हरियाणा की किसी भी Primary Agricultural Credit Society (PACS) — जिसे राज्य के दस्तावेज़ों में अक्सर Primary Agriculture Cooperative Society भी लिखा जाता है — में सचिव, कैशियर या क्लर्क जैसे पदों पर कौन नियुक्त होगा, कैसे नियुक्त होगा, और अगर नियुक्ति या नौकरी को लेकर विवाद हो जाए तो वह कहां सुलझेगा — यह सवाल आज भी कई सोसाइटी पदाधिकारियों, कर्मचारियों और सदस्यों के लिए उलझा हुआ है। हाल के महीनों में इसकी वजह भी साफ़ है: 4 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार की नई PACS HR Policy आई, राज्य में पहले से Haryana Contractual Employees (Security of Service) Act, 2024 और PACS/PCCS Service Rules, 2014 दोनों लागू हैं, और मई 2026 में कुरुक्षेत्र के एक PACS में कथित अनधिकृत भर्ती पर मंत्री ने खुद FIR दर्ज कराने का आदेश दिया। यानी यह विषय अब सिर्फ theoretical नहीं, बल्कि जमीन पर सक्रिय मुद्दा है।
यह लेख हरियाणा के PACS से जुड़े service rules, नियुक्ति प्रक्रिया, विवाद निपटान तंत्र और हाल के real case studies को एक जगह, सरल भाषा में समझाता है — ताकि PACS का कोई भी कर्मचारी, सचिव, प्रबंध समिति सदस्य या सामान्य सदस्य बिना कई अलग-अलग सरकारी वेबसाइट या कोर्ट जजमेंट खंगाले पूरी तस्वीर समझ सके।
एक नजर में
- हरियाणा में PACS कर्मचारियों की सेवा-शर्तें दो अलग layer से तय होती हैं: राज्य का अपना PACS/PCCS Service Rules ढांचा (2014, कई संशोधनों सहित) और अब केंद्र की नई Model PACS HR Policy (4 अगस्त 2026)।
- Haryana Co-operative Societies Rules, 1989 के Rule 29 के अनुसार हर सोसाइटी को model service rules के आधार पर अपने कर्मचारियों की भर्ती और सेवा-शर्तें तय करनी होती हैं, और इन्हें Registrar की मंज़ूरी चाहिए।
- नियुक्ति का अधिकार सोसाइटी की प्रबंध समिति के पास होता है, लेकिन वह अपनी मर्जी से नियम नहीं बना सकती — स्वीकृत service rules के दायरे में ही काम करना होता है।
- कर्मचारी सोसाइटी की प्रबंध समिति का सदस्य नहीं बन सकता (Rule 27), सिवाय producer society के मामलों के।
- सेवा-विवाद (जैसे बर्खास्तगी, वेतन विवाद) आमतौर पर Haryana Co-operative Societies Act, 1984 की Section 102 के तहत Registrar के पास arbitration के लिए जाते हैं — लेकिन 1986 के एक ऐतिहासिक Punjab & Haryana High Court फैसले के अनुसार, जो कर्मचारी Industrial Disputes Act के तहत “वर्कमैन” की श्रेणी में आते हैं, वे Labour Court भी जा सकते हैं।
- जनवरी 2026 के एक High Court फैसले (Multan Singh v. State of Haryana) के बाद यह और स्पष्ट हुआ कि cooperative society को सीधे “सरकारी संस्था” मानकर हर विवाद में Article 226 की writ याचिका दायर करना आसान नहीं रहा।
- मई 2026 में कुरुक्षेत्र के Kharindwa Deeg PACS में अनधिकृत भर्ती के आरोप पर मंत्री ने सीधे FIR दर्ज कराने का निर्देश दिया — यह दिखाता है कि नियुक्ति नियमों का उल्लंघन अब गंभीरता से लिया जा रहा है।
- PACS/PCCS Employees (Compassionate Financial Assistance or Appointment) Policy, 2022 के तहत मृत कर्मचारी के परिवार को सहायता या नियुक्ति का प्रावधान है, जो disputes का एक आम स्रोत रहा है।
पूरा संदर्भ: यह ढांचा बना कैसे
