हरियाणा में PACS को मजबूत करने पर जोर: ग्रामीण सहकारिता को ज्यादा पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने पर चर्चा

चंडीगढ़। हरियाणा में सहकारी क्षेत्र को मजबूत करने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था में इसकी भूमिका बढ़ाने और Primary Agricultural Credit Societies यानी PACS को अधिक प्रभावी बनाने के सवाल पर एक नई चर्चा सामने आई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के OSD भारत भूषण भारती के साथ हुई बैठक में PACS स्तर पर सहकारी व्यवस्था को मजबूत करने, पारदर्शिता बढ़ाने और जमीनी स्तर पर लाभ पहुंचाने के उपायों पर विचार हुआ। बैठक में पूर्व HARCO Bank Chairman हुकम चंद भाटी तथा Haryana CM PACS Association के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।

यह बैठक अपने आप में कोई नई सरकारी अधिसूचना या नियम परिवर्तन नहीं है, लेकिन इसमें जिन मुद्दों पर चर्चा हुई, वे हरियाणा की ग्रामीण सहकारी व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार बातचीत का जोर इस बात पर था कि सहकारी संस्थाओं को अधिक transparent, effective और result-oriented कैसे बनाया जाए और PACS स्तर पर अधिकारियों, सदस्यों तथा grassroots functionaries की भूमिका को किस तरह मजबूत किया जाए।

PACS क्यों इतने महत्वपूर्ण हैं?

PACS ग्रामीण सहकारी ढांचे की सबसे निचली और किसान के सबसे निकट वाली इकाई मानी जाती हैं। कृषि ऋण, खाद-बीज, सदस्य सेवाओं और कई स्थानों पर अन्य ग्रामीण गतिविधियों के लिए किसान का पहला संस्थागत संपर्क PACS ही होती है।

केंद्र सरकार के PACS computerisation guidelines में भी इन्हें तीन-स्तरीय short-term cooperative credit structure की सबसे निचली इकाई बताया गया है। राष्ट्रीय स्तर पर PACS से लगभग 13 करोड़ किसानों के जुड़े होने का उल्लेख किया गया है। सरकार का उद्देश्य operational PACS को common ERP-based software पर लाना, State Cooperative Banks और District Central Cooperative Banks से जोड़ना तथा accounting, audit और service delivery में सुधार करना है।

हरियाणा के संदर्भ में यह विषय इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि राज्य के Cooperation Department की scheme list में 801 PACS/PCCS के computerisation के लिए सहायता का उल्लेख है। विभाग के अनुसार इस योजना का उद्देश्य PACS की कार्यकुशलता बढ़ाना, ऋण वितरण में तेजी लाना, transaction cost कम करना, भुगतान संबंधी असंतुलन घटाना और किसानों के बीच संस्थाओं की विश्वसनीयता बढ़ाना है।

केवल computerisation से समस्या पूरी नहीं होगी

PACS को मजबूत करने की चर्चा अक्सर software, hardware और digitisation तक पहुंचकर रुक जाती है। लेकिन जमीनी स्तर पर संस्था की सेहत इससे कहीं अधिक बातों पर निर्भर करती है।

एक PACS में सही accounting, समय पर audit, सदस्य रिकॉर्ड, loan recovery, stock management, board governance, कर्मचारी क्षमता और नई business activities—सभी एक साथ महत्वपूर्ण हैं।

अगर software लगा दिया जाए लेकिन data गलत हो, vouchers समय पर न बनें, पुराने records reconcile न हों या कर्मचारियों को नई व्यवस्था का प्रशिक्षण न मिले, तो digitisation का लाभ सीमित रह सकता है।

यही कारण है कि हरियाणा में PACS को मजबूत करने की हाल की चर्चा में अधिकारियों, सदस्यों और grassroots functionaries की भूमिका बढ़ाने की बात महत्वपूर्ण दिखाई देती है। क्योंकि cooperative institution अंततः software से नहीं, लोगों और प्रक्रियाओं से चलती है।

