अब तक आप जान चुके हैं कि CM-PACS क्या है और यह कितने तरह के कारोबार कर सकती है। लेकिन जिस गांव या पंचायत-क्लस्टर के लोग वाकई अपनी CM-PACS खड़ी करना चाहते हैं, उनके लिए असली सवाल यह है — आवेदन कहां से शुरू करें, कितने लोग चाहिए, और कागज़ी प्रक्रिया कैसे पूरी होगी। यह पूरी प्रक्रिया हरियाणा सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1984 और हरियाणा सहकारी सोसाइटी नियम, 1989 में तय है, और CM-PACS भी इसी ढांचे के तहत रजिस्टर होती है।
शुरुआत कहां से — कम से कम कितने लोग चाहिए
अधिनियम की धारा 7 के मुताबिक रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन प्रस्तावित बाय-लॉज़ के साथ रजिस्ट्रार के पास भेजा जाता है, और प्राइमरी सोसाइटी के मामले में सामान्य कानूनी शर्त यह है कि आवेदन पर कम से कम 10 योग्य व्यक्तियों के हस्ताक्षर होने चाहिए। लेकिन CM-PACS के लिए हरियाणा सहकारिता विभाग ने खासतौर पर न्यूनतम सदस्य संख्या 11 तय की है — यानी व्यवहार में आवेदन के लिए कम से कम 11 पात्र व्यक्ति चाहिए, जो अधिनियम की सामान्य शर्त से एक ज़्यादा है। नियम 4 एक और शर्त जोड़ता है — सोसाइटी में कम से कम 5 परिवारों के लोग शामिल होने चाहिए, जब तक कि उसका कोई सदस्य खुद कोई सहकारी सोसाइटी न हो। यानी सिर्फ दस्तखत जुटाना काफी नहीं, आवेदकों की संख्या 11 होनी चाहिए और उनका ताल्लुक कम से कम 5 अलग-अलग परिवारों से भी होना चाहिए।
आवेदन कहां जमा होता है — अब सब कुछ ऑनलाइन
पहले यह काम पूरी तरह कागज़ पर होता था, लेकिन अब हरियाणा सहकारिता विभाग का अपना ऑनलाइन पोर्टल (cooponline.rcsharyana.gov.in) है। आवेदकों को पहले इसी पोर्टल पर खुद को रजिस्टर करना होता है, इसके बाद अपने इलाके के सहायक रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां (Assistant Registrar of Cooperative Societies यानी ARCS) के पास ऑनलाइन आवेदन करना होता है। इसमें ज़रूरी फॉर्म भरना, उसका PDF डाउनलोड कर हस्ताक्षर करवाना, और बाय-लॉज़ की स्कैन कॉपी अपलोड करना शामिल है। नियम 5 के मुताबिक यह आवेदन “फॉर्म I” में दिया जाता है, और आवेदकों में से किसी एक का नाम-पता बताना होता है जिससे रजिस्ट्रार आगे की चिट्ठी-पत्री कर सके।
बाय-लॉज़ नए सिरे से लिखने की ज़रूरत नहीं
आम सहकारी सोसाइटी के उलट, CM-PACS के लिए बाय-लॉज़ लिखने का झंझट नहीं है। हरियाणा सरकार ने 25 दिसंबर 2023 को रजिस्ट्रार सहकारी समितियां (मेमो नंबर PA/RCS/225-275) के ज़रिए CM-PACS के लिए तैयार Model Bye-laws पहले से ही सभी जिलों में लागू कर दिए हैं। आवेदकों को ज़्यादातर मामलों में बस यही मॉडल बाय-लॉज़ अपनाने होते हैं — सोसाइटी का नाम, कार्यक्षेत्र (area of operation) और शुरुआती सदस्यों के नाम भरकर। नियम 6 के मुताबिक बाय-लॉज़ की तीन प्रतियां आवेदन के साथ लगानी होती हैं, और इन प्रतियों पर कम से कम दो आवेदकों के हस्ताक्षर ज़रूरी हैं।
आवेदन जमा होने के बाद क्या होता है
आवेदन पहुंचते ही यह अपने आप मंज़ूर नहीं हो जाता। पोर्टल की प्रक्रिया के मुताबिक पहले सहायक रजिस्ट्रार कार्यालय आवेदन को स्वीकार करता है, फिर एक इंस्पेक्टर मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन (physical verification) करता है — यानी यह देखा जाता है कि बताए गए सदस्य असल में मौजूद हैं, उनका ताल्लुक बताए गए इलाके से है, और सोसाइटी का मकसद सही तरीके से दर्ज किया गया है। इसके बाद सहायक रजिस्ट्रार अपनी सिफारिश के साथ फाइल आगे भेजता है, जहां अंतिम मंज़ूरी या अस्वीकृति तय होती है।