PACS किसी अकेले कानून से नहीं चलती। तीन अलग-अलग स्तर पर बने नियम मिलकर इसका ढांचा बनाते हैं — Haryana Co-operative Societies Act, 1984 (मूल कानून), उसके अंतर्गत बने Haryana Co-operative Societies Rules, 1989 (सामान्य नियम, जो हर तरह की सोसाइटी पर लागू होते हैं), और खासतौर पर PACS/PCCS के लिए बनाए गए अलग Service Rules, जिन्हें राज्य के Cooperation Department ने समय-समय पर संशोधित किया है।
Rules, 1989 का Rule 29 यह साफ करता है कि सेवा-शर्तों को लेकर कोई एक समान, केंद्रीकृत नियम-पुस्तिका पूरे राज्य पर सीधे लागू नहीं होती। इसकी जगह व्यवस्था यह है कि हर सोसाइटी अपने खुद के rules बनाए — लेकिन मनमाने ढंग से नहीं, बल्कि सरकार/Registrar द्वारा तैयार model service rules के अनुसार — और उन्हें Registrar से मंज़ूर कराए। व्यवहार में, हरियाणा सरकार के Cooperation Department ने PACS के लिए एक साझा “PACS (Primary Agriculture Cooperative Societies) Service Rules” दस्तावेज़ प्रकाशित किया हुआ है, जिसे राज्य की सभी PACS एक तरह के मॉडल की तरह अपनाती हैं। इसमें समय-समय पर संशोधन होते रहे हैं — जिनमें 2014 का Second Amendment, 2022 का Third Amendment (जो असल में PACS/PCCS Employees Compassionate Financial Assistance or Appointment Policy है), और उसके बाद का Fifth Amendment शामिल है।
इसके समानांतर, अधिनियम की Section 37 एक अलग व्यवस्था — “common cadre” — की भी बात करती है, जिसके तहत कुछ श्रेणी की cadre societies के कर्मचारियों की भर्ती और सेवा-शर्तों के नियम खुद Registrar, संबंधित cadre society से सलाह लेकर बना सकता है। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार अधिकतर व्यक्तिगत PACS का स्टाफ इस common cadre के बजाय ऊपर बताए गए model service rules वाले ढांचे के तहत ही आता है, लेकिन इस बिंदु पर सोसाइटी-स्तर पर स्थिति भिन्न हो सकती है, इसलिए अपनी सोसाइटी के bye-laws और नवीनतम Registrar circular से इसकी पुष्टि करना उचित रहेगा।
समयरेखा
| तारीख | घटना/दस्तावेज़ | महत्व |
|---|---|---|
| 1984 | Haryana Co-operative Societies Act लागू | PACS सहित सभी सहकारी समितियों का मूल कानून; Section 37 (cadre) और Section 102 (disputes) जैसे प्रावधान इसी में हैं |
| 1989 | Haryana Co-operative Societies Rules अधिसूचित | Rule 29 के तहत हर सोसाइटी को Registrar-अनुमोदित service rules बनाना अनिवार्य |
| 14 अगस्त 1986 | Sonepat Co-operative Sugar Mills Ltd. v. Presiding Officer, Labour Court (P&H High Court) | तय हुआ कि “वर्कमैन” श्रेणी के सहकारी कर्मचारियों के लिए Labour Court का रास्ता भी खुला रहेगा, सिर्फ Section 102 का arbitration अनिवार्य नहीं |
| 2014 | PACS/PCCS Service Rules में Second Amendment | PACS स्टाफ ढांचे का अद्यतन |
| 2022 | Third Amendment — Compassionate Financial Assistance or Appointment Policy | मृत कर्मचारी के आश्रित को सहायता/नियुक्ति की नीति स्पष्ट हुई |
| 30 जनवरी 2026 | Multan Singh v. State of Haryana, CWP-7283-2023 (P&H High Court) | Cooperative society को Article 12 के तहत “State” मानने से इनकार — writ याचिका का रास्ता सीमित हुआ |
| 30 मई 2026 | Kharindwa Deeg PACS भर्ती विवाद, कुरुक्षेत्र | मंत्री कृष्ण पंवार ने अनधिकृत भर्ती पर सीधे FIR का आदेश दिया |
| 4 अगस्त 2026 | केंद्र सरकार की नई Model PACS HR Policy अधिसूचित | राष्ट्रीय स्तर पर staffing pattern, भर्ती और वेतन का नया ढांचा प्रस्तावित |