PACS अब केवल ऋण समिति तक सीमित नहीं रह सकती

देश में PACS को multipurpose institutions बनाने की दिशा में भी तेजी से काम हो रहा है। Ministry of Cooperation की PACS-related schemes में computerisation के साथ FPO formation, Jan Aushadhi Kendras, Common Service Centres, LPG distributorship, petrol-diesel dealership, grain storage और नई multipurpose PACS जैसी गतिविधियों को शामिल किया गया है।

Model Bye-laws के तहत PACS को 25 से अधिक business activities करने की संभावना दी गई है। इनमें dairy, fisheries, warehousing, procurement, fertilizers, seeds, custom hiring centres और CSC जैसी सेवाएं शामिल हैं। इसका मूल विचार यह है कि PACS गांव में केवल credit society न रहकर एक multi-service economic institution बन सके।

यहीं हरियाणा के लिए बड़ा अवसर भी है।

यदि राज्य की PACS अपने स्थानीय क्षेत्र की जरूरत के अनुसार viable activities चुनें, तो वे किसान सदस्य के लिए ज्यादा उपयोगी और आर्थिक रूप से अधिक टिकाऊ बन सकती हैं। हर PACS को सभी गतिविधियां करने की जरूरत नहीं है; लेकिन जिस क्षेत्र में वास्तव में मांग हो, वहां business diversification पर व्यवस्थित तरीके से काम किया जा सकता है।

Sahakar Watch की पिछली रिपोर्टों से भी यही संकेत

Sahakar Watch ने हाल में असम में सहकारी समितियों के ऑनलाइन पंजीकरण पर रिपोर्ट करते हुए यह सवाल उठाया था कि सहकारी संस्था बनाना आसान होना चाहिए, लेकिन उसके बाद governance और compliance equally important हैं।

इसी तरह NAFED FPO BizConnect की रिपोर्ट में यह सामने आया कि किसी किसान संगठन की स्थिरता आखिरकार बाजार से जुड़ाव और व्यवहारिक कारोबार पर निर्भर करती है।

PACS के लिए भी यही सिद्धांत लागू होता है। संस्था का registration, computerisation या नई activity शुरू करना तभी सार्थक है जब उसके सदस्य को सेवा बेहतर मिले और संस्था स्वयं financial discipline के साथ चल सके।

पारदर्शिता का अर्थ क्या होना चाहिए?

PACS को transparent बनाने की बात तभी meaningful होगी जब सदस्य को संस्था की वास्तविक स्थिति समझ आए।

उदाहरण के लिए:

ऋण कितना वितरित हुआ, recovery कितनी है, overdue कितना है, stock कितना है, annual audit कब हुआ, profit या loss की स्थिति क्या है और कौन-सी नई गतिविधि वास्तव में आय दे रही है—इनका reliable record उपलब्ध होना चाहिए।

Ministry of Cooperation भी PACS computerisation को transparency, faster audit, seamless accounting और बेहतर service delivery से जोड़ती है।

इसके साथ board members और staff की training भी उतनी ही जरूरी है। हरियाणा Cooperation Department की schemes में member education और leadership training के लिए भी अलग व्यवस्था का उल्लेख है।

बैठक से आगे अब क्या देखना होगा?

अभी उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह PACS strengthening पर हुई एक महत्वपूर्ण चर्चा है, न कि कोई औपचारिक नई नीति घोषणा। इसलिए आगे तीन चीजें देखने योग्य होंगी।

पहली—क्या इस बैठक के बाद Haryana Government या Cooperation Department कोई specific action plan जारी करता है।

दूसरी—801 PACS/PCCS के computerisation की वास्तविक ground-level progress क्या है और कितनी societies पूरी तरह functional ERP workflow पर आ चुकी हैं।

तीसरी—क्या PACS को केवल credit और traditional activities से आगे बढ़ाकर financially viable multipurpose model की दिशा में measurable support मिलता है।

हरियाणा की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में cooperative network पहले से मौजूद है। चुनौती नया ढांचा खड़ा करने से अधिक, मौजूदा संस्थाओं को professional, accountable और economically viable बनाने की है।

अगर PACS स्तर पर governance, technology, trained staff और स्थानीय जरूरत के अनुरूप business diversification को एक साथ आगे बढ़ाया जाता है, तो यह केवल cooperative department का administrative reform नहीं रहेगा; इसका प्रभाव सीधे किसान सदस्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक पहुंच सकता है।

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