हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र में एक सीधे सवाल ने राज्य के सहकारी बैंकों की एक अनदेखी तस्वीर सामने रख दी। यह तस्वीर है बैंकों के भीतर स्टाफ की स्थिति की, जिस पर आमतौर पर बहुत कम बात होती है। मुलाना से विधायक पूजा चौधरी ने सहकारिता मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा से इस बारे में लिखित सवाल पूछा था। उन्होंने पूछा था कि राज्य के सहकारी बैंकों में समूह क, ख, ग और घ के पदों पर स्वीकृत संख्या कितनी है। साथ ही यह भी पूछा गया कि वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों की संख्या कितनी है। और खाली पदों को भरने की क्या योजना है, यह भी पूछा गया।
मंत्री की तरफ से विधानसभा में दर्ज हुए आंकड़े किसी को भी चौंका सकते हैं। राज्य के सहकारी बैंकों में कुल 5,148 स्वीकृत पदों में से केवल 582 पर ही नियमित कर्मचारी काम कर रहे हैं। बाकी 4,566 पद खाली पड़े हैं — यानी कुल स्वीकृत संख्या के 90 प्रतिशत से भी ज्यादा। दूसरे शब्दों में कहें तो, हरियाणा के सहकारी बैंकों में खाली पद अब कुल स्वीकृत पदों के नौ-दसवें हिस्से तक पहुंच चुके हैं।
ये आंकड़े सिर्फ प्रशासनिक फाइलों की बात नहीं हैं। हरियाणा में सहकारी बैंकिंग ढांचा सीधे उन हजारों प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों यानी PACS से जुड़ा है। ये समितियां गांव-स्तर पर लाखों किसानों को कर्ज, खाद-बीज और दूसरी जरूरी सुविधाएं मुहैया कराती हैं। इस रिपोर्ट में हम विधानसभा में दर्ज हुए आंकड़ों को विस्तार से समझते हैं और उन्हें प्रमाणित करते हैं। साथ ही यह भी बताते हैं कि सहकारी बैंकों में यह स्टाफ संकट किनके लिए मायने रखता है।
📌 अपडेट (7 सितंबर 2026): दैनिक जागरण में भी यह खबर, एक आंकड़े में सुधार
इसी विधानसभा जवाब पर आधारित यह खबर दैनिक जागरण ने भी 7 सितंबर 2026 के अंक (पेज 3) में प्रकाशित की। हालांकि उस रिपोर्ट में हरको बैंक के रिक्त पदों की संख्या 108 छपी है, जो एक छपाई/रिपोर्टिंग त्रुटि प्रतीत होती है। सही आंकड़ा 384 है — जैसा ऊपर बताया गया, हरको बैंक में 591 स्वीकृत पदों में से 207 पर कर्मचारी कार्यरत हैं और 384 पद रिक्त हैं। यह आंकड़ा राज्य के कुल आंकड़े से भी मेल खाता है (कुल 4,566 रिक्त − DCCB में 4,182 रिक्त = 384)।
सहकारी बैंकिंग ढांचा: एक संक्षिप्त परिचय
इस खबर को समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि हरियाणा का सहकारी बैंकिंग ढांचा काम कैसे करता है। सबसे नीचे के स्तर पर प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां यानी PACS होती हैं। ये गांव स्तर पर किसानों के साथ सीधे जुड़ी होती हैं और उन्हें अल्पकालीन कर्ज, खाद-बीज जैसी सुविधाएं देती हैं। अगर आप PACS के काम-काज को विस्तार से जानना चाहते हैं, तो हमारा यह लेख पढ़ सकते हैं। इसमें बताया गया है कि CM-PACS क्या है और यह कैसे काम करती है।
PACS के ऊपर जिला स्तर पर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक आते हैं, जिन्हें संक्षेप में DCCB कहा जाता है। ये बैंक PACS को कर्ज और तरलता यानी liquidity मुहैया कराते हैं। हरियाणा में ऐसे 19 जिला केंद्रीय सहकारी बैंक हैं। सबसे ऊपर राज्य स्तर पर हरियाणा राज्य सहकारी एपेक्स बैंक लिमिटेड है, जिसे आमतौर पर हरको बैंक कहा जाता है। हरको बैंक राज्य की सभी जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों के लिए शीर्ष संस्था की तरह काम करता है।
कर्मचारियों की चार श्रेणियां