नवीनतम स्थिति (सितंबर 2026 तक)
फिलहाल हरियाणा में PACS कर्मचारियों की सेवा-शर्तें राज्य के अपने PACS/PCCS Service Rules के तहत ही चल रही हैं। केंद्र सरकार की Model PACS HR Policy (4 अगस्त 2026) अभी एक framework/सुझाव के स्तर पर है — जैसा SahakarWatch की PACS की नई HR Policy से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट में बताया गया है, इसका मकसद कारोबार के हिसाब से स्टाफ, भर्ती, वेतन और प्रशिक्षण को एक व्यवस्थित ढांचे में लाना है। लेकिन जब तक हरियाणा सरकार इस मॉडल नीति को अपने राज्य-विशेष Rules में औपचारिक रूप से नहीं ढालती, राज्य के मौजूदा 2014 वाले PACS/PCCS Service Rules ही कानूनी रूप से लागू माने जाएंगे। इस बिंदु पर हरियाणा सरकार की तरफ से कोई अलग अधिसूचना अभी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, इसलिए दोनों ढांचे फिलहाल साथ-साथ मौजूद हैं।
इसके अलावा, PACS सहित सभी सहकारी संस्थाओं के कर्मचारियों पर Haryana Contractual Employees (Security of Service) Act, 2024 लागू होगा या नहीं — यह सवाल भी अभी तक पूरी तरह सुलझा नहीं है। SahakarWatch की इस विषय पर अलग विस्तृत रिपोर्ट में बताया गया है कि कानून, उसके Rules और High Court के हाल के फैसलों को साथ रखकर देखने पर स्थिति स्पष्ट नहीं है और आगे स्पष्टीकरण की ज़रूरत है।
कानूनी आधार: कौन-सा नियम कहां से आता है
नीचे दी गई तालिका बताती है कि PACS की सेवा-शर्तों से जुड़ा हर बड़ा नियम असल में किस दस्तावेज़ से आता है।
| प्रावधान | स्रोत दस्तावेज़ | संक्षेप में क्या कहता है |
|---|---|---|
| Section 37 | Haryana Co-operative Societies Act, 1984 | कुछ cadre societies के कर्मचारियों की भर्ती व सेवा-शर्तों के नियम Registrar, cadre society से सलाह लेकर बना सकता है |
| Section 102(1) | Haryana Co-operative Societies Act, 1984 | सोसाइटी के गठन, प्रबंधन या कारोबार से जुड़े विवाद Registrar के पास arbitration के लिए जाते हैं, सामान्यतः अन्य अदालतों का क्षेत्राधिकार नहीं रहता |
| Rule 27(i) | Haryana Co-operative Societies Rules, 1989 | सोसाइटी का वेतनभोगी कर्मचारी प्रबंध समिति का सदस्य नहीं बन सकता (producer society को छोड़कर) |
| Rule 29 | Haryana Co-operative Societies Rules, 1989 | हर सोसाइटी को model service rules के आधार पर, Registrar की मंज़ूरी से अपने कर्मचारियों की भर्ती व सेवा-शर्तें तय करनी होंगी |
| Rule 30 | Haryana Co-operative Societies Rules, 1989 | पदाधिकारियों के लिए हितों के टकराव पर रोक, पर सोसाइटी द्वारा कर्मचारी को दिया गया आवासीय आवास इससे अलग रखा गया |
| PACS/PCCS Service Rules (2014 व संशोधन) | हरियाणा सरकार, Cooperation Department | PACS स्टाफ की भर्ती, पद-संरचना व सेवा-शर्तों का विस्तृत, PACS-विशेष ढांचा |
| Compassionate Appointment Policy, 2022 (Third Amendment) | हरियाणा सरकार, Cooperation Department | कर्मचारी की सेवाकाल में मृत्यु पर आश्रित को वित्तीय सहायता या नियुक्ति का प्रावधान |
| Model PACS HR Policy | केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय, 4 अगस्त 2026 | राष्ट्रीय स्तर पर स्टाफ संख्या, भर्ती, वेतन व प्रशिक्षण का सुझाया गया नया ढांचा |
