पंजाब के कपूरथला जिले के भोलाथ (Bholath) कस्बे में एक Cooperative Society के कार्यालय व भूमि से जुड़ी “कथित बिक्री” को लेकर विरोध-प्रदर्शन हुए हैं। कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैहरा और स्थानीय संगठनों ने भोलाथ चौक पर धरना देकर SDM को ज्ञापन सौंपा और बिक्री रद्द करने की मांग की।
रिपोर्टों के अनुसार यह केवल एक स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा सवाल है — पंजाब में रजिस्टर्ड कोई Cooperative Society अपनी जमीन या भवन आखिर बेच किस आधार पर सकती है, और ऐसा फैसला कौन ले सकता है?
यह लेख The Tribune की रिपोर्ट के आधार पर भोलाथ विवाद की पृष्ठभूमि बताने के साथ Punjab Co-operative Societies Act, 1961 और संबंधित Rules के तहत संपत्ति बेचने की कानूनी प्रक्रिया सरल भाषा में समझाता है — यह किसी पर आरोप नहीं, बल्कि उपलब्ध जानकारी व कानून की व्याख्या है।
क्या है Bholath Cooperative Society विवाद?
The Tribune की रिपोर्ट “MLA Khaira leads protest over ‘sale’ of Cooperative Society office in Bholath” के अनुसार, खैहरा के नेतृत्व में कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल (पुनर्जागरण) के महासचिव युवराज सिंह सहित कार्यकर्ताओं व स्थानीय निवासियों ने सोमवार सुबह करीब 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक Cooperative Society कार्यालय के बाहर धरना दिया, जिससे भोलाथ चौक पर यातायात बाधित रहा। प्रदर्शनकारियों ने SDM भोलाथ को ज्ञापन सौंपकर “कथित बिक्री” तुरंत रद्द करने की मांग की, जिसके बाद वे शांतिपूर्वक तितर-बितर हो गए।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार यह सोसायटी “Bholath Cooperative Multi-Purpose Agricultural Service Society” नाम से जानी जाती है, हालांकि आधिकारिक पंजीकृत नाम स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सका। 31 अगस्त को भी इसी मुद्दे पर भोलाथ चौक पर धरना दिया गया था, जिसमें कई स्थानीय राजनीतिक व सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
बिक्री हुई या अभी केवल आरोप? उपलब्ध जानकारी क्या कहती है
The Tribune ने अपनी हेडलाइन में “sale” शब्द को उद्धरण चिह्नों में रखा है — यानी इसे पुष्ट बिक्री के बजाय “कथित बिक्री” के रूप में पेश किया गया है। एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार सोसायटी परिसर की नीलामी वास्तव में हो चुकी है — करीब 55 लाख रुपये में, जबकि प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इसका बाजार मूल्य लगभग 2.5 करोड़ रुपये है और असली बोलीदाताओं को परिसर में प्रवेश से रोका गया।
वहीं SDM भोलाथ रूपिंदरपाल सिंह के हवाले से कहा गया है कि यह नीलामी अदालती आदेशों व नियमों के तहत हुई, संपत्ति कलेक्टर रेट से ऊपर बिकी, और सभी बोलीदाता मौजूद थे। आपत्ति होने पर हाईकोर्ट जाने की बात भी उन्होंने कही।
यह अंतर महत्वपूर्ण है — यदि नीलामी किसी अदालती आदेश या वसूली (recovery/execution) प्रक्रिया के तहत हुई, तो इसका कानूनी आधार सोसायटी द्वारा “स्वेच्छा से” संपत्ति बेचने से अलग है। यह स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी कि नीलामी किस विशिष्ट आदेश/डिक्री के तहत हुई, sale deed पंजीकृत हुआ या नहीं, और खरीदार कौन है।
Cooperative Society की संपत्ति आखिर किसकी होती है?
Act की धारा 30 के अनुसार, रजिस्टर्ड होने के बाद कोई भी Cooperative Society कानूनी रूप से स्वतंत्र “body corporate” बन जाती है — अपने नाम पर संपत्ति रख सकती है, अनुबंध कर सकती है, मुकदमा कर या झेल सकती है। यानी सोसायटी की संपत्ति न किसी सदस्य की, न किसी पदाधिकारी की निजी संपत्ति है — यह सामूहिक संपत्ति है, जिसे कानून-निर्धारित प्रक्रिया से ही बेचा जा सकता है।
क्या Managing Committee अकेले जमीन या भवन बेच सकती है?