इस तीन-स्तरीय ढांचे में हर स्तर पर काम करने के लिए कर्मचारियों की चार श्रेणियां तय हैं। समूह क यानी क्लास ए सबसे वरिष्ठ प्रबंधकीय पद हैं, और समूह ख यानी क्लास बी अधिकारी स्तर के पद हैं। समूह ग यानी क्लास सी में क्लर्क और उससे जुड़े पद आते हैं। समूह घ यानी क्लास डी में सहायक और चतुर्थ श्रेणी के पद आते हैं। विधानसभा में पूछा गया सवाल इन्हीं चारों श्रेणियों में सहकारी बैंकों के स्वीकृत और कार्यरत पदों की संख्या को लेकर था।
हरियाणा जैसे कृषि-प्रधान राज्य में यह पूरा ढांचा ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। बुवाई के मौसम में किसानों को समय पर कर्ज चाहिए होता है। उपज बेचने के बाद खाते में भुगतान भी समय पर चाहिए होता है। इन सबकी शुरुआत PACS से ही होती है। और PACS का पूरा कामकाज जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों और हरको बैंक की स्टाफिंग क्षमता पर टिका होता है। यही वजह है कि इन बैंकों में खाली पदों की संख्या सिर्फ एक विभागीय आंकड़ा नहीं है। यह सीधे किसानों तक पहुंचने वाली सेवा से जुड़ा मसला है।
यह आंकड़े कहां से आए
यह आंकड़े किसी अनुमान या असत्यापित रिपोर्ट से नहीं आए हैं। ये हरियाणा विधानसभा की औपचारिक कार्यवाही से आए हैं। पूजा चौधरी का यह सवाल हरियाणा विधानसभा की अतारांकित प्रश्न सूची यानी Un-Starred Questions में दर्ज है। इसे विधानसभा अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करती है। यह दस्तावेज़ इस बात की पुष्टि करता है कि सहकारी बैंकों में खाली पदों को लेकर यह सवाल वाकई विधानसभा में पूछा गया था। इच्छुक पाठक यह दस्तावेज़ इस रिपोर्ट के अंत में दी गई स्रोत सूची में जाकर खुद देख सकते हैं।
मंत्री के जवाब में दर्ज सटीक आंकड़े — जैसे 5,148, 582 और 4,566 — कहां से आए, यह भी बताना जरूरी है। इस रिपोर्ट में ये आंकड़े दैनिक जागरण के चंडीगढ़ संस्करण में प्रकाशित खबर के आधार पर लिए गए हैं। इसी खबर ने यह जवाब सबसे पहले सार्वजनिक रूप से रिपोर्ट किया था। विधानसभा की वेबसाइट पर जवाब का पूरा टेक्स्ट अलग से खोजने पर स्वतंत्र रूप से उपलब्ध नहीं मिला। इसलिए पाठकों के सामने यह स्पष्ट कर देना जरूरी है। सवाल के विधानसभा में दर्ज होने की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेज़ से होती है। जबकि विस्तृत आंकड़े अखबार की रिपोर्ट पर आधारित हैं। जैसे ही जवाब का पूरा पाठ स्वतंत्र रूप से उपलब्ध होगा, हम इस रिपोर्ट को अपडेट करेंगे।
सहकारी बैंकों में खाली पद: आंकड़े क्या कहते हैं
मंत्री के जवाब को दो हिस्सों में बांटकर देखा जा सकता है। पहला, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक यानी DCCB, और दूसरा, हरियाणा राज्य सहकारी एपेक्स बैंक यानी हरको बैंक। जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में कुल 4,557 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से सिर्फ 375 कर्मचारी नियमित रूप से कार्यरत हैं। इसका मतलब है कि यहां 4,182 पद खाली हैं।
हरको बैंक की स्थिति भी बहुत अलग नहीं है। यहां 591 स्वीकृत पदों में से सिर्फ 207 पर कर्मचारी तैनात हैं। बाकी 384 पद रिक्त हैं। दोनों संस्थानों के आंकड़े जोड़ने पर वही कुल संख्या मिलती है, जिससे यह खबर शुरू हुई थी। यानी 5,148 स्वीकृत पदों में से 582 भरे हुए, और 4,566 खाली।
सबसे ज्यादा असर श्रेणी-सी और डी पर
अगर पद के स्तर के हिसाब से देखा जाए, तो सहकारी बैंकों की तस्वीर और साफ हो जाती है। जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में तृतीय श्रेणी यानी क्लर्क और उससे जुड़े पदों के 3,087 स्वीकृत पद हैं। इनमें से सिर्फ 333 पर कर्मचारी कार्यरत हैं। चतुर्थ श्रेणी में हालात इससे भी ज्यादा गंभीर हैं। यहां 1,470 स्वीकृत पदों में से महज 42 कर्मचारी काम कर रहे हैं।