| Haryana Contractual Employees (Security of Service) Act, 2024 | हरियाणा सरकार | ठेका कर्मचारियों को सेवा सुरक्षा; PACS कर्मचारियों पर लागू होने का सवाल अभी अस्पष्ट |
एक ज़रूरी सावधानी: PACS/PCCS Service Rules और उसके संशोधनों का मूल दस्तावेज़ हरियाणा सरकार की वेबसाइट पर scanned PDF के रूप में उपलब्ध है, जिसमें search-योग्य टेक्स्ट नहीं है। इसलिए हर व्यक्तिगत clause (जैसे न्यूनतम योग्यता या probation अवधि की सटीक शब्दावली) की पुष्टि इस लेख में उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों से पूरी तरह नहीं हो सकी — दस्तावेज़ के शीर्षक, तारीख और संशोधन-क्रम की पुष्टि Cooperation Department, हरियाणा की आधिकारिक Acts/Rules सूची से की गई है, पर पूरी क्लॉज़-स्तर जानकारी के लिए मूल PDF या संबंधित PACS के Registrar-अनुमोदित bye-laws देखना ज़रूरी रहेगा।
नियुक्ति प्रक्रिया व्यवहार में कैसे काम करती है
- पद की ज़रूरत तय होना। PACS की प्रबंध समिति यह तय करती है कि किस पद (सचिव, कैशियर, क्लर्क आदि) पर भर्ती चाहिए — व्यवहार में यह सोसाइटी के कारोबार के आकार और मौजूदा स्टाफ पर निर्भर करता है, जैसा नई national HR Policy भी सुझाती है।
- स्वीकृत Service Rules के दायरे में विज्ञापन/चयन। भर्ती प्रक्रिया मनमानी नहीं हो सकती — उसे PACS Service Rules में तय योग्यता, आयु-सीमा और चयन प्रक्रिया के अनुसार ही चलना होता है।
- प्रबंध समिति की मंज़ूरी। अंतिम चयन को प्रबंध समिति अनुमोदित करती है, सोसाइटी के bye-laws के अनुसार।
- Registrar/संबंधित प्राधिकारी की निगरानी। चूंकि सेवा-शर्तें खुद Registrar-अनुमोदित rules पर आधारित होती हैं, अनियमितता होने पर Registrar या Assistant Registrar कार्रवाई कर सकते हैं — जैसा मई 2026 के Kharindwa Deeg मामले में देखा गया।
- विशेष परिस्थिति: Compassionate Appointment। अगर मौजूदा कर्मचारी की सेवाकाल में मृत्यु हो जाए, तो 2022 की नीति के तहत परिवार को वित्तीय सहायता या, तय शर्तों पर, नियुक्ति का विकल्प मिल सकता है — यह सामान्य भर्ती प्रक्रिया से अलग रास्ता है।
पात्रता व लागू होने का दायरा
- यह ढांचा हरियाणा में पंजीकृत PACS (Primary Agricultural Credit Societies) के वेतनभोगी कर्मचारियों — सचिव, कैशियर, क्लर्क, सहायक स्टाफ — पर लागू होता है।
- यह प्रबंध समिति के निर्वाचित सदस्यों (अध्यक्ष, सदस्य) पर लागू नहीं होता — वे कर्मचारी नहीं, बल्कि सोसाइटी के पदाधिकारी होते हैं।
- CM-PACS (Comprehensive Multi-Purpose Activities Cooperative Society) पर यह अलग ही व्यवस्था है — CM-PACS और PACS दोनों की कानूनी स्थिति, गठन और नियम अलग हैं, इसलिए CM-PACS के staffing/HR प्रावधानों को इस लेख की जानकारी के साथ न जोड़ें। CM-PACS पंजीकरण व कामकाज पर SahakarWatch की अलग विस्तृत सीरीज़ उपलब्ध है।
- जो कर्मचारी सहकारी बैंक (जैसे HARCO Bank या ज़िला केंद्रीय सहकारी बैंक) में सीधे कार्यरत हैं, उन पर बैंक की अपनी सेवा-शर्तें लागू होती हैं, जो PACS स्टाफ के नियमों से अलग हैं — हरियाणा के सहकारी बैंकों में खाली पदों की स्थिति पर SahakarWatch की यह रिपोर्ट देखी जा सकती है।
विवाद कहां और कैसे सुलझते हैं
यह इस विषय का सबसे उलझा हुआ, पर सबसे व्यावहारिक हिस्सा है — अगर नियुक्ति, बर्खास्तगी, वेतन या प्रमोशन को लेकर विवाद हो जाए, तो कर्मचारी या सोसाइटी किस मंच पर जाएं?
