पिछली कई पोस्ट में हमने CM-PACS के रजिस्ट्रेशन, कानूनी हैसियत, टैक्स और हिसाब-किताब से जुड़े नियम अलग-अलग समझाए हैं। इस पोस्ट में हम उन 10 सबसे आम गलतियों और गलतफहमियों को एक जगह इकट्ठा कर रहे हैं, जो लोग CM-PACS शुरू करते या चलाते वक्त करते हैं — ताकि आप शुरुआत से ही इनसे बच सकें।
1. CM-PACS और PACS को एक ही चीज़ समझ लेना
यह सबसे बुनियादी और सबसे आम गलती है। CM-PACS यानी Comprehensive Multi-Purpose Activities Cooperative Society और PACS यानी Primary Agriculture Credit Society — दोनों पूरी तरह अलग-अलग तरह की सोसाइटी हैं। PACS सिर्फ खेती से जुड़े कर्ज़ और साख की सुविधा देती है, जबकि CM-PACS का दायरा डेयरी, LPG, फेयर प्राइस शॉप, टैक्सी सेवा जैसे कई कारोबार तक फैला है। दोनों का आपस में कोई सीधा संबंध नहीं है, और इन्हें कभी एक-दूसरे का पर्याय मानकर नहीं चलना चाहिए। पूरा फर्क इस पोस्ट में समझाया गया है।
2. सिर्फ 10 दस्तखत काफी समझ लेना
बहुत लोग सोचते हैं कि 10 इच्छुक व्यक्तियों के हस्ताक्षर मिलते ही आवेदन तैयार हो जाता है। असल में नियम 4 एक और शर्त जोड़ता है — इन सदस्यों का ताल्लुक कम से कम 5 अलग-अलग परिवारों से होना चाहिए। सिर्फ गिनती पूरी करना काफी नहीं, परिवारों की विविधता भी ज़रूरी है। पूरी प्रक्रिया यहां देखें।
3. दस्तावेज़ अधूरे लेकर पहुंचना
पहचान-पते के प्रमाण के अलावा, किसान सदस्यों के लिए MFMB (मेरी फसल मेरा ब्यौरा) रजिस्ट्रेशन और परिवार पहचान पत्र जैसे दस्तावेज़ अक्सर छूट जाते हैं, जिससे आवेदन में देरी होती है। पूरी 10-प्वाइंट चेकलिस्ट यहां है।
4. दो महीने की कानूनी समय-सीमा को ज़मीनी हकीकत मान लेना
अधिनियम की धारा 8 रजिस्ट्रार को दो महीने में फैसला लेने के लिए बाध्य करती है, लेकिन असल में फील्ड वेरिफिकेशन, दस्तावेज़ों की कमी और इलाके में सहमति बनाने जैसी वजहों से समय ज़्यादा लग सकता है — जुलाई 2025 तक 500 के लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 141 CM-PACS ही बन पाई थीं। व्यावहारिक समय और खर्च की पूरी जानकारी यहां है।
5. फीस को लेकर गलत जानकारी पर भरोसा करना
फीस को लेकर कई तरह की भ्रामक जानकारी इंटरनेट पर घूमती है। पक्के तौर पर जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक, हर सदस्य को ₹1,000 एंट्री फीस और ₹1,000 प्रति शेयर की व्यवस्था करनी होती है — यानी 10 शुरुआती सदस्यों के लिए लगभग ₹20,000 तक का कुल इंतज़ाम। इसे किसी और आंकड़े, जैसे “₹20,000 प्रति शेयर”, के साथ भ्रमित न करें — बाकी बारीक फीस (जैसे प्रोसेसिंग फीस) अलग से रजिस्ट्रार के आदेश से तय होती है, इसलिए अपने ARCS दफ्तर से पक्की जानकारी ज़रूर लें।
6. CM-PACS को सिर्फ एक सरकारी योजना समझना
बहुत से लोग मानते हैं कि CM-PACS सिर्फ एक अस्थायी सरकारी कार्यक्रम है। असल में यह अधिनियम की धारा 4 की शर्त पूरी करके रजिस्टर होती है और धारा 39 के तहत एक स्वतंत्र “बॉडी कॉर्पोरेट” बन जाती है — यानी अपनी संपत्ति, अपना करार करने का अधिकार और अपनी कानूनी पहचान वाली संस्था। पूरी जानकारी यहां है।
7. टैक्स में सारी कमाई को एक जैसा मान लेना
यह सोचना गलत है कि सदस्यों को बेचने पर कोई GST नहीं लगता, या धारा 80P के तहत सारी कमाई पर एक जैसी टैक्स छूट मिल जाती है। असल में कृषि से जुड़ी गतिविधियों, सामान्य कारोबार (जैसे LPG, टैक्सी) और सदस्यों को की गई सप्लाई — तीनों पर अलग-अलग नियम लागू होते हैं, और GST में म्यूचुअलिटी को लेकर कानूनी स्थिति अभी भी बदल रही है। 80P पर यहां पढ़ें और GST पर यहां।
8. पूरा मुनाफा सदस्यों में बांटने की कोशिश करना
कानून हर साल मुनाफे का कम से कम दसवां हिस्सा रिज़र्व फंड में डालना अनिवार्य करता है, और यह फंड सदस्यों में बांटा नहीं जा सकता। इसे शेयर पूंजी समझकर बांटने की कोशिश करना नियमों का उल्लंघन है। पूरा नियम यहां समझें।
9. गतिविधि-वार हिसाब न रखना
चूंकि CM-PACS कई तरह का कारोबार करती है, हर गतिविधि की कमाई-खर्च अलग-अलग दर्ज न करने से टैक्स छूट का सही दावा करना और सालाना ऑडिट पास कराना मुश्किल हो जाता है। ऑडिट के बुनियादी नियम यहां देखें।
10. नई गतिविधि जोड़ने के लिए मंज़ूरी ज़रूरी न समझना
अगर कोई CM-PACS अपने मूल बाय-लॉज़ में दर्ज न की गई कोई नई गतिविधि शुरू करना चाहती है, तो इसके लिए सामान्य सभा और रजिस्ट्रार दोनों की मंज़ूरी ज़रूरी है — प्रबंध समिति अकेले यह फैसला नहीं ले सकती। बाय-लॉज़ में बदलाव की पूरी प्रक्रिया यहां है।
निष्कर्ष
इनमें से ज़्यादातर गलतियां जानकारी की कमी से होती हैं, बदनीयती से नहीं। सही जानकारी शुरुआत में ही मिल जाए, तो CM-PACS न सिर्फ आसानी से रजिस्टर होती है, बल्कि आगे चलकर कानूनी और वित्तीय दिक्कतों से भी बची रहती है।
स्रोत सूची (Source List)
हरियाणा सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1984 और हरियाणा सहकारी सोसाइटी नियम, 1989
Sahakar Watch — CM-PACS क्या है? हरियाणा की नई सहकारी समिति की जानकारी
Sahakar Watch — हरियाणा में CM-PACS रजिस्टर कैसे करें?
Sahakar Watch — दस्तावेज़ चेकलिस्ट
Sahakar Watch — रजिस्ट्रेशन का समय और खर्च
Sahakar Watch — कानूनी हैसियत
Sahakar Watch — धारा 80P
Sahakar Watch — GST और म्यूचुअलिटी
Sahakar Watch — रिज़र्व फंड
Sahakar Watch — ऑडिट के नियम
Sahakar Watch — बाय-लॉज़ में बदलाव











