हरियाणा सहकारिता विभाग की 8 फेडरेशनों — हैफेड, हरियाणा डेयरी डेवलपमेंट कोऑपरेटिव फेडरेशन, सहकारी बैंक और शुगर मिल समेत — के कर्मचारियों को एकजुट करने के लिए 12 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजे कुरुक्षेत्र शहर में एक बैठक बुलाई गई है। यह जानकारी हरियाणा मिल्क फूड श्रमिक संघ (पंजीकरण संख्या 1678, दिनांक 29-11-1999) द्वारा सार्वजनिक रूप से प्रसारित एक पोस्टर/आह्वान में दी गई है, जिसे संघ के प्रदेश अध्यक्ष बताए गए भूपिंदर सिंह संधू के नाम से जारी किया गया है। स्पष्ट कर दें कि यह किसी सरकारी विभाग की प्रेस विज्ञप्ति नहीं, बल्कि संगठन का अपना आह्वान है, और Sahakar Watch को इस विशिष्ट बैठक या इसकी तैयारी की स्वतंत्र मीडिया रिपोर्टिंग अभी तक नहीं मिल सकी है।
पोस्टर के मुताबिक, इस बैठक में सभी फेडरेशनों को साथ लेकर एक “संयुक्त मोर्चा” गठित किया जाएगा और सभी की सहमति से हड़ताल की तारीख तय की जाएगी। संगठन ने दो प्रमुख मांगें रखी हैं — सभी फेडरेशनों में कर्मचारियों के लिए Job Security लागू करना, और फेडरेशनों को ठेकेदारी प्रथा से मुक्त करना — साथ ही सरकार को 15 दिन का अंतिम अल्टीमेटम देने की बात भी कही गई है।
कौन हैं भूपिंदर सिंह संधू और हरियाणा मिल्क फूड श्रमिक संघ?
पोस्टर के अनुसार भूपिंदर सिंह संधू हरियाणा मिल्क फूड श्रमिक संघ के प्रदेश अध्यक्ष हैं और यह संघ भारतीय मजदूर संघ (BMS) से जुड़ा है। यह संगठन वाकई मौजूद है — मार्च 2026 में अंबाला में इसी संघ की जिला इकाई के गठन की Amar Ujala की रिपोर्ट में संघ के राज्य महामंत्री हवा सिंह मेहला और BMS के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पवन कुमार की मौजूदगी दर्ज है। हालांकि उस रिपोर्ट में भूपिंदर सिंह संधू का नाम या “प्रदेश अध्यक्ष” पद स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सका — यह जानकारी फिलहाल सिर्फ संगठन के अपने पोस्टर पर आधारित है।
दो प्रमुख मांगें — क्या Job Security का मुद्दा असल में अनसुलझा है?
संगठन की पहली मांग — सभी फेडरेशनों में Job Security — को स्वतंत्र आंकड़ों से परखा जा सकता है। हरियाणा में संविदा कर्मचारियों को स्थायित्व देने वाले Haryana Contractual Employees (Security of Service) Act, 2024 का दायरा जुलाई 2026 में बढ़ाया गया, जब चार नई श्रेणियों — स्कूल शिक्षा विभाग के कंप्यूटर फैकल्टी व लैब अटेंडेंट, IT एवं विज्ञान विभाग (हरट्रॉन को छोड़कर) और हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग के कर्मचारियों — को इसमें शामिल किया गया। सहकारिता क्षेत्र — यानी PACS, HAFED, डेयरी फेडरेशन, शुगर मिल या सहकारी बैंकों के कर्मचारी — इस विस्तार में शामिल नहीं थे। Sahakar Watch इस सवाल पर पहले भी विस्तार से लिख चुका है कि क्या PACS और Cooperative Societies के कर्मचारियों को इस कानून का लाभ मिलेगा — यानी संगठन की मुख्य मांग किसी काल्पनिक शिकायत पर नहीं, बल्कि एक वास्तविक और अब तक अनसुलझे कानूनी सवाल पर टिकी है।
यह मांग किसी अकेले संगठन तक सीमित भी नहीं है। 17 अगस्त 2026 को रोहतक में भारतीय मजदूर संघ ने मुख्यमंत्री को सौंपे एक ज्ञापन में साफ मांग की थी कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम के कर्मचारियों के साथ-साथ सहकारी क्षेत्र के कर्मचारियों को भी Job Security के दायरे में लाया जाए। इससे एक हफ्ते पहले चरखी दादरी में भी BMS ने वेतन, ESIC, EPF और सेवा सुरक्षा से जुड़ी 11 सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन किया था। यानी हरियाणा मिल्क फूड श्रमिक संघ का आह्वान, राज्यभर में पहले से चल रहे एक व्यापक BMS अभियान की ही एक कड़ी जान पड़ता है।