Section 102(1) सामान्य नियम तय करती है: सोसाइटी के गठन, प्रबंधन या कारोबार से जुड़ा कोई भी विवाद Registrar के पास arbitration के लिए जाना चाहिए, और सामान्यतः दूसरी अदालतों का क्षेत्राधिकार नहीं रहता। लेकिन 14 अगस्त 1986 के Sonepat Co-operative Sugar Mills Ltd. v. Presiding Officer, Labour Court मामले में Punjab & Haryana High Court ने इस सामान्य नियम में एक महत्वपूर्ण सीमा तय की। कोर्ट ने पाया कि जो कर्मचारी Industrial Disputes Act, 1947 के तहत “वर्कमैन” की परिभाषा में आते हैं, उनके लिए Section 102 का दायरा अनिवार्य रूप से Labour Court का रास्ता बंद नहीं कर सकता — क्योंकि विशेष Industrial Disputes Act को सामान्य सहकारी कानून के प्रावधान से दरकिनार नहीं किया जा सकता, और वैकल्पिक arbitration तंत्र में समुचित सुरक्षा-उपाय (जैसे योग्य निर्णायक) मौजूद नहीं पाए गए। नतीजतन, व्यवहार में PACS के “वर्कमैन” श्रेणी के कर्मचारी (जैसे क्लर्क-स्तर स्टाफ) के लिए Labour Court और Registrar arbitration — दोनों संभावित रास्ते बन जाते हैं, जबकि प्रबंधकीय/पर्यवेक्षी स्तर के विवाद अमूमन Section 102 के दायरे में ही रहते हैं।
इस पूरी तस्वीर में एक और परत जनवरी 2026 में जुड़ी। Multan Singh v. State of Haryana, CWP-7283-2023 मामले में Punjab & Haryana High Court ने 30 जनवरी 2026 को यह स्पष्ट किया कि cooperative society (उस मामले में The Pundri Cooperative Marketing-cum-Processing Society Ltd.) को Article 12 के अर्थ में सीधे “State”/सरकारी संस्था नहीं माना जा सकता। इसका सीधा असर यह है कि सोसाइटी के खिलाफ सीधे Article 226 की writ याचिका दायर करना आसान नहीं रहा — इस फैसले के पूरे कानूनी विश्लेषण और उसके दूरगामी असर पर SahakarWatch की यह विस्तृत रिपोर्ट पढ़ी जा सकती है। व्यावहारिक असर यह है कि PACS कर्मचारी को अपनी सेवा से जुड़ी शिकायत के लिए सामान्यतः पहले Section 102 arbitration या (लागू होने पर) Labour Court का रास्ता अपनाना बेहतर रहेगा, न कि सीधे High Court की writ याचिका — हालांकि असाधारण परिस्थितियों में यह विकल्प पूरी तरह बंद नहीं है।
तुलना के लिए एक पड़ोसी राज्य का उदाहरण उपयोगी है, भले ही वह सीधे हरियाणा कानून पर लागू न हो। 3 अप्रैल 2026 को Samarjit Singh v. State of Punjab (CWP-1422-2026 व संबद्ध मामले) में Punjab & Haryana High Court ने पंजाब के 1997 के उस नियम को रद्द कर दिया, जो सहकारी समितियों के कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों जैसा retiral benefit (ग्रेच्युटी, leave encashment) देना अनिवार्य बनाता था। कोर्ट ने कहा कि Punjab Cooperative Societies Act, 1961 के तहत नियम बनाने का अधिकार सिर्फ राज्य सरकार को था, Registrar को यह अधिकार आगे सौंपना (sub-delegation) कानूनन सही नहीं था। यह मामला हरियाणा के अपने PACS/PCCS Service Rules पर सीधे लागू नहीं होता — क्योंकि हरियाणा में Rule 29 के तहत ढांचा अलग है (हर सोसाइटी खुद अपने rules बनाती है, Registrar सिर्फ मंज़ूर करता है, सीधे नियम नहीं थोपता) — फिर भी यह दिखाता है कि सेवा-शर्तों से जुड़े नियम बनाने के अधिकार को लेकर विवाद कोर्ट में टिक नहीं भी सकते, और यह एक ऐसा जोखिम है जिस पर हरियाणा में भी नज़र रखनी चाहिए।
