरू हुई और पांच साल यानी 2028 तक चलनी है। जून 2026 तक करीब साढ़े तीन साल, यानी योजना का लगभग दो-तिहाई समय बीत चुका था, लेकिन लक्ष्य का सिर्फ करीब 19% ही पूरा हो पाया था। अधिकारियों का कहना है कि तय समयसीमा में या उससे पहले काम पूरा हो जाएगा, लेकिन सिर्फ आंकड़ों को देखें तो रफ्तार और लक्ष्य के बीच फासला साफ दिखता है। हरियाणा का 500 CM-PACS वाला लक्ष्य भी इसी बड़े राष्ट्रीय अभियान की एक राज्य-स्तरीय कड़ी है।
वादों का अगला अध्याय: दिसंबर 2025 का सम्मेलन
पंचकूला में ही दिसंबर 2025 में KRIBHCO के एक बड़े सहकारी सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने वर्चुअल माध्यम से भिवानी जिले के सालमपुर गांव में करीब ₹3.30 करोड़ की लागत से बने वीटा मिल्क चिलिंग सेंटर का उद्घाटन किया, जिसका सीधा फायदा आसपास के 100 गांवों के पशुपालकों को मिलना है। इसी मौके पर रेवाड़ी जिले के जतुसाना में हैफेड आटा मिल का भी उद्घाटन हुआ, और किसानों को और प्लेटिनम डेबिट कार्ड बांटे गए। इसी सम्मेलन में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक और बड़ा ऐलान किया — “सहकार से समृद्धि” योजना के तहत PACS को सहकारी बैंकों के ज़रिए ₹15 लाख तक का कर्ज़ शून्य प्रतिशत ब्याज पर मिलेगा, और समय पर भुगतान करने वाली PACS को 10% ब्याज छूट भी दी जाएगी। यानी जुलाई 2025 के वादों को आगे बढ़ाते हुए दिसंबर 2025 में और नई घोषणाएं जोड़ी गईं।
अब असली सवाल: आंकड़े क्या कहते हैं
यहीं से कहानी का वह हिस्सा शुरू होता है जो किसी उद्घाटन समारोह की तस्वीरों में नज़र नहीं आता। हरियाणा सरकार के अपने 2026-27 के बजट दस्तावेज़ों के विश्लेषण के मुताबिक, राज्य की कुल 804 प्राइमरी एग्रीकल्चरल क्रेडिट सोसाइटी (PACS) में से सिर्फ 33 ही मुनाफे में हैं। यानी करीब 96% PACS या तो घाटे में हैं या मुश्किल से टिकी हुई हैं। सरकार ने खुद बजट में लक्ष्य रखा है कि कारोबार में विविधता लाकर — जिसमें पेट्रोल पंप खोलना भी शामिल है — 300 PACS को मुनाफे में लाया जाए, और इन्हीं समितियों के ज़रिए करीब ₹4,000 करोड़ के सरकारी कामकाज कराए जाएं। यह आंकड़ा उन घोषणाओं के ठीक उलट तस्वीर पेश करता है जो प्लेटिनम कार्ड, वीटा बूथ और नई सहकारी नीति की चर्चा में सामने आती हैं। सवाल यह नहीं है कि ये पहलें गलत हैं — बल्कि यह है कि जिस बुनियाद पर ये नई सुविधाएं खड़ी की जा रही हैं, वह बुनियाद खुद कितनी मजबूत है। अगर 804 में से महज 33 समितियां आर्थिक रूप से टिकाऊ हैं, तो सवाल उठता है कि नई गतिविधियां — गैस स्टेशन हों या डिजिटल बैंकिंग सुविधाएं — उन बाकी समितियों तक किस रफ्तार और किस तरीके से पहुंचेंगी जो पहले से संघर्ष कर रही हैं। इस तस्वीर को समझने के लिए एक और आंकड़ा देखना ज़रूरी है। दिसंबर 2025 में ही हरियाणा सरकार ने PACS कर्ज़दारों के लिए एकमुश्त निपटान (One-Time Settlement) योजना का ऐलान किया था, जिसके तहत 6,81,182 किसानों और मज़दूरों का करीब ₹2,266 करोड़ का ब्याज माफ किया जाना था — बशर्ते वे मूलधन जमा कर दें। यह योजना 31 मार्च 2026 तक के लिए थी, और इसके दायरे में करीब 2.25 लाख दिवंगत किसानों के परिजन भी आते थे, जिनके लिए अलग से करीब ₹900 करोड़ की ब्याज माफी रखी गई थी। सवा साढ़े छह लाख किसानों पर बकाया कर्ज़ का इतना बड़ा आंकड़ा खुद बताता है कि हरियाणा की सहकारी साख व्यवस्था के भीतर वित्तीय दबाव कितना वास्तविक है।
हार्को बैंक की भूमिका और ढांचा
इन सारी घोषणाओं के केंद्र में जो संस्था है, वह है हार्को बैंक — यानी हरियाणा स्टेट कोऑपरेटिव एपेक्स बैंक। बैंक की अपनी वेबसाइट के मुताबिक इसकी स्थापना नवंबर 1966 में हुई थी और यह राज्य के तीन-स्तरीय सहकारी साख ढांचे के शीर्ष पर बैठा है — राज्य स्तर पर हार्को बैंक की 13 शाखाएं, ज़िला स्तर पर 19 केंद्रीय सहकारी बैंकों की 581 शाखाएं, और सबसे नीचे ग्रासरूट स्तर पर करीब 773 PACS/PCCS/FSS इकाइयां, जिनसे लगभग 30.06 लाख सदस्य जुड़े हैं। ग़ौरतलब है कि PACS की कुल संख्या अलग-अलग सरकारी दस्तावेज़ों में थोड़ी अलग-अलग बताई गई है — कहीं 622, कहीं 746, कहीं 801, तो हालिया बजट दस्तावेज़ में 804। यह अंतर शायद अलग-अलग समय और अलग-अलग वर्गीकरण (सिर्फ PACS या PACS+PCCS+FSS) की वजह से हो सकता है, लेकिन इतने महत्वपूर्ण आंकड़े में एकरूपता की कमी खुद एक पारदर्शिता से जुड़ा सवाल है।