यही पैटर्न हरको बैंक में भी दिखाई देता है, जहां श्रेणी-सी के 218 और श्रेणी-डी के 95 पद खाली बताए गए हैं। दोनों बैंकों को मिलाकर देखें तो इन दो श्रेणियों में ही कुल 4,495 पद रिक्त हैं। यानी सहकारी बैंकों में कुल 4,566 खाली पदों में से करीब 99 प्रतिशत कमी सिर्फ श्रेणी-सी और श्रेणी-डी में है। दूसरे शब्दों में कहें तो सबसे ज्यादा मार उन्हीं पदों पर पड़ी है, जो शाखा स्तर पर रोजमर्रा का कामकाज संभालते हैं। इनमें कर्ज की फाइल बनाना, वसूली और रिकॉर्ड रखना जैसे काम शामिल हैं।
886 पदों की भर्ती: कितनी राहत मिलेगी
सहकारिता मंत्री ने विधानसभा में यह भी बताया कि सहकारी बैंकों में 886 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया इस समय चल रही है। यह अपने आप में एक सकारात्मक कदम है। लेकिन इसे मौजूदा 4,566 रिक्तियों के सामने रखकर देखना जरूरी है। 886 पद, कुल खाली पदों का करीब 19 प्रतिशत ही बनते हैं।
इसका सीधा मतलब यह है कि यह भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी करीब 3,680 पद खाली रह जाएंगे। यह बात जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों और हरको बैंक, दोनों पर लागू होती है। मंत्री के जवाब में यह नहीं बताया गया कि बाकी बचे पदों को किस समयसीमा में भरा जाएगा। न ही यह स्पष्ट हुआ कि 886 पदों की यह भर्ती किन श्रेणियों — क, ख, ग या घ — में हो रही है।
सवाल जो अभी अनुत्तरित हैं
मंत्री के जवाब ने सहकारी बैंकों में समस्या की गहराई तो सामने रख दी, लेकिन कई सवाल अब भी खुले हैं। पहला, यह स्पष्ट नहीं है कि 886 पदों की भर्ती किन श्रेणियों में हो रही है। यह भी साफ नहीं है कि यह भर्ती जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में हो रही है या हरको बैंक में, या दोनों जगह। दूसरा, बाकी बचे करीब 3,680 पदों को भरने के लिए कोई ठोस समयसीमा या रोडमैप जवाब में सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आया। तीसरा, यह भी साफ नहीं है कि पिछले कितने वर्षों में यह रिक्तियां जमा हुई हैं। यानी यह अचानक बनी स्थिति है या धीरे-धीरे बढ़ी है।
सहकारी समितियां और बैंक किस हद तक सरकारी निकाय की तरह जवाबदेह हैं, यह सवाल कानूनी दायरे में भी उठ चुका है। इस बहस को हमने पहले इस लेख में विस्तार से कवर किया था। ऊपर उठाए गए सवालों के जवाब आने वाले विधानसभा सत्रों में या सहकारिता विभाग की अधिसूचनाओं में सामने आ सकते हैं। जब तक ऐसा नहीं होता, यह कहना मुश्किल है कि मौजूदा भर्ती प्रक्रिया समस्या के किस हिस्से का समाधान करेगी।
इतनी बड़ी कमी का मतलब क्या है
सहकारी बैंकिंग ढांचे को समझने वाला कोई भी व्यक्ति जानता है कि जिला केंद्रीय सहकारी बैंक सिर्फ एक और बैंक नहीं हैं। ये PACS को कर्ज और तरलता देने की कड़ी हैं। जब शाखा स्तर पर ही 90 प्रतिशत से ज्यादा पद खाली हों, तो इसका असर सीधा दिखता है। कर्ज मंजूरी में देरी, रिकॉर्ड अपडेट में लापरवाही और ग्राहक सेवा पर बढ़ता बोझ — ये सब इसके स्वाभाविक नतीजे हैं।
इसका बोझ मौजूदा कर्मचारियों पर भी पड़ता है, जिन्हें कई-कई पदों का काम अकेले संभालना पड़ता है। यह स्थिति अकेली नहीं है। सहकारी क्षेत्र में स्टाफिंग को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। जैसे, PACS की नई मॉडल HR पॉलिसी में कारोबार के हिसाब से स्टाफ तय करने की कोशिश की गई। या PACS कर्मचारियों के लिए जॉब सिक्योरिटी एक्ट का सवाल। दोनों ही मामलों की जड़ में कहीं न कहीं यही चुनौती है — सहकारी संस्थाओं में पर्याप्त और स्थायी स्टाफ का अभाव। इसी तरह हरको बैंक और HAFED जैसी संस्थाओं में भी कामकाज और कर्मचारियों को लेकर सवाल उठे हैं। इस बड़ी तस्वीर को समझने में हमारा यह विश्लेषण मदद कर सकता है।