हाल की केस स्टडी: कुरुक्षेत्र का Kharindwa Deeg PACS मामला
30 मई 2026 को कुरुक्षेत्र में ज़िला जन-शिकायत एवं जनसंपर्क समिति की बैठक में हरियाणा के विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण पंवार ने Kharindwa Deeg Primary Agricultural Cooperative Society Limited में कथित अनधिकृत भर्ती को लेकर Assistant Registrar को सीधे FIR दर्ज कराने का निर्देश दिया। उसी बैठक में तुलना के लिए Kirmich Cooperative Society के एक मामले का भी ज़िक्र हुआ, जहां इसी तरह की अनियमितता पर एक मैनेजर को निलंबित किया गया था — उस मामले की अलग रिपोर्ट अगली बैठक में मांगी गई। मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि विभागीय अधिकारी शिकायत निवारण बैठकों में खुद उपस्थित रहें (अधीनस्थों को न भेजें), और शिकायतों को अधिकतम दो बैठकों के भीतर निपटाया जाए, न कि 8-10 महीने तक लंबित रखा जाए।
इस मामले में मीडिया रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं बताया गया कि भर्ती में ठीक किस नियम का उल्लंघन हुआ — कितने पद शामिल थे या चयन प्रक्रिया में क्या गड़बड़ी थी, इसकी सार्वजनिक रूप से विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन यह मामला दो व्यावहारिक बातें साफ दिखाता है: पहला, PACS Service Rules का उल्लंघन अब सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं, बल्कि आपराधिक शिकायत तक जा सकता है; और दूसरा, ज़िला-स्तर की जन-शिकायत समितियां अब PACS-स्तर के भर्ती विवादों पर भी सीधे ध्यान दे रही हैं, जो सदस्यों और उम्मीदवारों के लिए शिकायत दर्ज कराने का एक व्यावहारिक, अपेक्षाकृत तेज़ मंच हो सकता है।
किसके लिए इसका क्या मतलब है
PACS प्रबंध समिति के लिए
अपने स्वीकृत Service Rules की एक कॉपी रखें और हर भर्ती/बर्खास्तगी निर्णय उसी के अनुसार दस्तावेज़ीकृत करें। सिर्फ “ज़रूरत है” या “सिफारिश आई” के आधार पर नियुक्ति करना — जैसा Kharindwa Deeg मामले में आरोप है — अब सीधे FIR तक जा सकता है।
PACS कर्मचारी/उम्मीदवार के लिए
नियुक्ति से पहले यह ज़रूर देखें कि विज्ञापन/चयन प्रक्रिया Registrar-अनुमोदित rules के अनुसार हो रही है या नहीं। अगर बर्खास्तगी या वेतन को लेकर विवाद हो, तो पहला कदम आमतौर पर Registrar के पास शिकायत या Labour Court (यदि वर्कमैन श्रेणी में आते हैं) होना चाहिए, सीधे High Court writ नहीं।
सदस्यों/उम्मीदवारों के लिए
अगर किसी PACS में भर्ती नियमों के विपरीत होती दिखे, तो ज़िला जन-शिकायत एवं जनसंपर्क समिति या सीधे Assistant Registrar/Registrar के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है — जैसा कुरुक्षेत्र के मामले में हुआ।