तीन मांग पत्र और 15 दिन का अल्टीमेटम — दावा अभी असत्यापित
पोस्टर में यह भी दावा किया गया है कि हरियाणा मिल्क फूड श्रमिक संघ ने सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव को 14 जुलाई, 1 अगस्त और 1 सितंबर 2026 — तीन अलग-अलग तारीखों पर मांग पत्र सौंपे हैं, और यदि संगठन को बातचीत के लिए नहीं बुलाया गया तो आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी। इन तीनों पत्रों की कोई स्वतंत्र या सार्वजनिक प्रति, अथवा इनकी कोई मीडिया रिपोर्ट, फिलहाल उपलब्ध नहीं मिली — इसलिए यह दावा अभी केवल संगठन के अपने बयान पर आधारित माना जाना चाहिए, न कि सत्यापित तथ्य के रूप में।
सहकारी क्षेत्र में कर्मचारी असंतोष नया नहीं
हरियाणा के सहकारी क्षेत्र में कर्मचारी संगठनों की सक्रियता का यह पहला उदाहरण नहीं है। HAFED में धान खरीद कमीशन ₹5.80 से घटाकर ₹1.33 किए जाने पर Marketing Societies और Employees Union के विरोध के बाद Registrar को हस्तक्षेप करना पड़ा था, जिसका पूरा घटनाक्रम Sahakar Watch पहले दर्ज कर चुका है। दूसरी ओर, सहकारी बैंकों में विधानसभा के जवाबों के मुताबिक लगभग 90% तक पद खाली पड़े हैं, और HAFED की नई Work Allocation Policy पर भी सवाल उठते रहे हैं — यह ढांचागत पृष्ठभूमि बताती है कि स्थायी भर्ती की कमी और ठेके पर काम की प्रथा सहकारी क्षेत्र में पहले से चर्चा में रहे मुद्दे हैं।
निष्कर्ष
हरियाणा मिल्क फूड श्रमिक संघ का यह आह्वान अभी एक प्रस्तावित बैठक की सूचना भर है — न तो संयुक्त मोर्चे का औपचारिक गठन हुआ है, न हड़ताल की तारीख तय हुई है, और न ही सरकार की ओर से इस पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया आई है। साथ ही, तीन मांग पत्रों की तारीखें और भूपिंदर सिंह संधू का पद-परिचय अभी संगठन के अपने बयान पर टिका है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी। लेकिन इसके पीछे की मूल शिकायत — कि हरियाणा के सहकारी क्षेत्र के कर्मचारी अब तक Job Security कानून के दायरे से बाहर हैं — जुलाई 2026 के आधिकारिक विस्तार आदेश और राज्यभर में चल रहे BMS के अन्य ज्ञापनों से भी पुष्ट होती दिखती है। Sahakar Watch 12 सितंबर की कुरुक्षेत्र बैठक और उसके बाद की घटनाओं पर नज़र रखेगा।
स्रोत सूची (Source List)
- हरियाणा मिल्क फूड श्रमिक संघ द्वारा जारी सार्वजनिक पोस्टर/आह्वान (12 सितंबर 2026 कुरुक्षेत्र बैठक की सूचना; संगठन का अपना प्रचार सामग्री है, कोई वेब लिंक उपलब्ध नहीं)
- Amar Ujala — अंबाला में हरियाणा मिल्क फूड यूनिट की जिला इकाई का गठन (मार्च 2026)
- Amar Ujala — हरियाणा में सेवा सुरक्षा का दायरा बढ़ा, चार नई श्रेणियां शामिल (जुलाई 2026)
- Amar Ujala — रोहतक में भारतीय मजदूर संघ का ज्ञापन, सहकारी क्षेत्र के लिए भी Job Security की मांग (अगस्त 2026)
- Amar Ujala — चरखी दादरी में भारतीय मजदूर संघ का 11 सूत्री मांगों को लेकर प्रदर्शन (अगस्त 2026)
- The Haryana Contractual Employees (Security of Service) Act, 2024 — पूर्ण पाठ (PRS India)
- Sahakar Watch — क्या हरियाणा की PACS, Cooperative Societies के कर्मचारियों को भी मिलेगा Job Security Act का लाभ?
- Sahakar Watch — HAFED धान खरीद कमीशन विवाद: ₹5.80 से ₹1.33 तक
- Sahakar Watch — हरियाणा के सहकारी बैंकों में खाली पद 90% तक
- Sahakar Watch — HAFED की नई Work Allocation Policy: कौन-सी Cooperative Society ले सकती है काम?