यहीं सबसे ज्यादा भ्रम होता है। सोसायटी की संपत्ति होने का मतलब यह नहीं कि रोज़मर्रा प्रबंधन देखने वाली Managing Committee अपने विवेक से उसे बेच सकती है। धारा 23(1) स्पष्ट करती है कि किसी भी सहकारी समिति में “अंतिम अधिकार (final authority) सामान्य सभा (general body) में निहित होता है” — यानी बड़े, नीति-स्तरीय फैसलों में General Body ही सर्वोच्च है, Managing Committee नहीं।
यदि बिक्री किसी वसूली/execution प्रक्रिया के तहत हो रही हो — जैसा SDM के बयान से संकेत मिलता है — तो निर्णय Managing Committee या General Body का नहीं, बल्कि धारा 62-65 के तहत Registrar या नामित Sale/Recovery Officer का होता है, जो डिक्री/अवार्ड की वसूली के लिए संपत्ति कुर्क कर सार्वजनिक नीलामी से बेचता है। नियम 72 इस प्रक्रिया को नियंत्रित करता है — तीस दिन पहले सार्वजनिक सूचना (proclamation), और बोली अनुचित रूप से कम लगने पर उसे अस्वीकार करने का अधिकार। भोलाथ में ठीक यही “कम बोली” और “पारदर्शिता” के मुद्दे उठाए गए हैं।
स्पष्ट रहे — Act व Rules में सामान्य (वसूली से बाहर) स्वैच्छिक बिक्री के लिए किसी धारा में सीधे “General Body Resolution अनिवार्य है” ऐसा उल्लेख स्वतंत्र रूप से नहीं मिला। लेकिन धारा 23(1) के तहत General Body की व्यापक “final authority” को देखते हुए, संपत्ति-बिक्री जैसे बड़े निर्णय सामान्यतः उसके अनुमोदन के दायरे में माने जाते हैं — यह governance का सामान्य सिद्धांत है, किसी स्पष्ट धारा-आधारित निर्णय के बराबर नहीं।
General Body की क्या भूमिका है?
General Body में सोसायटी के सभी पंजीकृत सदस्य शामिल होते हैं — यह सोसायटी की “मालिक” इकाई है। धारा 24 के अनुसार यही वार्षिक कार्यक्रम व बजट मंजूर करती है, Committee सदस्य चुनती है, ऑडिट रिपोर्ट की समीक्षा करती है, और मुनाफे के बंटवारे जैसे फैसले करती है। Managing Committee का काम दिन-प्रतिदिन का प्रशासन चलाना है — बड़े फैसलों में उसकी भूमिका General Body द्वारा तय सीमाओं के भीतर ही होती है। सीधी भाषा में, General Body “मालिक” है और Committee “प्रबंधक” — कोई प्रबंधक मालिक की सहमति के बिना बड़ी संपत्ति नहीं बेच सकता।
Registrar Cooperative Societies की अनुमति कब जरूरी हो सकती है?
Registrar को Act के तहत सोसायटी की निगरानी के व्यापक अधिकार प्राप्त हैं। धारा 49 के तहत वह किसी सोसायटी का निरीक्षण कर गंभीर अनियमितता में रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले सकता है। धारा 50 के तहत वह स्वयं या सदस्य के आवेदन पर जांच बैठा सकता है, बहीखाते देख सकता है और लोगों को तलब कर सकता है। यदि Committee लापरवाही बरतती है, तो धारा 27 के तहत Registrar उसे भंग कर प्रशासक नियुक्त कर सकता है।
नियम 37 के तहत जमीन/भवन की खरीद या निर्माण-निवेश के लिए Registrar की “पूर्व स्वीकृति” जरूरी बताई गई है — यह प्रावधान मुख्यतः खरीद पर लागू होता प्रतीत होता है, बेचने पर नहीं। बिक्री में Registrar की भूमिका ज्यादातर निगरानी, शिकायत पर जांच, और वसूली-नीलामी हो तो उसे संचालित करने तक सीमित समझी जा सकती है — जब तक सोसायटी के bye-laws में अलग शर्त न हो, जो इस रिपोर्ट के लिए स्वतंत्र रूप से उपलब्ध नहीं हो सकीं।
Cooperative property की बिक्री में transparency क्यों महत्वपूर्ण है?
नियम 72 — जो वसूली-नीलामी पर लागू होता है — सार्वजनिक नीलामी, तीस दिन पहले सूचना, संपत्ति का पूरा विवरण, और अनुचित रूप से कम बोली अस्वीकार करने जैसी सुरक्षा तय करता है। यानी जहां कानून नीलामी-प्रक्रिया तय करता है, वहां पारदर्शिता कानूनी अनिवार्यता है, केवल अच्छी प्रशासनिक आदत नहीं। सही valuation, खुली बोली, और बिक्री की आय को खातों में पारदर्शी दर्ज करना governance की दृष्टि से जरूरी माना जाता है — लेकिन सामान्य (गैर-वसूली) स्वैच्छिक बिक्री के लिए “हमेशा open tender ही अनिवार्य है” ऐसा हर स्थिति में कानून में समान रूप से स्पष्ट नहीं मिला; यह best practice हो सकती है, पर इसे mandatory requirement के रूप में पुष्टि नहीं किया जा सका।
Bholath मामले में किन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं?