मृत कर्मचारी के परिवार के लिए
2022 की Compassionate Appointment नीति के तहत सहायता या नियुक्ति के लिए संबंधित PACS के माध्यम से Registrar कार्यालय से आवेदन प्रक्रिया की जानकारी लें — यह सामान्य भर्ती प्रक्रिया से अलग है और इसकी अपनी शर्तें हैं।
अभी क्या करना चाहिए — चेकलिस्ट
- संबंधित PACS के Registrar-अनुमोदित Service Rules और bye-laws की कॉपी हासिल करें — सिर्फ 2014 के मूल दस्तावेज़ पर न रुकें, 2022 के Compassionate Appointment संशोधन सहित नवीनतम संशोधन देखें।
- यह जांचें कि आपकी सोसाइटी की भर्ती प्रक्रिया में स्वीकृत योग्यता और चयन प्रक्रिया का पालन हो रहा है या नहीं।
- सेवा-विवाद की स्थिति में तुरंत यह तय करें कि आप “वर्कमैन” श्रेणी में आते हैं या नहीं — इससे तय होगा कि Labour Court विकल्प उपलब्ध है या नहीं (इसके लिए श्रम कानून सलाहकार से राय लेना उचित रहेगा)।
- नई राष्ट्रीय PACS HR Policy और हरियाणा की अपनी Service Rules के बीच के अंतर पर नज़र रखें — जब राज्य सरकार इसे औपचारिक रूप से अपनाएगी, नियम बदल सकते हैं।
- Haryana Contractual Employees (Security of Service) Act, 2024 का अपने रोज़गार पर असर स्पष्ट न हो तो इसकी पुष्टि Registrar कार्यालय से लिखित में मांगें, अनुमान पर न चलें।
आम भ्रम
भ्रम 1: “PACS कर्मचारी सरकारी कर्मचारी होता है।” गलत — PACS एक स्वतंत्र रूप से पंजीकृत सहकारी समिति है, सरकारी विभाग नहीं। इसके कर्मचारी सोसाइटी के अपने संसाधनों से वेतन पाते हैं, राज्य के बजट से नहीं।
भ्रम 2: “हर सेवा-विवाद के लिए सीधे High Court जाया जा सकता है।” व्यवहार में यह इतना सीधा नहीं — Section 102 arbitration और (लागू होने पर) Labour Court पहले के विकल्प हैं, और Multan Singh फैसले के बाद writ याचिका का रास्ता और सीमित हुआ है।
भ्रम 3: “PACS और CM-PACS के स्टाफ नियम एक जैसे हैं।” गलत — दोनों अलग तरह की सहकारी संस्थाएं हैं, अलग कानूनी आधार पर बनी हैं, और उनके staffing ढांचे भी अलग-अलग दस्तावेज़ों से तय होते हैं।
भ्रम 4: “नई केंद्रीय HR Policy आते ही पुराने राज्य नियम खत्म हो गए।” अभी तक ऐसी कोई राज्य-स्तरीय अधिसूचना सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है — जब तक हरियाणा सरकार औपचारिक रूप से नई नीति को अपने Rules में शामिल नहीं करती, मौजूदा PACS/PCCS Service Rules ही लागू माने जाने चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. हरियाणा में PACS कर्मचारियों की नियुक्ति कौन करता है?
सोसाइटी की प्रबंध समिति नियुक्ति करती है, लेकिन Registrar-अनुमोदित Service Rules में तय योग्यता और प्रक्रिया के दायरे में ही।
2. PACS कर्मचारी की सेवा-शर्तें किस दस्तावेज़ से तय होती हैं?
मुख्य रूप से राज्य के PACS/PCCS Service Rules (2014 व संशोधन) से, जो Haryana Co-operative Societies Rules, 1989 के Rule 29 के तहत Registrar-अनुमोदित होते हैं।
3. क्या PACS कर्मचारी सरकारी कर्मचारी माना जाता है?