धारा 8 यह भी तय करती है कि रजिस्ट्रार किन बातों से संतुष्ट होकर ही सोसाइटी रजिस्टर करेगा — आवेदन कानून के मुताबिक हो, सोसाइटी का मकसद सहकारी सिद्धांतों के अनुरूप हो, बाय-लॉज़ अधिनियम के खिलाफ न हों, और प्रस्तावित सोसाइटी के कामयाब होने की “उचित संभावना” हो। इसी धारा में एक अहम समय-सीमा भी तय है — रजिस्ट्रार को आवेदन मिलने की तारीख से दो महीने के भीतर फैसला लेना होता है।
रजिस्ट्रेशन मंज़ूर होने पर क्या मिलता है
मंज़ूरी मिलने पर नियम 7(2) के तहत सोसाइटी को रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (फॉर्म II में) और रजिस्टर्ड बाय-लॉज़ की एक कॉपी भेजी जाती है। धारा 9 के मुताबिक यह सर्टिफिकेट खुद इस बात का पक्का सबूत माना जाता है कि सोसाइटी वैध रूप से रजिस्टर हो चुकी है। इसके बाद ही सोसाइटी कानूनी रूप से बैंक खाता खोलने, ज़मीन खरीदने या करार करने जैसी गतिविधियां शुरू कर सकती है।
अगर आवेदन ठुकरा दिया जाए तो
हर आवेदन मंज़ूर ही हो, यह ज़रूरी नहीं। अगर रजिस्ट्रार आवेदन ठुकरा दे, तो आवेदकों के पास अपील का रास्ता है। नियम 9 के मुताबिक यह अपील या तो सभी आवेदकों के हस्ताक्षर से होनी चाहिए, या अगर आवेदकों की संख्या 10 से ज़्यादा है तो कम से कम दो-तिहाई आवेदकों के हस्ताक्षर से।
कागज़ पर आसान, ज़मीन पर धीमी
कानून में समय-सीमा दो महीने की भले तय हो, आंकड़े कुछ और कहानी बताते हैं। जुलाई 2025 में हरियाणा सरकार ने 500 CM-PACS बनाने का लक्ष्य रखा था, और उस समय तक सिर्फ 141 बन पाई थीं — हमारे 804 में सिर्फ 33 PACS मुनाफे में वाले विश्लेषण में इसका पूरा संदर्भ मिलेगा। यानी कानूनी प्रक्रिया भले सीधी दिखे, फील्ड वेरिफिकेशन, दस्तावेज़ों की कमी या इलाके में सहमति बनाने जैसी वजहों से असल समय ज़्यादा लग सकता है। रजिस्ट्रेशन में लगने वाले व्यावहारिक समय और फीस पर हम अगली पोस्ट में अलग से बात करेंगे।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, CM-PACS रजिस्टर कराने की कानूनी प्रक्रिया किसी भी आम सहकारी सोसाइटी जैसी ही है, फर्क सिर्फ इतना है कि बाय-लॉज़ पहले से तैयार मिलते हैं। असली मेहनत कागज़ी प्रक्रिया में नहीं, बल्कि कम से कम 5 परिवारों को साथ लाने, इलाके की ज़रूरत के हिसाब से सही कारोबार चुनने, और सहायक रजिस्ट्रार कार्यालय के साथ फॉलो-अप में है।
स्रोत सूची (Source List)
- हरियाणा सहकारी सोसाइटी अधिनियम, 1984 — धारा 6, 7, 8, 9
- हरियाणा सहकारी सोसाइटी नियम, 1989 — नियम 4, 5, 6, 7, 9
- cooponline.rcsharyana.gov.in — रजिस्ट्रार सहकारी समितियां, हरियाणा का आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल
- Sahakar Watch — CM-PACS क्या है? हरियाणा की नई सहकारी समिति की जानकारी (30 अगस्त 2026)
- Sahakar Watch — हरियाणा में CM-PACS और नई सुविधाओं की घोषणाएं, 804 में से सिर्फ 33 PACS मुनाफे में (1 सितंबर 2026)
- Dainik Tribune — प्रदेश में बनेंगी 500 CM-PACS, गांवों में होंगी व्यावसायिक गतिविधियां (न्यूनतम 11 सदस्य अनिवार्य)