अंतिम राय बनाने से पहले इन सवालों के जवाब सार्वजनिक दस्तावेजों से मिलना जरूरी है:
- विवादित संपत्ति का पंजीकृत मालिक कौन है — सोसायटी स्वयं या कोई अन्य विभाग?
- बिक्री/नीलामी किस कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई — General Body का स्वैच्छिक प्रस्ताव या वसूली/execution कार्यवाही?
- General Body की मंजूरी ली गई थी या नहीं, और उसका रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं?
- Registrar Cooperative Societies की अनुमति ली गई थी या नहीं?
- संपत्ति का मूल्यांकन किसने और किस आधार पर किया?
- खरीदार कौन है?
- बिक्री की विधि क्या थी — सार्वजनिक नीलामी, निजी बिक्री, या टेंडर?
- बिक्री विलेख (sale deed) पंजीकृत हुआ है या नहीं?
- बिक्री से प्राप्त राशि कहां जमा हुई है या होने वाली है?
यदि सदस्यों को आपत्ति हो तो वे क्या कर सकते हैं?
यदि सदस्यों को लगता है कि बिक्री bye-laws या कानून के विरुद्ध हुई है, तो कुछ रास्ते उपलब्ध हैं। सदस्य General Body या Special General Meeting बुलाने की मांग कर सकते हैं। धारा 50 के तहत वे Registrar के समक्ष शिकायत देकर जांच व रिकॉर्ड निरीक्षण की मांग कर सकते हैं। सदस्यों और सोसायटी/प्रबंधन के बीच विवाद धारा 55-56 के अनुसार सिविल कोर्ट के बजाय सीधे Registrar के पास भेजे जाते हैं — कानून कहता है ऐसे मामलों में सिविल कोर्ट को अधिकार क्षेत्र प्राप्त नहीं है; Registrar स्वयं फैसला करता है या मामला किसी अधिकृत व्यक्ति/मध्यस्थ को भेजता है। नीलामी/वसूली से जुड़े मामलों में, जैसा SDM ने भी कहा, प्रभावित पक्ष हाईकोर्ट में रिट याचिका के जरिए न्यायिक समीक्षा की मांग कर सकते हैं। भोलाथ में स्थानीय संगठनों ने भी हाईकोर्ट जाने की मंशा जताई है, हालांकि किसी याचिका के दाखिल होने की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं थी।
भोलाथ जैसी परिस्थिति पर सीधे लागू होने वाला और स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जा सकने वाला कोई Punjab & Haryana High Court या Supreme Court निर्णय सार्वजनिक स्रोतों में नहीं मिल सका, इसलिए इस लेख में केवल वही विधिक ढांचा शामिल है जो Act और Rules के पाठ से सत्यापित हो सका।
निष्कर्ष
भोलाथ में Cooperative Society कार्यालय/भूमि की कथित बिक्री को लेकर विरोध एक वास्तविक और गंभीर स्थानीय मुद्दा है, जिसमें कीमत, पारदर्शिता और प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। लेकिन उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि बिक्री कानून के विरुद्ध हुई, या किसी अधिकारी, दल अथवा प्रबंधन ने जानबूझकर गड़बड़ी की। कानून स्पष्ट करता है कि सोसायटी की संपत्ति पर अंतिम अधिकार General Body का होता है, लेकिन नीलामी वसूली/execution प्रक्रिया के तहत हुई हो तो वह Registrar या Recovery Officer द्वारा नियंत्रित होती है — दोनों ही स्थितियों में कानून पारदर्शिता व निर्धारित प्रक्रिया की मांग करता है।
अंतिम कानूनी आकलन तभी संभव होगा जब बिक्री/नीलामी प्रस्ताव, General Body की कार्यवाही, Registrar की अनुमति, मूल्यांकन दस्तावेज और sale deed/नीलामी रिकॉर्ड जैसे प्राथमिक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हों।
स्रोत एवं संदर्भ
- MLA Khaira leads protest over ‘sale’ of Cooperative Society office in Bholath — The Tribune
- भुलत्थ में कोऑपरेटिव सोसायटी कार्यालय की नीलामी पर खैहरा ने उठाए सवाल — Amar Ujala
- भोलाथ सहकारी सोसायटी की भूमि को लेकर धरना — Punjab Jagran
- The Punjab Co-operative Societies Act, 1961 — पूर्ण पाठ (India Code, आधिकारिक)
- The Punjab Co-operative Societies Rules, 1963 — पूर्ण पाठ
- Department of Cooperation, Government of Punjab — आधिकारिक वेबसाइट
नोट: यह लेख उपलब्ध सार्वजनिक समाचार रिपोर्टों, कानून के पाठ और अधिकारिक बयानों पर आधारित है। जहां तथ्य स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सके, वहां इसे स्पष्ट रूप से बताया गया है। यह किसी भी व्यक्ति, अधिकारी, सोसायटी प्रबंधन या राजनीतिक दल पर आरोप नहीं है।
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