यह खबर किनके लिए और क्यों ज़रूरी है
यह पूरी कहानी सिर्फ सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं है। हरियाणा के हर उस किसान के लिए यह सीधे काम की बात है जो अपनी PACS से कर्ज़ लेता है, खाद-बीज खरीदता है या अब वीटा बूथ, जन औषधि केंद्र जैसी नई सुविधाओं का फायदा उठाना चाहता है — उसे यह जानना चाहिए कि उसकी अपनी समिति मुनाफे में है या घाटे में, क्योंकि इसी पर तय होगा कि नई सुविधाएं कब और कैसे उस तक पहुंचेंगी। PACS के बोर्ड सदस्यों, सचिवों और कर्मचारियों के लिए भी यह जानकारी अहम है, क्योंकि कारोबार में विविधता लाने और पेट्रोल पंप जैसी नई गतिविधियां शुरू करने की पूरी ज़िम्मेदारी आखिरकार उन्हीं पर आएगी। हार्को बैंक और ज़िला सहकारी बैंकों से जुड़े अधिकारियों के लिए यह उनके अपने नेटवर्क की सेहत का सवाल है। और हर उस नागरिक के लिए भी यह मायने रखता है जो टैक्सपेयर है — क्योंकि ₹4,000 करोड़ का सरकारी कामकाज इन्हीं समितियों के ज़रिए कराया जाना है, यानी यह सार्वजनिक धन के इस्तेमाल का भी सवाल बन जाता है। सहकारिता क्षेत्र पर नज़र रखने वाले शोधकर्ताओं, पत्रकारों और नीति-निर्माताओं के लिए भी यह याद दिलाता है कि किसी भी घोषणा को सिर्फ उद्घाटन समारोह की खबर के तौर पर नहीं, बल्कि उसके बाद जारी होने वाले आधिकारिक आंकड़ों के आईने में परखना ज़रूरी है।
आगे क्या देखना होगा
निष्पक्ष नज़र से देखें तो हरियाणा सरकार के कुछ कदम वाकई सराहनीय हैं — फरीदाबाद और महेंद्रगढ़ में 100% PACS कंप्यूटरीकरण, शून्य ब्याज पर कर्ज़ की सुविधा, और डूबे कर्ज़ में फंसे लाखों किसानों के लिए राहत योजना, ये सब असल कदम हैं, सिर्फ बातें नहीं। लेकिन असली परीक्षा आने वाले समय में होगी — क्या 500 का लक्ष्य रखी गई CM-PACS संख्या 141 से आगे बढ़कर पूरी होती है, क्या सच में 300 PACS मुनाफे में आ पाती हैं, और क्या ₹4,000 करोड़ का सरकारी कामकाज पारदर्शी तरीके से इन्हीं समितियों तक पहुंचता है। जुलाई 2025 के बाद से हरियाणा सरकार की तरफ से CM-PACS की अद्यतन संख्या को लेकर कोई नया आधिकारिक आंकड़ा सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं मिला — यह अपने आप में बताता है कि इस तरह के लक्ष्यों की नियमित, पारदर्शी अपडेट की जितनी ज़रूरत है, उतनी अभी नहीं मिल रही। आखिरकार सहकारी आंदोलन की कामयाबी सिर्फ लॉन्च हुए डेबिट कार्ड या बांटे गए बूथ आवंटन पत्रों की गिनती से नहीं मापी जा सकती। असली पैमाना यह है कि गांव की वह PACS, जिससे किसान का रोज़ का नाता है, आर्थिक रूप से कितनी मजबूत है और कितनी भरोसेमंद तरीके से चल रही है।
स्रोत सूची (Source List)
- Government of Haryana — Directorate of Information, Public Relations & Languages, Press Note (5 जुलाई)
- The Tribune — New cooperative policy to revolutionise society: Dr Sharma
- PRS India — Haryana Budget Analysis 2026-27 (33 of 804 PACS profitable)
- ANI News — 37,454 new multipurpose PACS registered under govt’s 5-year plan
- News on Air (Government of India) — Amit Shah inaugurates Vita Milk Chilling Centre and HAFED Flour Mill in Haryana
- Indian Cooperative — Haryana boosts PACS under Sahkar Se Samriddhi
- Global Agriculture — CM Nayab Singh Saini launches One-Time Settlement Scheme for overdue PACS loans
- HARCO Bank — About Us (structure, branches, membership)
- PIB — Union HM Amit Shah addresses inaugural function of International Year of Cooperatives 2025, Mumbai
- Ministry of Cooperation — PACS Related Schemes
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