यह खबर किनके लिए और क्यों जरूरी है
सबसे पहले, उन किसानों और PACS सदस्यों के लिए, जो अपनी रोजमर्रा की कर्ज और बैंकिंग जरूरतों के लिए जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों पर निर्भर हैं। सहकारी बैंकों में खाली पद सीधे उस सेवा की गति और गुणवत्ता पर असर डालते हैं, जो अंततः उन तक पहुंचती है।
दूसरा, हरको बैंक और जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों में पहले से कार्यरत कर्मचारियों के लिए, जिन्हें इस कमी का बोझ रोज उठाना पड़ता है। तीसरा, उन युवाओं के लिए, जो 886 पदों की इस भर्ती प्रक्रिया पर नजर रखे हुए हैं। ये युवा आगे की अधिसूचनाओं का इंतजार कर रहे हैं। और चौथा, सहकारिता नीति पर नजर रखने वाले शोधकर्ताओं और पत्रकारों के लिए। इनके लिए यह आंकड़े सहकारी बैंकिंग ढांचे की एक बड़ी संरचनात्मक चुनौती की ओर इशारा करते हैं। यह चुनौती सिर्फ भर्ती अभियानों से नहीं, बल्कि दीर्घकालीन योजना से हल होगी।
पूरी संख्या एक नजर में
नीचे दी गई तालिका में विधानसभा के जवाब में दर्ज सभी मुख्य आंकड़ों को एक साथ देखा जा सकता है।
| संस्थान / श्रेणी | स्वीकृत पद | कार्यरत कर्मचारी | खाली पद |
|---|---|---|---|
| जिला केंद्रीय सहकारी बैंक (DCCB) — कुल | 4,557 | 375 | 4,182 |
| DCCB — तृतीय श्रेणी (सी) | 3,087 | 333 | 2,754 |
| DCCB — चतुर्थ श्रेणी (डी) | 1,470 | 42 | 1,428 |
| हरको बैंक (HARCO) — कुल | 591 | 207 | 384 |
| हरको बैंक — श्रेणी सी | — | — | 218 |
| हरको बैंक — श्रेणी डी | — | — | 95 |
| राज्य में कुल (DCCB + HARCO) | 5,148 | 582 | 4,566 |
नोट: हरको बैंक की श्रेणी-वार स्वीकृत और कार्यरत संख्या का पूर्ण विभाजन सार्वजनिक रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं था। इसलिए वहां केवल खाली पदों की संख्या दी गई है।
आगे क्या
विधानसभा में दिया गया यह जवाब लिखित है, यानी इसे आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा माना जाएगा। इससे यह तो साफ हो गया है कि सहकारी बैंकों में स्टाफ की कमी की समस्या कितनी बड़ी है। लेकिन यह अब भी खुला सवाल है कि बाकी बचे करीब 3,680 पदों को भरने की क्या योजना है। सहकारिता विभाग और हरको बैंक की आगे की अधिसूचनाओं, और अगले विधानसभा सत्रों में इस पर और स्पष्टता आने की उम्मीद है।
जब तक ऐसा नहीं होता, हरियाणा के जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों और हरको बैंक को मुश्किल हालात में काम करना होगा। इनका रोजमर्रा का कामकाज उस स्टाफ के सहारे चलेगा, जो स्वीकृत संख्या के दसवें हिस्से के आसपास ही है। SahakarWatch इस मुद्दे पर आगे भी नजर रखेगा। जैसे ही 886 पदों की भर्ती या बाकी रिक्तियों को लेकर कोई नई अधिसूचना आती है, इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा।
स्रोत सूची
- हरियाणा विधानसभा, अतारांकित प्रश्न सूची (हिंदी), 31 अगस्त 2026 — आधिकारिक PDF यहां देखें
- हरियाणा विधानसभा, अतारांकित प्रश्न सूची (अंग्रेज़ी), 31 अगस्त 2026 — आधिकारिक PDF यहां देखें
- दैनिक जागरण, चंडीगढ़ संस्करण — “सहकारी बैंकों में 90% पद रिक्त, 886 पद भरने की चल रही प्रक्रिया” (प्रिंट रिपोर्ट, विस्तृत आंकड़ों का स्रोत; ऑनलाइन लिंक फिलहाल उपलब्ध नहीं)
- हरियाणा राज्य सहकारी एपेक्स बैंक लिमिटेड (हरको बैंक), आधिकारिक वेबसाइट — harcobank.org.in