नहीं। PACS एक स्वतंत्र सहकारी संस्था है; इसके कर्मचारी सोसाइटी के, सरकार के नहीं।
4. PACS में भर्ती को लेकर विवाद हो तो कहां शिकायत करें?
संबंधित Assistant Registrar/Registrar कार्यालय में, या ज़िला जन-शिकायत एवं जनसंपर्क समिति में — जैसा कुरुक्षेत्र के मामले में हुआ।
5. PACS कर्मचारी की बर्खास्तगी को चुनौती कहां दी जा सकती है?
आमतौर पर Section 102 के तहत Registrar arbitration में, या अगर कर्मचारी Industrial Disputes Act के तहत “वर्कमैन” की श्रेणी में आता है तो Labour Court में भी — यह 1986 के Sonepat Co-operative Sugar Mills मामले में तय हुआ सिद्धांत है।
6. क्या PACS कर्मचारी सीधे High Court में writ याचिका दायर कर सकता है?
जनवरी 2026 के Multan Singh फैसले के बाद यह पहले जितना सीधा नहीं रहा, क्योंकि cooperative society को सीधे “State”/सरकारी संस्था नहीं माना गया। असाधारण मामलों में यह रास्ता पूरी तरह बंद नहीं है, लेकिन पहला विकल्प आमतौर पर Registrar arbitration या Labour Court ही होना चाहिए।
7. कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार को क्या मिलता है?
2022 की Compassionate Financial Assistance or Appointment Policy के तहत परिवार को वित्तीय सहायता या, तय शर्तों पर, नियुक्ति का विकल्प मिल सकता है — विस्तृत शर्तें संबंधित PACS/Registrar कार्यालय से लेनी होंगी।
8. क्या नई राष्ट्रीय PACS HR Policy से हरियाणा के PACS कर्मचारियों का वेतन तुरंत बदल जाएगा?
अभी नहीं — यह नीति अभी एक राष्ट्रीय मॉडल/सुझाव के स्तर पर है। जब तक हरियाणा सरकार इसे अपने राज्य के Rules में औपचारिक रूप से नहीं अपनाती, तत्काल असर नहीं होगा।
9. क्या PACS और CM-PACS कर्मचारियों के नियम एक ही हैं?
नहीं, दोनों अलग-अलग तरह की सहकारी संस्थाएं हैं और उनके सेवा-नियम भी अलग दस्तावेज़ों से तय होते हैं। दोनों को एक न समझें।
10. Haryana Contractual Employees (Security of Service) Act, 2024 का PACS कर्मचारियों पर क्या असर है?
यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। इस पर विस्तृत विश्लेषण अलग लेख में उपलब्ध है (नीचे संबंधित लेख देखें)।
निष्कर्ष
हरियाणा में PACS के सर्विस रूल्स कोई एक सरल, केंद्रीकृत दस्तावेज़ नहीं, बल्कि तीन परतों का मेल हैं — 1984 का मूल अधिनियम, 1989 के सामान्य Rules, और PACS-विशेष Service Rules जो 2014 से लेकर 2022 तक कई बार संशोधित हुए हैं। इसके ऊपर अब केंद्र की नई HR Policy और राज्य का अपना Contractual Employees Act भी परतें जोड़ रहे हैं। जो चीज़ पूरी तरह स्पष्ट है: नियुक्ति प्रबंध समिति करती है पर Registrar-अनुमोदित नियमों के दायरे में, और विवाद की स्थिति में पहला रास्ता Section 102 arbitration या (लागू होने पर) Labour Court है, सीधे High Court writ नहीं। जो अभी तक पूरी तरह तय नहीं है: नई राष्ट्रीय HR Policy और Contractual Employees Act, 2024 — दोनों राज्य के मौजूदा PACS ढांचे से आगे चलकर ठीक कैसे जुड़ेंगे, इसका औपचारिक, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जवाब अभी सरकार की तरफ से नहीं आया है। जैसे ही कोई नई अधिसूचना आती है, यह लेख अपडेट किया जाएगा।
यह लेख उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड और सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित सामान्य जानकारी/विश्लेषण है। किसी विशेष विवाद या कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित मूल आदेश/नियम और योग्य पेशेवर सलाह देखी जानी चाहिए।
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